इतिहास से भविष्य तक संवाद का माध्यम बनेगा ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ का टाइम कैप्सूल

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Published on : 28 Jul, 26 16:07

इतिहास से भविष्य तक संवाद का माध्यम बनेगा ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ का टाइम कैप्सूल

उदयपुर। लेकसिटी उदयपुर में विश्वविख्यात वास्तुविद सूत्रधार मंडन की स्मृति को समर्पित देश की अपनी तरह की अनूठी परियोजना 'आर्किटेक्ट्स टॉवर' अब केवल एक स्थापत्य स्मारक नहीं, बल्कि इतिहास, वर्तमान और भविष्य के बीच संवाद का माध्यम बनने जा रही है। शोभागपुरा स्थित जे.के. सर्किल पर निर्माणाधीन लगभग 35 फीट ऊँचे इस टॉवर के साथ अब एक अभिनव 'टाइम कैप्सूल' भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें वर्तमान दौर के आर्किटेक्ट्स, डिज़ाइनर्स और उदयपुरवासियों की रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ, विचार, स्मृतियाँ और सपने सुरक्षित रखे जाएंगे। भारतीय स्थापत्य परंपरा, विज्ञान और सृजनशीलता के प्रतीक इस स्मारक में भविष्य की पीढ़ियों के लिए आज के समय का जीवंत दस्तावेज संजोया जाएगा। निर्माण कार्य तेज़ी से प्रगति पर है और इस अनूठी अवधारणा को लेकर शहरवासियों में विशेष उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिल रही है।

क्या है टाइम कैप्सूल पहल?

परियोजना के मुख्य सूत्रधार आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने बताया कि टाइम कैप्सूल के माध्यम से आर्किटेक्ट्स, डिज़ाइनर्स और उदयपुर के नागरिकों को अपनी स्मृतियाँ, विचार और रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ इतिहास का हिस्सा बनाने का अवसर दिया जा रहा है। यह केवल दस्तावेजों का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी की संवेदनाओं और रचनात्मक दृष्टि को भविष्य तक पहुँचाने का एक अनूठा प्रयास है। इस टाइम कैप्सूल को ठीक 20 साल बाद भारत की स्वतंत्रता के 100वें वर्ष में 26 जनवरी, 2047 को खोला जाएगा और 20 वर्ष पुरानी स्मृतियों को तत्कालीन पीढ़ी को दिखाया जाएगा।  

क्या भेज सकते हैं आप?

प्रतिभागी अपनी पसंद का कोई भी एक दस्तावेज या रचनात्मक सामग्री भेज सकते हैं। इसमें स्वयं का बनाया हुआ स्केच, वास्तुकला को अपने पेशे के रूप में चुनने के पीछे की प्रेरणा पर संक्षिप्त लेख, अपने प्रिय प्रोजेक्ट की कहानी, अपने कार्य का फोटोग्राफ, कोई डिज़ाइन शीट, ड्राइंग अथवा ऐसी स्मृति शामिल की जा सकती है जिसे वे भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहते हों। इसके अतिरिक्त अपने परिवार का चित्र तथा वर्तमान निवास स्थान का विवरण, आज के उदयपुर की संस्कृति और माहौल पर कविता अथवा संक्षिप्त लेख तथा भविष्य के उदयपुर की अपनी कल्पना भी भेजी जा सकती है। प्रत्येक प्रविष्टि के साथ प्रतिभागी का नाम, आयु, व्यवसाय एवं पूरा पता अवश्य अंकित होना चाहिए।

कौन कर सकता है भागीदारी?

परियोजना की टेक्नीकल डायरेक्टर प्रियंका कोठारी ने बताया कि यह पहल मुख्य रूप से आर्किटेक्ट्स और डिज़ाइनर्स के लिए आरम्भ की गई है, ताकि वे अपनी रचनात्मक यात्रा और अनुभवों को इतिहास का हिस्सा बना सकें। साथ ही उदयपुर के ऐसे नागरिक, जो इस शहर की विरासत और भविष्य से जुड़े अपने विचारों को संरक्षित करना चाहते हैं, वे भी इस अनूठी पहल में भाग लेकर अपनी प्रविष्टियाँ भेज सकते हैं।

कहाँ और कब भेजें अपनी प्रविष्टि?

इच्छुक प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियाँ 10 अगस्त से पहले आर्किटेक्ट सुनील एस. लड्ढा, वर्कस्पेस डिज़ाइन स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, प्लॉट संख्या जी-1-192, रीको औद्योगिक क्षेत्र, सुखेर, अर्बन स्क्वायर मॉल के पीछे, उदयपुर–313001, राजस्थान के पते पर भेज सकते हैं।

भविष्य के लिए एक अमूल्य विरासत

इस टाइम कैप्सूल को भविष्य में जब भी खोला जाएगा, तब आने वाली पीढ़ियाँ न केवल उस समय की स्थापत्य कला और रचनात्मक सोच को समझ सकेंगी, बल्कि यह भी जान सकेंगी कि आज का उदयपुर कैसा था, यहाँ के लोग कैसे रहते थे, क्या सोचते थे और अपने शहर के भविष्य के लिए उनके क्या सपने थे। इस प्रकार यह टाइम कैप्सूल वर्तमान और भविष्य के बीच एक सशक्त सांस्कृतिक और बौद्धिक सेतु का कार्य करेगा।

निर्माण कार्य ने बढ़ाई शहरवासियों की उत्सुकता

शोभागपुरा स्थित जे.के. सर्किल पर आर्किटेक्ट्स टॉवर का निर्माण कार्य निरंतर प्रगति पर है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर शहरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में नागरिक निर्माण स्थल पर पहुँचकर परियोजना की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और इसे उदयपुर की भावी स्थापत्य पहचान के रूप में देख रहे हैं। लोगों का मानना है कि यह परियोजना शहर की सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और वास्तु विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगी।

बनेगी उदयपुर की नई पहचान

परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का विश्वास है कि पूर्ण होने के बाद आर्किटेक्ट्स टॉवर भारतीय स्थापत्य परंपरा, विज्ञान, कला और सृजनशीलता का अद्वितीय प्रतीक बनेगा। इसके साथ स्थापित टाइम कैप्सूल इस स्मारक को केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं, बल्कि इतिहास, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाली प्रेरणादायी धरोहर के रूप में स्थापित करेगा, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और वास्तुविदों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।
 


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