उदयपुर, भुवाणा मार्ग स्थित देवेन्द्रधाम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र मुनि ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु अज्ञान नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु ही मानव जीवन के सच्चे पथप्रदर्शक हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु का ज्ञान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और परिवार, समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी बताते हैं। गुरु के सान्निध्य से व्यक्ति के विचारों में शुद्धता आती है, चरित्र का निर्माण होता है और आत्मविश्वास का विकास होता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अनुपम अवसर है।
सुरेंद्र मुनि महाराज द्वारा सभी श्रद्धालुओं को भगवान आदिनाथ व आदि महापुरुषों के चरणों में गुरु वंदना की विधि करवाई गयी.
डॉ. राजेन्द्र मुनि ने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन से दुर्गुणों का त्याग तथा सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। गुरु की प्रेरणा से व्यक्ति न केवल अपना आत्मकल्याण करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। सच्ची श्रद्धा और समर्पण से गुरु का अनुसरण करने वाला साधक जीवन में सफलता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
धर्मसभा के उपरांत गुरु वंदन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समाजजनों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ गुरुजनों का अभिनंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन, महामंत्री हिम्मत बड़ाला, कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़, पूर्व महापौर रंजनी डांगी, पूर्व जिला प्रमुख मधु मेहता सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अंत में उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगलाचरण करते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक प्रगति की मंगलकामना व्यक्त की।