गुरु पूर्णिमा पर गूंजा कृतज्ञता और समर्पण का संदेश, साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने बताया गुरु का महत्व

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Published on : 29 Jul, 26 14:07

गुरु पूर्णिमा पर गूंजा कृतज्ञता और समर्पण का संदेश, साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने बताया गुरु का महत्व

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन माला में बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा 6 ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि जिन शासन में प्राप्त महापुरुषों और गुरु भगवंतों के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। कृतज्ञता के बिना जीवन में संस्कार और सदाचार का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिसने हमें कुछ दिया है, जहां से हमें ज्ञान और मार्गदर्शन मिला है, उसे सदैव श्रद्धा भाव से याद रखना चाहिए। गुरु भगवंतों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए एक दिन निर्धारित होना भी सौभाग्य की बात है। गुरु पूर्णिमा केवल पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आभार व्यक्त करने का अवसर है।
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने परोपकार की भावना को समझाते हुए कहा कि इंसान एक पेड़ से भी सीख सकता है, जो स्वयं धूप सहन करके दूसरों को छाया और शीतल हवा प्रदान करता है। जीवन में स्वयं कष्ट सहन कर लें, लेकिन हमारे कारण जुड़े किसी व्यक्ति को कष्ट न पहुंचे, यही सच्ची मानवता है। उन्होंने कहा कि संसार में मेरी पहली गुरु मेरी मां रही, जिन्होंने केवल संसार का परिचय ही नहीं कराया बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी दिए।
इस अवसर पर साध्वी नमनरुचि श्रीजी ने कहा कि गुरु के बिना धर्म और मोक्ष के मार्ग का ज्ञान प्राप्त करना कठिन है। गुरु की महिमा प्रभु के समान है, जो जीवन की मिट्टी को भी संस्कारों से संवार देते हैं।
साध्वी योगरुचि श्रीजी ने कहा कि हम सभी के जीवन के केंद्र में गुरु होते हैं और हम उनकी शाखाओं के समान हैं। अपनी भूलों के लिए गुरु से क्षमा मांगनी चाहिए, क्योंकि गुरु सदैव करुणा और सहृदयता के साथ क्षमा प्रदान करते हैं। साध्वी तन्मयरुचि श्रीजी ने कहा कि गुरु और गोविंद में भी गुरु को प्राथमिकता दी गई है। अध्यापक हमें शिक्षा देता है, जबकि गुरु हमारे संपूर्ण जीवन का निर्माण करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रकाश नागौरी ने कहा कि विनम्रता, निष्ठा, समर्पण, भक्ति और लगन से जीवन में सिद्धि प्राप्त होती है। जब इन गुणों का विकास होता है तो गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वही आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मयरुचि श्रीजी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।  


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