उदयपुर। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा वर्ष 2022 में पुनर्मुद्रित पुस्तक 'भारत के नारी रत्न' में पन्ना धाय की जीवनी एवं उनकी ऐतिहासिक पहचान को लेकर किए गए बदलाव पर गुर्जर समाज उदयपुर के सभी चौखलों के प्रतिनिधियों ने गहरा रोष व्यक्त किया। इस संबंध में समाज के प्रतिनिधियों ने शनिवार को जिला कलक्टर कार्यालय, उदयपुर पहुंचकर माननीय जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा तथा पुस्तक में प्रकाशित तथ्यों को ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर तत्काल संशोधित करने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि केंद्र सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'भारत के नारी रत्न' (आठवां पुनर्मुद्रण, 2022, संपादक: ऋतुश्री, ISBN: 978-93-5409-692-1) के पृष्ठ संख्या 8 पर पन्ना धाय की जीवनी में उनकी मूल ऐतिहासिक पहचान एवं जातीय पृष्ठभूमि को बदलकर 'खीची राजपूत वंश की क्षत्राणी' बताया गया है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत एवं भ्रामक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार के मंत्रालय के अधीन प्रकाशित पुस्तक में इस प्रकार के परिवर्तन न केवल पन्ना धाय के अद्वितीय बलिदान का अपमान हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के समक्ष गलत इतिहास प्रस्तुत करने का भी प्रयास हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि यह विवरण राजस्थान सरकार द्वारा मान्य ऐतिहासिक अभिलेखों तथा विभिन्न प्रमाणित इतिहासकारों के शोध से मेल नहीं खाता।
समाज की ओर से अपने पक्ष के समर्थन में कई ऐतिहासिक प्रमाण एवं दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। इनमें स्वर्गीय उदय लाल धाभाई द्वारा लिखित एवं प्रमाणित ऐतिहासिक पुस्तकें, राजसमंद के कमेरी स्थित पन्ना धाय पैनोरमा, चित्तौड़गढ़ के पाण्डोली स्थित पन्ना धाय पैनोरमा, उदयपुर के गोवर्धन विलास स्थित पन्ना धाय दीर्घा तथा पन्ना धाय पार्क एवं प्रतिमा का उल्लेख किया गया। समाज का कहना है कि ये सभी स्थल राजस्थान सरकार द्वारा प्रमाणित इतिहास के जीवंत प्रतीक हैं, जहां पन्ना धाय का प्रामाणिक इतिहास अंकित है।
इस अवसर पर गुर्जर समाज उदयपुर के अध्यक्ष श्री नारायणलाल, उपाध्यक्ष श्री हरीश धायभाई, कोषाध्यक्ष श्री रामचंद्र धाभाई, संरक्षक श्री देवनारायण धायभाई, श्री रामचंद्र धाभाई, सदस्य श्री रवि धाभाई सहित सभी चौखलों के प्रतिनिधि एवं समाज के गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
ज्ञापन के माध्यम से समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि केंद्र सरकार एवं संबंधित प्रकाशन विभाग इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर पन्ना धाय के जीवन एवं वंश से संबंधित विवरण में आवश्यक संशोधन करे, ताकि इतिहास की प्रामाणिकता एवं महान बलिदानी व्यक्तित्व का सम्मान अक्षुण्ण बना रहे।