उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का स्वागत करते हुए कहा कि एमपीयूएटी राज्य के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों में से एक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय दक्षिणी राजस्थान के आठ जिलों में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों और कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कुलगुरु ने विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 91 अनुसंधान परियोजनाएं संचालित हैं, जिनमें 38 आईसीएआर द्वारा वित्तपोषित हैं। पिछले 5 वर्षों में 12 नई किस्में विकसित एवं अधिसूचित की गई हैं, पिछले वर्ष 2,747.21 क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन किया गया है तथा जैविक खेती, कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में अनेक नवाचार विकसित किए गए हैं। मेवाड़ क्षेत्र की प्रमुख फसल मक्का में प्रमुख कीट फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण हेतु सिलिका पाउडर का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर बुरकाव द्वारा जैविक नियंत्रण तकनीक विकसित की गई है। इसके अतिरिक्त, कृषि पादप अवशेषों से बायोचार बनाने हेतु भट्टी का नवाचार भी विकसित किया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने 137 किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9,245 किसानों एवं हितधारकों को लाभान्वित किया है।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने 58 पेटेंट, 81 एमओयू तथा 497 शोध प्रकाशनों के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। एनआईआरएफ रैंकिंग वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय को राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की 50–100 रैंक बैंड में स्थान मिला है तथा विश्वविद्यालय का स्कोपस h-इंडेक्स 85 है। साथ ही, विश्वविद्यालय की तीन अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं (AICRP) को आईसीएआर द्वारा देश का सर्वश्रेष्ठ केंद्र घोषित किया गया है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री अशोक कुमार, वित्त नियंत्रक श्री महेंद्र सिंह, निदेशक अनुसंधान डॉ. मनोज कुमार महला, राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता, मत्स्यिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एल. एन. महावर, डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, जोनल निदेशक अनुसंधान डॉ. एस. एस. लखावत, एसोसिएट निदेशक अनुसंधान डॉ. आर. के. शर्मा सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय एवं सराहनीय सहयोग प्रदान किया।