उदयपुर। सावन मास के पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ में आयोजित ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने समाज से सेवा और परोपकार की भावना को निरंतर बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा अनवरत बहकर जन-जन की प्यास बुझाती और जीवन देती है, उसी तरह समाज में सेवा का प्रवाह भी निरंतर चलता रहना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य जीवन केवल अपने लिए नहीं बल्कि मानव सेवा और परोपकार के लिए दिया है।
अग्रवाल ने कहा कि ‘नर में नारायण’ की भावना ही सच्ची सेवा का आधार है। नारायण सेवा संस्थान जाति, धर्म और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की सेवा कर रहा है। यहां न गरीब पराया है और न अमीर। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग किसी का दिल न दुखाना और जरूरतमंद के जीवन में सहारा बनना है। शिव का संदेश हमें समाज और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देता है। जिस प्रकार समुद्र मंथन से निकले विष को शिव ने स्वयं धारण कर लिया, उसी प्रकार हमें भी समाज की पीड़ा को कम करने के लिए त्याग और सेवा का भाव रखना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष अग्रवाल ने संस्थान में उपचार एवं पुनर्वास सेवाएं प्राप्त कर रहे दिव्यांगजनों और उनके परिजनों से सीधे संवाद किया। उन्होंने सेवाओं का फीडबैक लेते हुए जाना कि संस्थान से जुड़ने के बाद उनके जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं।उन्होंने मध्य प्रदेश के अंकुर, बाड़मेर के सताराम और दिल्ली के विराट से उनके जीवन की परिस्थितियों, दिव्यांगता के बाद आई चुनौतियों तथा संस्थान से उपचार, कृत्रिम अंग एवं अन्य सेवाएं प्राप्त करने के बाद आए सकारात्मक बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। परिजनों से भी सेवा व्यवस्था और सहयोग को लेकर उनके अनुभव जाने।
अग्रवाल ने कहा कि किसी दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास लौटाना और उसे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना केवल सहायता नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारा दायित्व है। समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को इस सेवा-यात्रा में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।