भीड़ भाड़ का है जमाना चाहता नहीं कोई किसी को अपनाना दर्द लिए बैठा वह पाता जब मित्र को बया करता हर दर्द मुस्कुरा लेता नहीं रहता उसकी खुशी का ठिकाना