जैसलमेर । अपने भव्य दुर्ग, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं सशक्त पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर अब नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए TEJAS (Transforming Entrepreneurial Journeys Across States & Districts½ जिला स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन जैसलमेर में किया गया, जिसमें 200 से अधिक विद्यार्थियों, नवोदित उद्यमियों, स्टार्टअप संस्थापकों, शिक्षाविदों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा नवाचार इकोसिस्टमसे जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों एवं क्षमताओं को वैश्विक स्तर के उद्यमों में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।
यह कार्यशाला भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ¼DPIIT) की स्टार्टअप इंडिया पहल के अंतर्गत, जिला प्रशासन, जैसलमेर तथा सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग ¼DoIT&C) राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमशील सोच को प्रोत्साहित करना, नवाचार इकोसिस्टमको सुदृढ़ करना तथा स्थानीय नवप्रवर्तकों को भारत के विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ना था।
जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने कार्यक्रम का शुभारम्भ किया एवं युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि वे रोजगार खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी बनें ताकि वे स्वयं लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान कर सकें। उन्होंने सरकारी योजनाओं एवं नवाचार आधारित अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए उद्यमिता को रोजगार सृजन, स्थानीय मूल्य संवर्धन एवं सतत जिला विकास का प्रभावी माध्यम बताया।
जिला कलक्टर ने कहा कि हमारे शैक्षणिक संस्थान भविष्य के उद्यमियों को तैयार करने की आधारशिला हैं। यदि शिक्षा, उद्योग एवं सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए एवं नवाचार तथा उद्यमशील सोच को बढ़ावा दिया जाए, तो हमारे युवा जैसलमेर की विशिष्टताओं को सतत उद्यमों एवं नए रोजगार अवसरों में परिवर्तित कर सकते हैं।
कार्यशाला में 200 से अधिक प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता जिले में बढ़ती उद्यमशीलता का प्रमाण रही।
इसके पश्चात सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, राजस्थान की संयुक्त निदेशक जयश्री ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विभाग द्वारा iStart Rajasthan जैसी पहलों के माध्यम से जिला स्तर पर नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत एवं उद्यमियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
कार्यशाला में स्टार्टअप इंडिया, DPIIT की एसोसिएट श्रीमती सीमा चारण ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए प्रतिभागियों को स्टार्टअप मान्यता, वित्तीय सहायता, इन्क्यूबेशन, बौद्धिक संपदा संरक्षण, मेंटरशिप एवं बाज़ार उपलब्धता जैसी सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवोदित उद्यमियों को राष्ट्रीय पहलों का लाभ उठाकर अपने नवाचारों को सफल एवं विस्तार योग्य उद्यमों में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
प्रतिभागियों को राजस्थान के नवाचार इकोसिस्टमका विस्तृत परिचय पैजंतज त्ंरंेजींद टीम से उपनिदेशक मनोज विश्नोई द्वारा दिया गया, जिसमें श्रीमती वार्तिका सोनी, सुश्री आयुषी मिंज, श्री अनिमोन स्वर्णिम एवं महेश राजभर शामिल रहे। टीम ने इन्क्यूबेशन, स्टार्टअप मान्यता, मेंटरशिप, बाज़ार संपर्क एवं संस्थागत सहयोग जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए युवाओं को पैजंतज प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत जिला ’’उद्योग केन्द्र रू स्थानीय उद्यमों का उत्प्रेरक’’ विषय पर जिला उद्योग केन्द्र, जैसलमेर की महाप्रबंधक श्रीमती संतोष कुमारी ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने एमएसएमई प्रोत्साहन योजनाओं, सरकारी सहायता एवं संस्थागत समर्थन की जानकारी साझा करते हुए उद्यमियों को उपलब्ध सरकारी तंत्र का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण स्थानीय उद्यम से सत्त विकास तक- जिला नवाचार इकोसिस्टमको सशक्त बनानाष् विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन धवल सिंघल ने किया। चर्चा में श्री मयंक भाटिया (प्रबंध निदेशक, प्रिया ग्रुप ऑफ होटल्स, जैसलमेर), श्री अवधेश (पूर्व महाप्रबंधक एवं सीएसआर प्रमुख, एसजेवीएन) तथा विशन सिंह राठौड़ (प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय, जैसलमेर) ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने उद्योग, शिक्षा, सरकार एवं उद्यमियों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने तथा सत्त उद्यम विकास की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में स्थानीय उद्यमियों की प्रेरणादायक सफलता की कहानियाँ भी प्रस्तुत की गईं। अर्जुन दास चांडक, आयोजक एवं अध्यक्ष, श्रीगणेशम, जोधपुर तथा क्राफ्ट पैलेस, जैसलमेर ने परंपरा में नवाचार - हस्तशिल्प एवं पर्यटन के माध्यम से मूल्य सृजन’’ विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर के सफल व्यवसाय में परिवर्तित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त राजीविका महिला उद्यमी एवं अमारा होममेड नेचुरल सोप की संस्थापक श्रीमती सूरजा बिश्नोई ने ष्एक ग्रामीण महिला उद्यमी की यात्रा विषय पर अपने प्रेरणादायक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान एवं दृढ़ संकल्प के माध्यम से सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक उद्यमशील अवसर उपलब्ध हैं।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों, मेंटर्स एवं उद्योग प्रतिनिधियों से व्यवसायिक विचारों के सत्यापन, सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, निवेश एवं स्टार्टअप अवसरों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस संवाद ने विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों, उद्योग जगत एवं सरकारी संस्थाओं के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित किए।
कार्यक्रम का समापन सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग, राजस्थान के उपनिदेशक श्रीमती जयश्री द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके पश्चात आयोजित नेटवर्किंग लंच में प्रतिभागियों को विशेषज्ञों, स्टार्टअप संस्थापकों एवं सरकारी अधिकारियों से संवाद स्थापित करने तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिला।
इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि जैसलमेर में उद्यमिता अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। पर्यटन, हस्तशिल्प, डिजिटल नवाचार, एमएसएमई, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सतत विकास जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों के कारण जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान के एक उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है।
सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं नवाचार इकोसिस्टमसे जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर ज्म्श्र।ै पहल ने जिला स्तर पर उद्यमिता को नई दिशा प्रदान की है तथा युवाओं को स्थानीय स्तर पर आधारित, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है।
स्टार्टअप इंडिया द्वारा आकांक्षी जिलों में उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में संचालित ज्म्श्र।ै पहल जैसलमेर जैसे जिलों की अप्रयुक्त संभावनाओं को राष्ट्रीय अवसरों से जोड़ते हुए नवाचार आधारित विकास को गति प्रदान कर रही है तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।