उदयपुर : साई तिरुपति विश्वविद्यालय की ओर से पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (PIMS), उमरड़ा, उदयपुर में "अंगदान जागरूकता अभियान-2026" के सफल समापन एवं भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर एक प्रभावशाली जागरूकता व्याख्यान एवं वैलिडिक्टरी (समापन) समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, भारत सरकार के "अंगदान जीवन संजीवनी अभियान" तथा राजस्थान सरकार के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रशांत नाहर रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में रजिस्ट्रार डॉ. देवेंद्र जैन तथा प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेश गोयल उपस्थित रहे।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है, जो किसी व्यक्ति के जीवन के अंत के बाद भी अनेक लोगों को नया जीवन प्रदान कर सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों, चिकित्सकों एवं समाज के सभी वर्गों से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।कार्यक्रम के प्रथम व्याख्यान में डॉ. प्रणव कुमार, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी तथा नोडल अधिकारी, अंगदान जागरूकता अभियान ने "मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (THOTA)" पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने अधिनियम के कानूनी प्रावधानों, नैतिक पहलुओं तथा अंगदान की पारदर्शी एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया तथा समाज में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया।द्वितीय व्याख्यान में डॉ. अमित कुमार, प्रोफेसर, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग ने "ब्रेन स्टेम डेथ की अवधारणा" पर विस्तृत प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि ब्रेन स्टेम डेथ की सही पहचान एवं समझ मृतक अंगदान की आधारशिला है तथा इससे अनेक गंभीर रोगियों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है।
कार्यक्रम में डा. सरिता काँथ, चिकित्सा अधीक्षक, डा. कमलेश शेखावत, मेडिकल डायरेक्टर, डा. दिलीप कुमार पारीक, एकेडमिक डायरेक्टर, एवं विभिन्न घटक महाविद्यालयों के प्राचार्यों, संकाय सदस्यों, रेजिडेंट चिकित्सकों, इंटर्न्स, स्नातक विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने अंगदान से जुड़े विभिन्न कानूनी, चिकित्सीय एवं सामाजिक पहलुओं पर विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।वैलिडिक्टरी समारोह में अंगदान जागरूकता अभियान-2026 के अंतर्गत जुलाई माह में आयोजित विभिन्न गतिविधियों, जनजागरूकता रैली, शपथ ग्रहण, ग्रीन इल्यूमिनेशन, अतिथि व्याख्यान एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया।
अभियान के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, आयोजन समिति, एनएसएस इकाई, ऑर्गन डोनेशन मॉनिटरिंग यूनिट तथा विद्यार्थियों को उनके सक्रिय सहयोग एवं समर्पण के लिए समृति चिन्ह के साथ प्रंशसा पत्र प्रदान करते हुए धन्यवाद व्यक्त किया गया।कार्यक्रम के अंत में डा. श्रीनिधि, प्रोफेसर, फिजियोलॉजी द्वारा यह संकल्प दोहराया गया कि अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा अधिकाधिक लोगों को स्वैच्छिक अंगदान के लिए प्रेरित करने के प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।
"अंगदान - महादान, जीवन का सबसे बड़ा उपहार" का संदेश देकर कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।