सुविवि- द लूम, द लेंस, द लेगेसी आधारित कार्यशाला में मीडिया की भूमिका पर रहा फोकस

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Published on : 07 Aug, 26 14:08

रैम्प पर सजी हथकरघा विरासत स्टूडेंट् डिजाइनरों ने दिखाई परंपराओं की अनूठी तस्वीर

सुविवि- द लूम, द लेंस, द लेगेसी आधारित कार्यशाला में मीडिया की भूमिका पर रहा फोकस

उदयपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और फैशन टेक्नोलॉजी एवं डिजाइनिंग द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में "द लूम, द लेंस, द लेगेसी" थीम पर एक दिवसीय कार्यशाला और डिजाइन शो का आयोजन किया गया।

पहले सत्र में मीडिया की भूमिका, कैमरे और लेंस का महत्व और उसके प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई वहीं संध्याक़ालीन सत्र में आयोजित डिज़ाइन शो में छात्राओं ने भारतीय संस्कृति से जुड़े पारंपरिक परिधानों का रैंप वाक के माध्यम से प्रदर्शन कर मन मोह लिया।

उद्घाटन सत्र में सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर कैलाश डागा ने लूम और लेंस के समन्वित रूप को रेखांकित करते हुए पारम्परिक सांस्कृतिक विरासत का महत्व बताया और मेवाड़- मारवाड़ के हथकरघा कारीगरों को सम्मानित किया।

कुलसचिव डा. वृद्धि चन्द गर्ग ने मानवविज्ञान को विश्वविद्यालय में नए विषय के रूप में आरंभ करने की बात पर बल दिया।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी और ग्रेवी वर्ड फोटोग्राफी अवॉर्ड विजेता दिनेश कोठारी ने कैमरे के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को फोटोग्राफी के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ कुंजन आचार्य ने कहा कि एक फोटो एक हजार शब्दों के बराबर होता है उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में फोटोग्राफी में एआई और डीप फेक जैसी चुनौतियों की जानकारी दी।

फ़ैशन टेक्नोलॉजी एवं डिजाइन की विभागाध्यक्ष डॉ डॉली मोगरा ने कहा कि फैशन के बदलते दौर में हथकरघा को संरक्षित करने की आवश्यकता है।

आर्ट्स कॉलेज के डीन प्रोफ़ेसर नीरज शर्मा ने परंपरा और नवाचार के समन्वय को भविष्य के फैशन के लिए महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र उप निदेशक डॉ. नीलांजन खटूआ ने विरासत और संस्कृति को जीवंत बनाये रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से ज़ानकारी दी।

दूसरे सत्र में हथकरघा से निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसको देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी इस अवसर पर पारंपरिक हथकरघा कारीगरों ने अपने अनुभव साझा किये। नंदलाल सालवी ने 'सालवी बुनकर भवन' का एक मॉडल प्रस्तुत कर के परंपरागत कारीगरों के घरों एवं उनकी जीवनशैली के बारे में बताया।

तीसरे सत्र में अहिल्याबाई होल्कर के हथकरघा में योगदान को याद करते हुए उनके सम्मान में नृत्यांगना शैली श्रीवास्तव ने पारंपरिक नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर मन मोह लिया।

इसके पश्चात फैशन टेक्नोलॉजी विभाग के द्वारा एक फैशन- डिजाइनिंग शो का आयोजन किया। विभाग के विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने यह संदेश दिया कि भारतीय हथकरघा केवल संग्रहालयों में सहेजकर रखने वाली विरासत नहीं, बल्कि आधुनिक फैशन और डिजाइन का मजबूत आधार भी बन सकता है। पारंपरिक वस्त्रों को समकालीन शैली में प्रस्तुत करने के प्रयास को अतिथियों और दर्शकों ने ख़ूब सराहा।

इस अवसर पर विशेष अतिथि राजस्थान सरकार के हैंडीक्राफ्ट विभाग के उप निदेशक रजत वर्मा, सीसीआरटी उदयपुर के कार्यक्रम अधिकारी अविक सरकार, वेलबिंग की संस्थापिका अध्यक्ष प्रोफेसर विजय लक्ष्मी चौहान, श्वेता शर्मा, इंटेक के डॉ. गौरव सिंघवी, मानवविज्ञान सर्वेक्षण के अजय चौधरी, भारतीय सेना के कर्नल कुमार सहित सभी अतिथियों ने विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए।

कार्यक्रम का संचालन अन्नू जैन और छवि व्यास ने किया। भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र के उप निदेशक डॉ. नीलांजन खटूआ ने कार्यक्रम मे उपस्थित सभी लोगों का आभार प्रकट किया।


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