सकारात्मक सोच जीवन की सबसे बड़ी शक्ति, सेवा और सद्भाव ही सच्चा धर्मःप्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि

( 175 बार पढ़ी गयी)
Published on : 07 Aug, 26 14:08

सकारात्मक सोच जीवन की सबसे बड़ी शक्ति, सेवा और सद्भाव ही सच्चा धर्मःप्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि

उदयपुर। देवेंद्रधाम में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचनमाला में प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य का जीवन उसकी सोच से बनता और बिगड़ता है।

यदि विचार सकारात्मक हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का मार्ग बन जाती हैं, जबकि नकारात्मक सोच व्यक्ति को निराशा, तनाव और असफलता की ओर ले जाती है।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।उन्होंने कहा कि जिनशासन और जिनधर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का विज्ञान हैं।

धर्म का वास्तविक स्वरूप सेवा, करुणा, संयम और आत्मकल्याण में निहित है। जो व्यक्ति धर्म को अपने आचरण में उतारता है, वही जीवन को सार्थक बना सकता है।प्रवर्तकेश्री ने प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से बताया कि सेवा, परोपकार और करुणा मानवता की सबसे बड़ी पहचान हैं।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सच्ची साधना है।

उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचार रखने वाला व्यक्ति हर चुनौती में समाधान खोज लेता है, जबकि नकारात्मक सोच मनुष्य की क्षमता को सीमित कर देती है।उन्होंने कहा कि मन के भाव ही कर्मों का निर्माण करते हैं और वही भविष्य का स्वरूप तय करते हैं।

इसलिए क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार जैसे विकारों का त्याग कर प्रेम, क्षमा, संयम और सद्भाव को जीवन का आधार बनाना चाहिए।

यही मूल्य व्यक्ति को आत्मिक उन्नति के साथ समाज में सम्मान और शांति प्रदान करते हैं।प्रवचन के अंत में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया तथा समाज में सेवा, सद्भाव, सकारात्मक सोच और मानवता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

श्रीसंघ द्वारा तपस्वियों व समाजसेवियों का अभिनंदन किया गया।


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.