अरावली संरक्षण पर सर्वाेच्च न्यायालय की समिति 10 अगस्त को करेगी सार्वजनिक परामर्श

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Published on : 07 Aug, 26 16:08

जिला परिषद सभागार उदयपुर में होगा हितधारकों से संवाद

उदयपुर। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा अरावली पर्वतमाला एवं उससे संबंधित पर्यावरणीय, पारिस्थितिक तथा खनन संबंधी विषयों के परीक्षण एवं आवश्यक अनुशंसाएँ प्रस्तुत करने के उद्देश्य से गठित उच्च स्तरीय समिति 10 अगस्त 2026 (सोमवार ) अपराह्न3 बजे जिला परिषद सभागार, उदयपुर में सार्वजनिक परामर्श करेगी।

इसमें सभी हितधारक भाग लेंगे।उल्लेखनीय है कि सर्वाेच्च न्यायालय समय-समय पर अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा वैध खनन गतिविधियों के संबंध में विभिन्न निर्देश जारी करता रहा है।

इन्हीं विषयों के व्यापक परीक्षण तथा विभिन्न पक्षों के विचार प्राप्त करने के उद्देश्य से गठित समिति देश के विभिन्न क्षेत्रों में हितधारकों से संवाद स्थापित कर रही है।

इसी क्रम में उदयपुर में यह सार्वजनिक परामर्श आयोजित किया जा रहा है। अरावली पर्वतमाला राजस्थान के दक्षिणी भाग, विशेषकर उदयपुर संभाग के प्राकृतिक, पर्यावरणीय, जल संरक्षण एवं खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उदयपुर क्षेत्र में खनिज आधारित उद्योग, पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र, वन क्षेत्र, जलागम तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषय हैं।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समिति ने उदयपुर में सार्वजनिक परामर्श आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों, चुनौतियों एवं सुझावों का समुचित संकलन किया जा सके।इस सार्वजनिक परामर्श में नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं, उद्योग एवं व्यापार संगठनों, खनिज पट्टाधारकों, पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा अन्य सभी हितधारकों को अपने सुझाव, अभिमत एवं व्यावहारिक अनुभव समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

समिति द्वारा प्राप्त सभी सुझावों एवं अभिमतों का विधिवत परीक्षण कर उन्हें अपनी अनुशंसाओं में सम्मिलित करने पर विचार किया जाएगा।

समिति ने सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध किया है कि वे अपने सुझाव तथ्यों एवं व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर प्रस्तुत करें, ताकि अरावली क्षेत्र से संबंधित भविष्य की अनुशंसाएँ संतुलित, वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं जनहितकारी हो सकें।


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