जिस गति से हम अनियंत्रित भूमिजल का दोहन कर रहे हैं इस गति से धरती कितने ही जगह अंदर बैठ रही है, कहीं कहीं तो 25 सेंटीमीटर वर्ष की गति से जमीन नीचे बैठ रही है परिणाम स्वरूप भूजल पुनर्भरण की जगह भी कम होती जा रही है। कहीं कहीं तो धरती पुनर्भरण योग्य भी नहीं रही है। यह बात पिछले 26 वर्षों से जल संरक्षण अभियान में लगे जल मित्र डॉ पी सी जैन ने पी एम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक में चयनित जल दूत या जल जानकार बने विद्यार्थियों के समक्ष कही। इन जलदूत से उन्होंने कहा कि अभी भी उचित समय है कि हम कैच रेन व्हेन ईट फॉल्स और व्हेयर ईट फॉल्स के सिद्धांत को पालन कर घर-घर में लगे इन "भूमि दोहन यंत्रों" से जो दोहन हो रहा है उसे पुनर्भरण कर अपनी धरती को बचाएं। जल प्रयास के इस कार्यक्रम में पानी के बारे में और भी कई जानकारी दी गई।
मनन पवार, तीर्थ दवे, काव्या जैन, मनदीप खराडे, निहारका आढा, आयुष कनौजिया, मनस्वी कुमारी, लक्षिता सेन, आराध्या शर्मा, नकुलनाथ चौहान, भव्य राज, ओजस्वी शर्मा, चित्रांगदा सक्सेना, पूर्वी वसीटा, अरुण, भूमिका कुमारी यह
जल जानकार बने।
डॉक्टर जैन का स्वागत उप आचार्य ऐ एच खान ने किया तारा चन्द सैनी ने संचालन किया। आचार्य
राजेश्वर सिंह ने डॉक्टर पीसी जैन को
धन्यवाद ज्ञापित किया।
इसी दिन दूसरा जल जागरण
कार्यक्रम राजकीय सिन्धी भाषी स्कूल ,प्रताप नगर में आयोजित किया जिसमे 8 जल
दूत बनाये गए और जल जानकारी देकर नित्य जल बचाना और वर्षा में जल
बढ़ाना का संकल्प कराया | संचालन शम्भू सिंह आसोलिया ने किया |