नई दिल्ली । माल ढुलाई लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने तथा रेलवे की माल ढुलाई हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने, निर्बाध क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और मजबूत ‘‘फर्स्ट-एंड-लास्ट-माइल’’ समाधान प्रदान करने के लिए कई तरह की रणनीतियाँ लागू की हैं।मुख्य पहलटर्मिनल का विकासटर्मिनलों पर रेल माल ढुलाई की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए, भारतीय रेलवे ने दोतरफा तरीका अपनाया है।
‘‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल पॉलिसी के तहत आधुनिक रेल माल ढुलाई टर्मिनलों के विकास को बढ़ावा देना और रेलवे के अपने गुड्स शेड (माल गोदामों) में बुनियादी ढांचे को बढ़ाना या अपग्रेड करना।निजी निवेश के जरिए कार्गो टर्मिनल बनाने को बढ़ावा देने के लिए ‘‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल पॉलिसी शुरू की गई है।
जीसीटी की जगह का चुनाव इंडस्ट्री की मांग, कार्गो ट्रैफिक की संभावना, रेलवे के बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और उस इलाके की कुल लॉजिस्टिक्स क्षमता के आधार पर किया जाता है।
अब तक, 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित माल ढुलाई क्षमता 224 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इस पॉलिसी के तहत इन जीसीटीएस के जरिए लगभग रूपये 10,000 करोड़ का निजी निवेश जुटाया गया है।
2025-26 के दौरान इन जीसीटीएस पर 146 एमटी माल की ढुलाई की गई।वैगन इन्वेस्टमेंट स्कीमइंडियन रेलवे ने प्राइवेट सेक्टर के लिए वैगन में निवेश करने की कई स्कीमें लागू की हैं, जिनमें खास सामान (जैसे सीमेंट, तेल, स्टील, फ्लाई-ऐश आदि) के लिए बने स्पेशल वैगन भी शामिल हैं।
अब तक, स्पेशल मकसद वाले वैगन के लगभग 275 रेक और आम मकसद वाले वैगन के 397 रेक चल रहे हैं। इनसे बल्क सीमेंट, फ्लाई-ऐश, स्टील प्रोडक्ट, आयरन ओर और कोयले जैसे सामानों के ट्रांसपोर्ट में रेलवे की हिस्सेदारी (मोडल शेयर) बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा, ऑटोमोबाइल के ट्रांसपोर्ट के लिए एक अलग स्कीम है, जिसके तहत इंडस्ट्री के मालिकाना हक वाले लगभग 54 रेक चल रहे हैं।जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस स्कीमयह स्कीम कस्टमर की खास जरूरतों को पूरा करने के लिए कस्टमाइज्ड लॉजिस्टिक्स और डोर-टू-डोर पार्सल सर्विस देती है।
इस स्कीम के तहत, ‘‘वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म पर एग्रीगेटर्स, इंडिया पोस्ट के अलावा) के जरिए इन सर्विस में पार्सल स्पेस की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा दी गई है।
रेल मंत्रालय के तहत आने वाली पीएसयू, सीओएनसीओआर भी दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता सेक्टर में जेपीपी-आरसीएस का इस्तेमाल करके डोर-टू-डोर पार्सल सर्विस दे रही है।
सीओएनसीओआर सोनिक गुड्स शेड में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सर्विस भी दे रही है।बजट आवंटन और नेटवर्क का विस्तारपिछले 12 सालों में इंडियन रेलवे ने रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का काम बड़े पैमाने पर किया है।
इंडियन रेलवे में नए ट्रैक बिछाने/चालू करने संबंधी जानकारी के तहत 2009-14 में 7,599 किमी नए ट्रैक चालू किए गए नए ट्रैक चालू करने की औसत दर 4.2 किमी/दिन, 2014-26 में 36,429 किमी नए ट्रैक चालू किए गए नए ट्रैक चालू करने की औसत दर 8.32 किमी/दिन (लगभग 2 गुना) 01.04.2026 तकए भारतीय रेलवे में कुल 40,000 किलोमीटर लंबाई और लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 514 रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (169 नई लाइन, 29 गेज कन्वर्जन और 316 दोहरीकरण) मंजूर किए गए हैं।
इसका विवरण इस प्रकार है, श्रेणी प्रोजेक्ट की संख्या कुल नई लाइने 169 कुल लंबाई, 16,634 किमी मार्च 26 तक चालू लंबाई 3,361 किमी मार्च, 26 तक कुल खर्च, 1,57,572 करोड़ रुपये, गेज कन्वर्जन 29 कुल लंबाई, 3, 987 किमी मार्च 26 तक चालू लंबाई, 3,045 किमी मार्च 26 तक कुल खर्च, 24,227 करोड़ रुपये, दोहरीकरण 316 कुल लंबाई, 19,379 किमी, मार्च 26 तक चालू लंबाई, 6,177 किमी मार्च 26 तक कुल खर्च 1,23,454 करोड़ रुपये, कुल 514 कुल लंबाई, 40,000 किमी मार्च 26 तक चालू लंबाई, 12,583 किमी मार्च 26 तक कुल खर्च 3,05,253 करोड़ रुपये।डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोररेल मंत्रालय ने दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया था, लुधियाना से सोननगर 1337 किमी तक ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल 1506 (किमी.) तक वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर।
दोनों डीएफसी यानी ईस्टर्न डीएफसी 1337 (किमी) और वेस्टर्न डीएफसी (1506 किमी), चालू हो चुके हैं। डीएफसी पर औसतन हर दिन लगभग 443 ट्रेनें चलती हैं।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दिखाई है। माल ढुलाई की मात्रा लगातार बढ़ी है, साथ ही औसत गति भी बढ़ी है, टर्नअराउंड का समय कम हुआ है और विश्वसनीयता बेहतर हुई है।
क्थ्ब् ने माल ढुलाई के ट्रैफिक को ईडीएफसी और डब्ल्यूडीएफसी की ओर मोड़कर पारंपरिक नेटवर्क पर अतिरिक्त रास्ते बनाने में मदद की है।
नतीजतन, रेलवे अपने नेटवर्क पर अतिरिक्त माल और यात्री सेवाएं चलाने में सक्षम हुआ है।डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट का ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि इससे डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों और ज्यादा एक्सल लोड वाली ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी, पश्चिमी बंदरगाहों से उत्तरी इलाकों तक तेजी से पहुंच मिलेगी और डीएफसी के किनारे उद्योगों के साथ नए टर्मिनल/लिंक विकसित होंगे।केंद्रीय बजट 2026 में पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले एक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (माल ढुलाई गलियारे) की घोषणा की गई है।
इस कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने/अपडेट करने का काम शुरू कर दिया गया है। ऊपर बताई गई पहलें पिछले कुछ वर्षों में माल ढुलाई और राजस्व बढ़ाने में मददगार रही हैं।
2014 से माल ढुलाई के तहत 2014-15 में 1098 मिलियन टन, 2015-16 में 1104 मिलियन टन, 2016-17 में 1109 मिलियन टन, 2017-18 में 1162 मिलियन टन, 2018-19 में 1223 मिलियन टन, 2019-20 में 1210 मिलियन टन, 2020-21 में 1233 मिलियन टन, 2021-22 में 1418 मिलियन टन, 2022-23 में 1512 मिलियन टन, 2023-24 में 1591 मिलियन टन, 2024-25 में 1617 मिलियन टन तथा 2025-26 में 1670 मिलियन टन माल ढुलाई का कार्य किया गया।भारतीय रेलवे की माल ढुलाई 2025-26 में बढ़कर 1,670 मिलियन टन हो गई है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल ढुलाई करने वाली रेलवे बन गई है।यह जानकारी रेलए सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी।