उदयपुर, 9 अगस्त। देवेंद्र धाम में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान डॉ. सुरेंद्र मुनि ने नवकार महामंत्र की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवकार महामंत्र किसी जाति अथवा संप्रदाय विशेष का नहीं, बल्कि समस्त मानव समाज के कल्याण का महामंत्र है।
इसमें व्यक्ति विशेष के नाम का उल्लेख न होकर भगवान महावीर ने ज्ञानी एवं साधक आत्माओं के अनंत गुणों को नमन करने की प्रेरणा दी है।उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र के पांच पदों में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु-संतों के गुणों को नमन किया गया है।
यह महामंत्र मनुष्य को अहंकार से दूर कर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।
नवकार का नियमित जाप मन को एकाग्र करने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि वर्तमान युग में मनुष्य विभिन्न कारणों से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक अशांति का सामना कर रहा है।
ऐसे समय में इधर-उधर भटकने के बजाय व्यक्ति को नवकार महामंत्र की साधना विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।
इससे मन को चिंता और तनाव से मुक्ति मिलने के साथ आत्मिक शांति का अनुभव किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि जैन धर्म में नवकार महामंत्र का विशेष महत्व है और यह श्वेतांबर एवं दिगंबर दोनों परंपराओं में सर्वमान्य है।
इसमें समस्त साधु, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं मुनिगणों के गुणों को नमन किया गया है।
इतिहास में अनेक उदाहरण इस बात के साक्षी हैं कि नवकार महामंत्र का एकाग्रचित्त होकर स्मरण करने से साधक आध्यात्मिक उपलब्धियों की ओर अग्रसर होता है और अंततः आत्मिक शांति एवं समाधि का अनुभव करता है।प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगल भावना संपन्न कराई। उपस्थित समाजजनों ने संतों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
चातुर्मास के तहत देवेंद्र धाम में प्रतिदिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
इस अवसर पर आज दूरदराज से आये समाजसेवियों एवं गुरूभक्तों का श्रीसंध अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन्, महामंत्री हिम्मत बड़ाला, कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़़, पूर्व महापौर रजनी डंागी,पूर्व जिला प्रमुख मधु मेहता ने अभिनंदन किया।