उदयपुर। श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में साधु-साध्वीवृंद के सान्निध्य में आध्यात्मिक प्रवचन, महापूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कार्यक्रम में मुनिराज नव्यकीर्ति महाराज, दिव्यप्रसन्न कीर्ति महाराज, मुनि सुव्रत स्वामी एवं साध्वी जिनशया सहित साधु-साध्वीवृंद का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान मुनि सुव्रत स्वामी महाविद्या असम महापूजन अनुष्ठान विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। शतावधानी दिव्यप्रसन्न कीर्ति महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ शनि ग्रह की शांति के लिए विशेष विधान करवाया। अनुष्ठान में सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
विधान के लाभार्थी अनिल-मधु भंडारी, सुशील-सरला बांठिया एवं अशोक-मंजू नागोरी रहे। महापूजन के पश्चात सहधार्मिक भक्ति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सहभागिता निभाई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए नव्यकीर्ति महाराज ने कहा कि सच्ची शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति के लिए मनुष्य को धर्म, साधना एवं सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आत्मचिंतन बेहद आवश्यक है। धार्मिक साधना व्यक्ति के भीतर शांति, संयम, सद्भाव और आत्मिक शक्ति का विकास करती है।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि धर्म का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना और उसे आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर करना है। नियमित साधना एवं आत्मचिंतन से मनुष्य नकारात्मक विचारों से ऊपर उठकर जीवन में संतुलन स्थापित कर सकता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर साधु-साध्वीवृंद का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। यह जानकारी सुशील बांठिया ने दी।