24वीं प्रसार शिक्षा परिषद् की बैठक

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Published on : 12 Aug, 26 05:08

24वीं प्रसार शिक्षा परिषद् की बैठक

किसानों के नवाचारों को लेब में रिफाइण्ड का देशभर में पहुंचाएः डॉ. प्रताप सिंह उत्पादन ही नहीं मुल्य संवर्धन, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग हो पहला लक्ष्य: डॉ. शर्मा उदयपुर ।

कृषि वैज्ञानिक, प्रसार एवं किसान यदि एक साथ मिलकर काम करे तो कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है।

सही मायने में किसान ही देश का सच्च व अच्छा वैज्ञानिक है क्योंकि खेत पर आने वाली दिक्कतों के समाधान के लिए वह दिन-रात दिमाग लगाकर कोई न काई जुगाड़ कर ही लेता है।

किसानों के इन नवाचारों को केप्चर कर लैब में लाकर रिकोर्ड करें और कृषि विज्ञान केन्द्रों केन्द्रों के माध्यम से देशभर में पहुंचाएं ताकि सभी किसानों को लाभ मिल सके।

डॉ. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलगुरू, एस.के.यु.ए.एस.टी., जम्मु एवं डॉ. बी.आर. छिपा, पूर्व कुलगुरू, स्वामी केश्वानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने मंगलवार को यहां आयोजित 24वीं प्रसार शिक्षा परिषद् की बैठक को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यह बात कहीं।

प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रज्ञा सभागार में आयेाजित इस वार्षिक बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध आठों कृषि विज्ञान केन्द्र क्रमशः भीलवाड़ा प्रथम, दितीय, डूंगरपुर, चितौड़गढ़, उदयपुर-द्वितीय, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, राजसमन्द के प्रभारी एवं अन्य प्रतिनिधियों व प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

डॉ. ए.एन. शर्मा, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने कहा इसका सबसे बड़ा प्रमाण 01 जून से 30 जून तक देशभर में चलाया गया खेत बचाओ अभियान है।

अभियान में देशभर में कार्यरत केन्द्र व राज्य की संस्थाएं, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्रों ने सामूहिक प्रयासों से लाखों किसानों तक पहुंच बनाई और किसानोपयोगी योजनाओं से अवगत कराया।

अभियान में राजस्थान का योगदान अकल्पनीय रहा। देश में 12 करोड़ किसान है।

राजस्थान ने एम माह के अभियान में लाखों किसानों एवं किसान महिलाओं से न केवल संवाद किया बल्कि कृषि एवं तकनीकी योजनाओं की जानकारी भी दी।

साथ ही सोयाबीन एवं सुआ को इंटरक्रापिंग करके उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया और इसकी फसल में चुहों से होने वाली हानि से बचने के लिये स्वदेशी तकनीकी ज्ञान से किसानों को अवगत कराया।

डॉ. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलगुरू, शेर ए कश्मीर कृषि तकनीकी विश्वविद्यालय, जम्मु ने कहा कि वर्तमान में देश में 731 केवीके कार्यरत है।

इन केवीके द्वारा आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षणों एवं प्रदर्शनों की प्रभावी अध्ययन के आंकडे भी प्रदर्शित किये जाये साथ ही किसानों हेतु समय-समय विश्वविद्यालय स्तर पर मेले का आयोजन कर कृषि तकनीकी एवं प्रदर्शनी से किसानों को लाभान्वित करें।

साथ ही बताया कि किसानों हेतु नवाचारी किसानों का सम्मेलन आयोजन किया जाये ताकि तकनीकी जानकारी का आदान प्रदान किया जा सके।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरू एमपीयूएटी डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन पर खूब काम हो गया। अब तो भण्डारण तक में परेशानी आने लगी है।

कृषि वैज्ञानिकों व किसानों का ध्यान अब दलहन-तिलहन उत्पादन, मुल्य संवर्धन, पैकेजिंग एवं ए.पी.ओ. का गठन कर अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाये। साथ ही इन एफ.पी.ओ. को क्रय समितियों एवं कम्पनियों से जोड़कर किसानों की उत्पादन को सही मूल्य दिलाने का प्रयास पर जोर दिया।

केवीके के वैज्ञानिक अपने जिलों की फसलों एवं अन्य समस्याओं का फिडबैक कृषि विभाग के अधिकारियों को भी देवें तथा केवीके पर गुणवता युक्त पौधों का उत्पादन करके अपनी आमदनी बढ़ाने का प्रयास करें।

साथ ही जायद मौसम में केवीके फार्म पर मूंग या अन्य फसल का बीज उत्पादन कार्यक्रम लेकर रिवोल्विंग फण्ड में वृद्धि करें। केवीके फार्म पर बाउण्ड्रीवॉल के स्थान पर बॉयोफेंसिंग/बांस के पौधे लगाकर फेंसिंग को प्राथमिकता देवें।

इस बैठक के दौरान प्रगतिशील किसानों को प्रताप गौरव सम्मान्न प्रदान करने हेतु आव्हान किया।

इस बैठक के दौरान डॉ. बी.आर. छिपा ने केवीके के वैज्ञानिकों से आव्हान किया कि कृषि विज्ञान केन्द्र पर आने वाले रावे के विद्यार्थियों एवं किसानों को मिट्टी के विभिन्न गुणों एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के बारे में समझाया तथा किसानों हेतु जैविक खेती मॉडल का केवीके फार्म पर प्रदर्शित कर प्राकृतिक खेती हेतु प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि कृषि में रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देना होगा जो उत्पादन में निश्चितता ला सकती है।

उन्होंने कहा कि एमपीयूएटी को समग्र कार्य में उत्कृष्टता के लिए राजस्थान के राज्य वित पोषित विश्वविद्यालयों से ’’प्रथम कुलाधिपति पुरस्कार’’ प्राप्त हुआ।

एमपीयूएटी को विश्वविद्यालय सामाजिक उतरदायित्व के निर्वहन के लिए माननीय राज्यपाल की ’’स्मार्ट विलेज पहल’’ के तहत् भी समस्त राज्य वित पोषित विश्वविद्यालयों में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया था।

आरंभ में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एल. सोनी ने प्रसार शिक्षा परिषद् की बैठक 2025 में लिए गए निर्णयों की क्रियान्वयन रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही 2026 का प्रस्तावित एजेन्डा साझा किया।

डॉ. सोनी ने कहा कि विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में कृषि विज्ञान केन्द्रों को और ज्यादा सुदृढ़ करना होगा।

इस बैठक के दौरान वर्ष 2026 का ऐजेन्डा के मुख्य बिन्दु जैसे कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने के साधन विकसित करना एवं वर्तमान साधनों का विस्तार करना, कृषि विज्ञान केन्द्रों पर ड्रोन सेन्टर्स की स्थापना करना, कृषि विज्ञान केन्द्रों को कम्यूनिटी रेडियों स्टेशन से लिंक करना, विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त राजकीय एवं गैर राजकीय कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों हेतु कृषि विज्ञान केन्द्रों पर रावे कार्यक्रम आयोजित करना एवं फीस निर्धारिण करना, कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा विभिन्न परियोजनाओं हेतु प्रस्ताव तैयार कर वित्त पोषण संगठनों (फंडिग एजेंसियाँ) को भिजवाना आदि संक्षिप्त चर्चा की गई।

प्रकाशनों का विमोचन एवं किसानों को सम्मान इस मौके पर अतिथियों ने विश्वविद्यालयों के विभिन्न प्रकाशनों कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तोड़गढ़ की प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में, क्षेत्रीय कृषि मेला स्मारिका का एवं एफ.पी.ओ. द्वारा दिसम्बर माह में आयोजित होने वाले मेले का विमोचन किया। इस बैठक में भाग लेने वाले विभिन्न जिलों के प्रगतिशील किसानों को प्रसंशा-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. एम.के. महला, डॉ. लोकेश गुप्ता, डॉ. विनोद यादव, डॉ. एल.एन. महावर, डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, डॉ. सरला लाखावत, डॉ. प्रकाश पंवार, डॉ. एन.एल. पंवार और सभी वरिष्ठ अध्यापक परिषद के सदस्यों के अतिरिक्त विभागाध्यक्ष, राजकीय विभागीय अधिकारी एवं केवीके प्रभारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. लतिका व्यास ने किया आरम्भ में अतिथियों को मेवाड़ी पगड़ी व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


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