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वैश्विक पटल पर भारत का पुनरुत्थान 'व्यवहार में भारतीयता' के विचार से होगा : केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव

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29 Feb 24
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वैश्विक पटल पर भारत का पुनरुत्थान 'व्यवहार में भारतीयता' के विचार से होगा :  केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव

दिल्ली: डॉ अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में "वैश्विक पटल पर भारत का पुनरुत्थान" विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में, श्री भूपेन्द्र यादव, माननीय केंद्रीय मंत्री (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, श्रम और रोजगार) , ने 'व्यवहार में भारतीयता' के अवतरण के माध्यम से भारत के एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने का दृष्टिकोण व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री ने भारत के वैश्विक नेता बनने की राह पर प्रकाश डाला और दुनिया भर में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में देश के आगे बढ़ने पर जोर दिया।
अखिल भारतीय राष्टीय शैक्षिक महासंघ के तत्वाधान में अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में 25 और 26 फरवरी, 2024 को "वैश्विक पटल पर भारत का पुनरुत्थान" शीर्षक से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय  सम्मेलन का आयोजन किया गया। 
सम्मानित सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री  भूपेंदर यादव  ने वैश्विक नेता के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक शोध की अनिवार्यता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिनिधियों से माननीय प्रधान मंत्री द्वारा 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान' के मंत्र में व्यक्त की गई भावनाओं को दोहराते हुए अनुसंधान प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान किया, जो अब 'जय अनुसंधान' के साथ संवर्धित हो गया है।
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में कई देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई, जो भारत के वैश्विक कद को आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
 प्रतिनिधियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और भारत के पुनरुत्थान के विभिन्न पहलुओं पर जीवंत चर्चा में भाग लिया, जिसमें आर्थिक एवं  सामाजिक विकास, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, विदेश नीति और सांस्कृतिक प्रभाव आदि जैसे विषय शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने गहन चर्चाओं को जन्म दिया और देश के भविष्य के पथ पर मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर जे. पी. सिंघल ने अपने संबोधन में दुनिया के सबसे युवा देश के रूप में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में अंतर्निहित परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा की।अतिरिक्त महामंत्री डॉ नारायण लाल गुप्ता ने अपने संबोधन में सम्मेलन का संदर्भ और पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। सम्मेलन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और निदेशक भी शामिल हुए। डीयू की प्रो. गीता भट्ट ने संचालन किया।
प्रो. राजेश जोशी ने अपने शोधपत्र के सार संक्षेपण में कहा कि युवाओं को हमारे समृद्ध ज्ञान-भण्डार से परिचित होना जरूरी है। युवा  अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धावनत होकर उनके प्रशस्त मार्ग का अनुसरण करें। प्राचीनकाल में जो कुछ ज्ञान दिया गया था‚ उसे हम उसी रूप में स्वीकार करें यह आवश्यक नहीं है। हमें उसमे यथावश्यक परिवर्तन और परिवर्द्धन करना होगा। भारतीय चिन्तन सदैव नवनवोन्मेषपरक रहा है। भौतिक विज्ञान की वर्तमान प्रगति के साथ प्राचीन अध्यात्म का संवरण आवश्यक है। इसके बिना आज का विज्ञान वरदान की अपेक्षा अभिशाप बन जायेगा। प्रदूषण की वर्तमान भयावहता और बढ़ते भूतापीकरण के नियन्त्रण के लिये हमारा प्राच्य साहित्य चिन्तामणि औषधि बन सकता है।सत्य‚ अहिंसा‚ प्रकृतिचिन्तन‚ सहयोग‚ विश्वबन्धुत्व‚ प्रेम‚ सहिष्णुता आदि मानवीय और सामाजिक मूल्यों से भारत पुनः विश्व को शान्ति और सभ्यता का पाठ पढ़ाने में समर्थ होगा।  


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