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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम संबंधों पर बयान देकर किया अल्प संख्यक वोटरों को साधने का प्रयास

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17 May 24
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गोपेन्द्र नाथ भट्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम संबंधों पर बयान देकर किया अल्प संख्यक वोटरों को साधने का प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए तीसरी बार नामांकन दाखिल करने के बाद एक टीवी चैनल को दिए विशेष इंटरव्यू में मुस्लिमों के साथ अपने संबंधों पर दिए गए बयान पर देश की राजनीति बहुत अधिक गर्म हो गई है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी मोदी ने इस बयान के माध्यम से मुस्लिमों को एक संदेश देने तथा अल्प संख्यक वोटरों को साधने का प्रयास किया है, ताकि पढ़े लिखे मुस्लमान विशेष कर युवाओं का झुकाव एनडीए की ओर हो सके।

प्रधानंमत्री मोदी बुधवार को महाराष्ट्र की नासिक की रैली में भी कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर हमला करने से नही चूके। मोदी ने कहा, मेरा मंत्र 'सबका साथ-सबका विकास' है। मैं वोट बैंक के लिए काम नहीं करता। मोदी ने कहा कि मैं जिस दिन हिंदू मुस्लिम करुंगा उस दिन सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा। मैं ऐसा नहीं करुंगा,ये मेरा संकल्प है। अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने हिंदू और मुसलमान को लेकर की जाने वाली राजनीति पर खुलकर बात की और कहा कि वे कभी भी हिंदू और मुसलमान को नहीं बांटेंगे।

मुस्लिमों के साथ अपने पारिवारिक संबंधों पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर कांग्रेस सहित अन्य विरोधी दलों ने एक ओर जोरदार प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मोदी का झूठ बताया है,वही ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोदी के बयान का स्वागत किया है। शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मुसलमानों के प्रति प्रधानमंत्री की यह सोच उनको बाकी सभी नेताओं से अलग बनाती है। यह तो जगजाहिर है कि प्रधानमंत्री देश में एकता पसंद करते हैं, क्योंकि यही वह चीज है जो देश में भाईचारे को बढ़ावा देती है। वह सभी धर्मों को बहुत ही सम्मान देते हैं। हमारा संविधान भी यही कहता है कि देश में एकता, अखंडता एवं भाईचारा कायम रहेगा, तभी देश का विकास संभव हो सकता है, क्योंकि एकता में ही शक्ति है।उन्होंने मुसलमानों से मोदी की खिलाफत नही करने की अपील भी की।

दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदू-मुस्लिम वाले बयान पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के इस दिग्गज नेता की पूरी राजनीतिक यात्रा मुस्लिम विरोधी राजनीति पर ही आधारित रही है। हैदराबाद के सांसद ने एक्स पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, 'मोदी ने अपने भाषण में मुसलमानों को घुसपैठिया और बहुत अधिक बच्चों वाले कहा था। अब वह कह रहे हैं कि वह मुसलमानों के बारे में बात नहीं कर रहे थे,उन्होंने कभी हिंदू-मुस्लिम एंगल का इस्तेमाल नहीं किया।' ओवैसी ने कहा कि मोदी को ये झूठी सफाई देने में इतना वक्त क्यों लग गया? मोदी का सियासी सफर सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम विरोधी सियासत पर बना है। इस चुनाव में भी मोदी और भाजपा ने मुसलमानों के खिलाफ अनगिनत झूठ और बेहिसाब नफरत फैलाई है। ओवैसी ने कहा कि कटघरे में सिर्फ मोदी नहीं हैं,बल्कि हर वो वोटर है जिसने इन भाषणों के बावजूद भाजपा को वोट दिया।   पिछले महीने राजस्थान के बांसवाड़ा में एक रैली में पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस देश की संपत्ति को घुसपैठियों को देने की प्लानिंग कर रही है।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी कहा कि  प्रधानंमत्री मोदी झूठ बोल रहे है और उन्होंने तथा भाजपा ने हमेशा हिंदू मुस्लिम के मध्य नफरत की राजनीति कर और समाज में प्रेम और भाईचारा की भावना को खत्म कर हिंदू तुष्टिकरण के आधार पर ही चुनाव जीतने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि मंगल सूत्र की बात करने वाले मोदी को देश की एकता और अखंडता पर शहीद  होने वाली मेरी दादी इंदिरा गांधी और  पिता राजीव गांधी की कुर्बानी नही दिखती । उन्हे क्या मालुम कि  मंगल सूत्र का महत्व क्या होता है और जो उसे खोता है उसके एवं उसके परिवार के दिल पर क्या गुजरती है। मेरी मां सोनिया गांधी से अधिक इस दर्द को और कौन समझता है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में मुसलमानों को आरक्षण या संपत्ति दिए जाने को लेकर कोई बात नहीं कही है। पीएम मोदी ने इससे पहले भी जब ऐसे दावे किए थे, तब कांग्रेस नेताओं ने मोदी के दावों को झूठा बताया था। समाजवादी पार्टी, तृणमूल  कांग्रेस,आप और अन्य राजनीतिक दलों ने भी पीएम मोदी के बयान को उनका नकली मुखौटा बताया है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक विख्यात टीवी एंकर को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि उनका बचपन मुस्लिम परिवारों के बीच ही बीता है। मेरे बहुत सारे मुस्लिम दोस्त हैं और हमारे आस-पड़ोस में कई मुस्लिम परिवार रहा करते थे। ईद के मौके पर हम घर पर खाना भी नहीं बनाते थे, क्योंकि हमारे आस-पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम पड़ोसियों के यहां से ही खाना आया करता था। यहां तक कि जब मुहर्रम निकलता था, तब हमारा ताजिये के नीचे से निकलना अनिवार्य होता था, हमें सिखाया जाता था। मैं उस दुनिया से पला बढ़ा हूं। आज भी मेरे बहुत सारे दोस्त मुस्लिम हैं, लेकिन वर्ष 2002 में गोधरा काण्ड के बाद सारी दुनिया में मेरी छवि को खराब करने की कोशिश की गई ।
मोदी ने बताया कि अहमदाबाद में मानेक चॉक नाम की जगह पर उन्होंने एक सर्वे कराया था, जहां सभी व्यापारकर्ता मुस्लिम हैं और खरीददार हिंदू हैं। वहां उन्होंने कुछ लोगों को सर्वे के लिए भेजा था। उस वक्त जब किसी ने उनके बारे में कुछ गलत कहा तो दुकानदार ने उसे रोक दिया और कहा कि मोदी जी के खिलाफ एक शब्द भी न कहें। हमारे बच्चे मोदी की वजह से ही स्कूल जा रहे हैं। उस वक्त लगभग 90 प्रतिशत दुकानदारों ने यही बात कही थी। अधिक बच्चों को जन्म देने वाले बयान के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "मैं हैरान हूं. मुझे समझ नहीं आता है कि जब मैं लोगों से यह अपील करता हूं कि वो अधिक बच्चे न करें तो लोग ऐसा क्यों समझते हैं कि मैं मुस्लिमों की ही बात कर रहा हूं। गरीब हिंदू परिवारों में भी यह समस्या है। वो अपने बच्चों को जरूरी शिक्षा देने के सक्षम नहीं हैं। मैंने कभी भी हिंदू या मुस्लिम का नाम नहीं लिया है। मैंने केवल अपील की है कि आप उतने ही बच्चे करें, जितनों का आप पालन पोषण कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने मुस्लिम वोट बैंक के बारे में बात करते हुए कहा कि "मुझे यकीन है कि मेरे देश के लोग मेरे लिए वोट करेंगे"।  मोदी ने कहा,अगर मुझे कुछ गलत लगता है तो मैं कहता हूं कि यह गलत है। असली में यह  यह मुद्दा मुसलमान का नहीं है। निजी तौर पर मुसलमान कितना मोदी के साथ होगा,यह अलग बात है लेकिन एक निश्चित विचार प्रभाव है, जो उनको आदेश करता है कि आप ये करो-वो करो। उसके आधार पर ही वह निर्णय करता है। 

पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के नासिक की रैली में बुधवार को एक बार फिर मुसलमानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं.। मोदी ने कहा, बाबा साहेब धर्म के आधार पर आरक्षण के ख़िलाफ़ थे, लेकिन कांग्रेस कह रही है कि एसटी, एससी,ओबीसी और ग़रीबों का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को दे देंगे। कांग्रेस आपकी संपत्ति को भी ज़ब्त करके अपने वोट बैंक को देने की तैयारी में हैं। मुसलमानों का नाम लिए बगैर पीएम मोदी ने कहा, "कांग्रेस की सोच है कि देश की सरकारें जितना बजट बनाती हैं, उसका 15 प्रतिशत सिर्फ़ अल्पसंख्यकों पर ख़र्च हो। यानी कांग्रेस धर्म के आधार पर बजट का भी बँटवारा करना चाहती है। आप कल्पना कर सकते हैं कि बजट के इस तरह से टुकड़े करना कितना ख़तरनाक विचार है।पीएम मोदी ने दावा करते हुए कहा,मैं सीएम था, जब कांग्रेस ने ये बात उठाई थी। मैंने सीएम रहते हुए इसका विरोध किया था। बीजेपी की कोशिश से तब ये योजना कामयाब नहीं हो पाई। मोदी धर्म के आधार पर न बजट बाँटने देगा, न धर्म के आधार पर आरक्षण देगा। आप जानते ही हैं कि कांग्रेस के लिए माइनॉरिटी सिर्फ़ उसका एक प्रिय वोट बैंक हैं। इन्होंने धर्म के आधार पर देश को बाँटा। आज भी धर्म के आधार पर भांति-भांति के बँटवारे करने में लगे हुए हैं। अपनी सरकार की तारीफ़ करते हुए पीएम मोदी बोले,हमने न कभी किसी का धर्म देखा है, न किसी का धर्म पूछा है। योजना सबके लिए बनाई जाती हैं और सबको योजनाओं का लाभ दिया जाता है।

*एनडीए करेगा 400 सीटे पार-अमित शाह*

इधर एनडीए के 400 पार नारे और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की कितनी सीटों पर जीत होंगी इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि हम उत्तर प्रदेश में सीटों में बढ़ोतरी करेंगे। अभी तीन चरणों का चुनाव बाकी है, लेकिन हमने पिछले चुनाव में यूपी में 65 सीटें जीती थीं और हम उससे आगे बढ़ेंगे । एनडीए के 400 पार नारे पर शाह ने कहा,आप देखते जाइए हम होंगे कामयाब।
शाह ने कहा कि अगर हमारा लक्ष्य आरक्षण हटाना होता, तो हमारे पास 10 साल बहुमत था, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। जहां तक ​​मुसलमानों को आरक्षण देने की बात है तो मेरी अब भी राय है कि इस देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होना चाहिए। यह संविधान की भावना भी नहीं है। भारतीय जनता पार्टी भी इससे सहमत नहीं है कि किसी को भी धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाए। शाह ने कहा कि यह चुनाव मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने का है। हमारे गठबंधन की स्ट्रेंथ बहुत अच्छी है। गृह मंत्री ने हाल ही कहा था कि बीजेपी को चार चरणों के बाद 270 सीटें मिल रही हैं और आगे के चरणों में मिलने वाली सफलता के साथ हम 400 पार जाएंगे।

उधर लोकसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत चर्चा का विषय बना हुआ ह। चुनाव के पहले तीन चरणों में मतदाताओं की सुस्‍ती के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि, विगत सोमवार को हुए चौथे चरण के मतदान में कुछ बेहतर मतदान प्रतिशत देखने को मिला है।लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 67.25 प्रतिशत मतदान हुआ, हालांकि, 2019 के  चुनावों की तुलना में यह वोटिंग प्रतिशत फिर भी कम है। बता दें कि मौजूदा आम चुनाव के पहले चरण में 66.14 प्रतिशत, दूसरे चरण में 66.71 प्रतिशत और तीसरे चरण में 65.68 प्रतिशत मतदान हुआ था।

राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक, कम वोटिंग प्रतिशत को आमतौर पर सत्‍ता पक्ष के विरूद्ध देखा जाता है। पिछले 12 में से 5 चुनावों में मतदान प्रतिशत में गिरावट देखने को मिले है। ऐसा देखा गया है कि जब-जब मतदान प्रतिशत में कमी आई है, तब-तब 4 बार सरकार बदल गयी है। हालांकि,एक बार सत्ताधारी दल की वापसी भी हुई है। 1980 के चुनाव में मतदान प्रतिशत में गिरावट हुई थी और जनता पार्टी की सरकार सत्ता से हट गयी थी,तब जनता पार्टी की जगह कांग्रेस की सरकार बन गयी थी। वर्ष 1985 में इंदिरा गांधी की शहादत के कारण रिकार्ड मतदान हुआ और कांग्रेस भारी बहुमत से सत्ता में आई। वर्ष 1989 में मत प्रतिशत में फिर से गिरावट दर्ज की गयी थी और कांग्रेस की सरकार चली गयी थी। तब विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी थी। साल 1991 में एक बार फिर मतदान में गिरावट हुई और केंद्र में कांग्रेस की वापसी हो गयी। वर्ष 1996 में अधिक मतदान का फायदा भाजपा नीत गठबंधन को मिला ।  वर्ष 1999 में भी मतदान में गिरावट हुई, लेकिन सत्ता में परिवर्तन नहीं हुआ। वहीं 2004 में एक बार फिर मतदान में गिरावट का फायदा विपक्षी दलों को मिला था। अमित शाह दावा कर रहे हैं कि भाजपा को कम वोटिंग प्रतिशत का नुकसान नहीं हो रहा है। वह तो उल्‍टा यह कह रहे हैं कि इसका नुकसान विपक्ष को उठाना पड़ेगा। शाह ने कहा,निश्चित तौर पर एनडीए 400 सीटें पार करने जा रहा है। इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। कम मतदान प्रतिशत विपक्ष के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, हमारे लिए नहीं। मैं यह बात भाजपा कार्यकर्ताओं से अपनी बातचीत के आधार पर कह रहा हूं । अमित शाह कहते हैं, सबसे ज्यादा संख्या में बीजेपी समर्थकों ने वोट डाला है। लोग विपक्ष को लेकर उत्साहित नहीं हैं, बल्कि वे हमारे बारे में उत्साहित हैं। इसलिए देखिएगा, हमारी जीत का अंतर और सीटें दोनों बढ़ेंगी। जहां तक ​​किसी लहर के न होने की बात की जा रही है, तो आपको बता दूं कि मैं 1975 से चुनाव देख रहा हूं, जब मैं बहुत छोटा था।यह पहली बार है कि हम इस पैमाने का सकारात्मक वोट, विकास का समर्थन देख रहे हैं।हर जगह युवा डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, शेयर मार्केट ग्रोथ जैसी योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।किसानों में भी कल्याण एवं सशक्तीकरण योजनाओं को लेकर उत्साह है सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की एक सेना है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ी है. इससे बीजेपी की जीत सुनिश्चित होगी।अमित शाह दावा कर रहे हैं कि भाजपा को कम वोटिंग प्रतिशत का नुकसान नहीं हो रहा है। वह तो उल्‍टा यह कह रहे हैं कि इसका नुकसान विपक्ष को उठाना पड़ेगा। शाह ने कहा,निश्चित तौर पर एनडीए 400 सीटें पार करने जा रहा है। इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। कम मतदान प्रतिशत विपक्ष के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, हमारे लिए नहीं। मैं यह बात भाजपा कार्यकर्ताओं से अपनी बातचीत के आधार पर कह रहा हूं । अमित शाह कहते हैं, सबसे ज्यादा संख्या में बीजेपी समर्थकों ने वोट डाला है। लोग विपक्ष को लेकर उत्साहित नहीं हैं, बल्कि वे हमारे बारे में उत्साहित हैं। इसलिए देखिएगा, हमारी जीत का अंतर और सीटें दोनों बढ़ेंगी। जहां तक ​​किसी लहर के न होने की बात की जा रही है, तो आपको बता दूं कि मैं 1975 से चुनाव देख रहा हूं, जब मैं बहुत छोटा था।यह पहली बार है कि हम इस पैमाने का सकारात्मक वोट, विकास का समर्थन देख रहे हैं।हर जगह युवा डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, शेयर मार्केट ग्रोथ जैसी योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।किसानों में भी कल्याण एवं सशक्तीकरण योजनाओं को लेकर उत्साह है सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की एक सेना है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ी है. इससे बीजेपी की जीत सुनिश्चित होगी।

*श्याम रंगीला का नामांकन खारिज*

उधर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ राजस्थान के कॉमेडियन श्याम रंगीला का नामांकन खारिज हो गया है। उन्होंने वाराणसी से पर्चा भरा था। जांच के बाद श्याम रंगीला का पर्चा खारिज हो गया। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़ वाराणसी सीट पर जिन चार लोगों का नामांकन फॉर्म स्वीकार हुआ है, उनमें प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस से अजय राय, अपना दल (क) से गगन प्रकाश और निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश कुमार यादव का नाम शामिल है। इनके अलावा बसपा के अतहर जमाल, निर्दलीय उम्मीदवार संजय कुमार तिवारी,आरएसजेपी के पारस नाथ केसरी का नामांकन फॉर्म भी स्वीकार किया गया है।

देखना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार एक चतुर राजनीतिज्ञ की तरह मुस्लिम संबंधों पर बयान देकर अल्प संख्यक वोटरों को साधने का जो प्रयास किया है वह कितना सफल होता है?


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