उदयपुर 14 सितम्बर. रीनासां यूनिवर्सल (आर. यु.) क्लब, उदयपुर, राजस्थान के तत्वावधान में सोमवार दिनांक 14 सितम्बर 2026 को 44 वां प्रभात संगीत दिवस समारोह का आयोजन टेकरी-मादरी रोड स्थित जागृति परिसर में किया गया. कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रभात संगीत, माइक्रोवाइटा सिद्धांत तथा नव्यमानवतावाद के प्रवर्तक श्री प्रभात रंजन सरकार की प्रतिकृति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ ।

आर. यु. क्लब, उदयपुर के अध्यक्ष डॉ. एस. के. वर्मा ने बताया की 'प्रभात संगीत' श्री पी.आर. सरकार द्वारा दिए गए 5018 गीतों का एक अद्भुत संग्रह है जो आठ विभिन्न भाषाओं जैसे बंगाली, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मैथिली, अंगिका तथा मगही में हैं. प्रथम गीत "बंधु हे निये चलो", श्री सरकार ने दिनांक 14 सितम्बर, 1982 को प्रातःकाल पुष्य नक्षत्र में बिहार हाल झारखण्ड के देवघर में दिया था ।

उन्होंने कहा की आशावाद से भरपूर प्रभात संगीत में जीवन के विविध आयाम और मनोभाव पर आधारित गीत हैं। हर ऋतू, त्यौहार, सामाजिक अनुष्ठान, साथ ही शिव और कृष्ण स्तुति से सम्बंधित गीत भी हैं।

एक आध्यात्मिक साधक के लिए यह संगीत परमपुरुष के आप्त वाक्य हैं जिसका अनुसरण कर वो जीवन के परम लक्ष्य को पाने की और अग्रसर हो सकता हैं. इसके गायन से 'धनात्मक माइक्रोवाइटा' आकर्षित होकर वातावरण को मानसाध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल बनाते हैं।

इसमें मुख्यतया 'गन्धर्व माइक्रोवाइटा' मानव मन को कई सूक्ष्म अभिव्यक्तियों का आनंद दिलाने में सहायता करते है. इसके साथ ही प्रभात संगीत द्वारा कई शारीरिक और मानसिक व्याधियाँ भी दूर हो जाती हैं ।

वास्तव में प्रभात संगीत, संगीत के क्षेत्र में एक नया घराना है, जिसमें शोध की अपार संभावनाएं हैं।

सोमवार को आयोजित इस प्रभात संगीत कार्यक्रम में साधकों द्वारा विभिन्न भावों, भाषाओं, धुनों, राग-रागिनियों आदि पर आधारित प्रभात संगीत जैसे तोमारे चाई जे एकान्ते (सं.1027), तुमि जे पथ दिखाए दिएछौ (सं.857), तुमि रुपे भुवन आलो करा (सं.3739), बाबा ए बार जाओ ना आर (सं.4682), आलोकेरी उत्सवे, तोमारे चेयेछी बारे बारे (सं.2929), तोमाके खुंजेछि ना देखे भालोभासी (सं.2116), तुमि आमार ध्यानेर ध्येय (सं.1017), रंगीन परी बोले जाइजे (सं.1784), जमीं आसमां तुम्हारा (सं.4335), ज्योत्सना दिल फूल फोटाले (सं.3069), वर्षा ऐसेछे नीप निकुंजे (सं.116), इत्यादि का गायन हुआ, साथ ही उनके भावार्थ को भी प्रस्तुत किया गया ।

इसके साथ ही सरिता देव द्वारा प्रभात संगीत 4070 'तुम हो मेरे कृष्ण जगतपति' तथा डॉ. वर्तिका द्वारा 'तुमि जदि भालोभासो, केनो नाही आसो काछे' (प्रभात संगीत सं.3039) पर नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियां भी दी गयी।

तत्पश्चात मिलित ईश्वर प्रणिधान, वर्णाध्यन के साथ स्वाध्याय पाठ हुआ. कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आये साधकों ने भाग लिया तथा कार्यक्रम का अंत मिलित भोज से हुआ ।