देवेंद्रधाम, महावीर समवशरण में आयोजित दैनिक प्रवचनमाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि भारत की पहचान सदैव धर्म, सत्य, अहिंसा, क्षमा और करुणा से रही है।

राम, कृष्ण, महावीर, नानक, बुद्ध और गांधी जैसे महापुरुषों ने मानवता को सत्य के मार्ग पर चलने तथा जीवमात्र की रक्षा का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में केवल सफलता हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने जीवन को सार्थक बनाने का भी प्रयास करना चाहिए।

भोजन करते समय यह विचार करना चाहिए कि कहीं कोई भूखा तो नहीं रह गया। प्रार्थना भी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण के लिए होनी चाहिए।

भौतिक सुख-सुविधाएं यहीं रह जाएंगी, लेकिन अच्छे कर्म, विचार और धर्म ही जीवन के साथ चलते हैं।प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि शरीर को संवारने के साथ आत्मा को संवारना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा ही हमारी सच्ची साथी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य विनय की बजाय अहंकार को जीवन में स्थान दे रहा है और यही उसके पतन का प्रमुख कारण बन रहा है।

स्वामी विवेकानंद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार ही नरक का मूल कारण है।

इसलिए मनुष्य को अहंकार छोड़कर विनम्रता, क्षमा और सद्भाव को अपनाना चाहिए।धर्मसभा में भक्तामर साधना के अंतर्गत आचार्य मानतुंग द्वारा आदिनाथ भगवान को सूर्य एवं चंद्र की उपमा दिए जाने के आध्यात्मिक भावों पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर इंदौर, दिल्ली और सूरत से पहुंचे अतिथियों एवं समाजसेवियों का स्वागत कर समाज की ओर से आभार व्यक्त किया गया।5 अक्टूबर को मनाया जाएगा युवाचार्य जन्मोत्सवश्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि 5 अक्टूबर को देवेंद्रधाम में महेंद्र युवाचार्य जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।