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वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण - राज्यपाल श्री बागड़े

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17 Mar 26
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण - राज्यपाल श्री बागड़े

राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने कहा कि आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। यदि विश्वविद्यालय स्वदेशी सोच और नवाचार को बढ़ावा दें, तो भारत वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

राज्यपाल श्री बागड़े मंगलवार को उदयपुर प्रवास के दौरान जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के डबोक परिसर में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयु) वेस्ट जोन वाइस चांसलर मीट 2025-26 के शुभारंभ समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों के विश्वविद्यालयों के कुलपति भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में सार्वजनिक निर्माण, महिला एवं बाल विकास तथा महिला अधिकारिता विभाग राज्यमंत्री डॉ मंजू बाघमार, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ गौरव वल्लभ, एआईयु के अध्यक्ष डॉ विनय पाठक, महासचिव श्रीमती पंकज मित्तल भी बतौर अतिथि उपस्थित रहे। राजस्थान विद्यापीठ के कुल प्रमुख बी एल गुर्जर तथा कुलगुरू डॉ एसएस सारंगदेवोत सहित अन्य ने अतिथियों का स्वागत किया।

राज्यपाल श्री बागड़े ने कहा कि तकनीकी राष्ट्रवाद और आर्थिक देशभक्ति जैसे विचार केवल नारे नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारे जाने वाले संकल्प हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार सृजन की दिशा में सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय मूल्यों और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार कर सकता है।

मैं तो सिर्फ जामवन्त की भूमिका निभा रहा
समारोह में श्री बागड़े ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि हनुमानजी सर्वसमर्थ थे, लेकिन उन्हें अपनी शक्तियों का अहसास जामवन्तजी ने कराया था। आज शिक्षा के क्षेत्र में देश के नामी लोग एकत्र हुए हैं, उनके बीच मैं शिक्षा की कोई बात नहीं करूंगा, मैं तो सिर्फ जामवन्त जी की भूमिका निभा रहा हूं।

विद्यार्थी हो शिक्षण संस्थाओं का केंद्र बिन्दु
श्री बागड़े ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं के लिए केंद्र बिन्दु सिर्फ विद्यार्थी होना चाहिए। विद्यार्थी को धूरी पर रखते हुए ही योजनाएं और कार्यक्रम तय होने चाहिए, तभी विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमताओं का विकास होगा। उन्होंने कहा कि यह दो पंक्तियां हर विश्वविद्यालय में अंकित होनी चाहिए कि भारत का सर्वांगीण गौरव हमारा विश्वविद्यालय लाएगा, तक्षशिला-नालंदा का इतिहास फिर से लौट कर आएगा।

भारत की ज्ञान परंपरा गौरवशाली
श्री बागड़े ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा गौरवशाली रही है। बौद्धिक क्षमता का कोई पारावार नहीं था। अंग्रेजों ने संस्कृति पर वार करने के लिए शिक्षा पद्धति बदली। मैकाले शिक्षा पद्धति ने भारत की ज्ञान परंपरा को संकुचित करने का प्रयास किया। अब नई शिक्षा नीति पुराने वैभव को लौटाने का प्रयास है। नई शिक्षा नीति बालक को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखते हुए उसके सर्वांगीण विकास पर जोर देती है। इससे पूर्व श्री बागड़े ने सभी आंगतुकों का राजस्थान की धरा पर स्वागत किया।


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