“इस समय मेरे पेट में तितलियाँ नहीं उड़ रहीं… मेरे अंदर तो ड्रैगन्स हैं!” अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर ने अपने बहुप्रतीक्षित हिंदी नाटक 'एनिमल' के प्रीमियर से ठीक पहले मंच पर जाने से कुछ क्षण पहले यूँ अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हर थिएटर कलाकार के अंदर वो घबराहट होनी चाहिए। ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास हमेशा चीज़ों को बिगाड़ देता है। यह एक ऐसा शो है जिसे मैं लंबे समय से करना चाहता था… और बस यही उम्मीद है कि मैं इसमें सफल हो जाऊँ, क्योंकि यह आसान नाटक नहीं है।”
इसके बाद जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि वो ‘ड्रैगन्स’ वाकई इस शाम को यादगार बनाने वाले थे।
शनिवार रात टाटा थिएटर में नाटक 'एनिमल'का प्रीमियर एक रोमांचक और गहराई से प्रभावित करने वाला थिएटर अनुभव बन गया। लगभग दो घंटे तक महेश मांजरेकर ने अपने दमदार अभिनय से पूरे मंच को संभाले रखा और दर्शकों को भावनाओं की ऐसी यात्रा पर ले गए जिसमें हँसी, सन्नाटा, सोच और ज़ोरदार तालियों की गूँज सब कुछ शामिल था।
एजीपी वर्ल्ड (AGP World) द्वारा प्रस्तुत और दिग्गज थिएटर निर्माता अश्विन गिडवानी द्वारा निर्मित 'एनिमल' एक सशक्त और बेबाक नाटक है, जिसे लिखा, निर्देशित और प्रस्तुत स्वयं महेश मांजरेकर ने किया है।
'एनिमल' महत्वाकांक्षा की दौड़ में इंसानी आत्मा के धीरे-धीरे और अक्सर अनदेखे ढंग से क्षरण की कहानी को सामने लाता है। नाटक के केंद्र में दत्तू का किरदार है, जिसे महेश मांजरेकर निभा रहे हैं। दत्तू महाराष्ट्र के पंढरपुर के पास एक छोटे से कस्बे से मुंबई आता है, सपनों के शहर में अपनी पहचान बनाने के लिए। शुरुआत में शहर पर भरोसा और खुद पर विश्वास रखने वाला यह युवक धीरे-धीरे ऐसे संघर्ष में उलझ जाता है जो सिर्फ जीवित रहने की जद्दोजहद बनकर रह जाता है।
नाटक के बारे में बात करते हुए महेश मांजरेकर ने इसे “शहर की ज़िंदगी पर एक कार्टूनिस्ट की नज़र” बताया। उन्होंने कहा, “हज़ारों लोग मुंबई इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सपनों का शहर है। लेकिन यहाँ सफल होने वाले हर एक व्यक्ति के पीछे अनगिनत ऐसे लोग होते हैं जिनके सपने टूटकर डरावने अनुभवों में बदल जाते हैं। यह नाटक उन सभी लोगों को समर्पित है जो मुंबई अपने करियर या रोज़ी-रोटी की तलाश में आते हैं। यह बहुत बड़े दिल वाला शहर है… लेकिन हर शहर की भी अपनी सीमाएँ होती हैं।”
'एनिमल' सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि तीखी टिप्पणी और व्यंग्य से भरा हुआ नाटक भी है। दत्तू की यात्रा के माध्यम से महेश मांजरेकर देश की राजनीतिक, आर्थिक, भू-राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों पर भी अपनी सूक्ष्म टिप्पणियाँ बुनते हैं। कहानी में पॉप कल्चर के कई संदर्भ, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अंदरूनी मज़ाक और मुंबई की ज़िंदगी पर चुटीले इशारे शामिल हैं, जिन पर दर्शकों ने उत्साह से प्रतिक्रिया दी।
नाटक में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब महेश मांजरेकर ने प्रस्तुति के दौरान कई गीतों पर गाया और नृत्य भी किया, जिसने दर्शकों को सुखद आश्चर्य में डाल दिया।
इस प्रीमियर में कई जानी-मानी हस्तियाँ भी मौजूद थीं, जिनमें अभिनेता जैकलीन फर्नांडिज़, सई मांजरेकर, सिद्धार्थ जाधव, अनुषा डांडेकर और सुमेध मुदगालकर शामिल थे। सई के अलावा महेश मांजरेकर की बेटी गौरी इंगवाले और बेटे सत्या मांजरेकर भी उन्हें उत्साहित करने के लिए मौजूद थे। दिग्गज क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकार अपनी पत्नी मनाली के साथ पहुँचे, वहीं प्रसिद्ध होम्योपैथ मुकेश बत्रा भी इस मौके पर उपस्थित थे।
करीब नौ साल की चर्चा और तैयारी के बाद 'एनिमल' आखिरकार मंच पर आया है — कच्चा, आत्मीय और पूरी तरह बेबाक। सई मांजरेकर के लिए अपने पिता को इस नाटक में मंच पर देखना बेहद भावुक पल था। उन्होंने कहा, “यह अद्भुत था। मैं इस प्रोजेक्ट के बारे में अपनी पूरी ज़िंदगी से सुनती आ रही हूँ। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस उम्र में उन्हें इतनी ऊर्जा के साथ एक वन-मैन शो करते देखना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। यह बहुत प्रेरणादायक है।”
नाटक के दौरान दर्शक तीखे हास्य पर खुलकर हँसे, गंभीर मोनोलॉग के समय सन्नाटा छा गया और कई मौकों पर तालियों की गूँज सुनाई दी। शाम के अंत में पूरा थिएटर खड़े होकर तालियाँ बजाने लगा। महेश मांजरेकर ने मंच पर आकर अपनी पूरी टीम का धन्यवाद किया।
'एनिमल' की यात्रा आगे भी जारी रहेगी। यह नाटक 29 मार्च को सोफिया भाभा ऑडिटोरियम में फिर से मंचित किया जाएगा, जहाँ एक बार फिर दर्शकों को थिएटर की एक शक्तिशाली शाम का अनुभव मिलने वाला है।