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डॉ. देव ने डॉक्टर का पद छोड़ दिया, लेकिन सोनी सबके यादें में अस्पताल में इंटर्न्स के सहायक बने रहेंगे

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14 Apr 26
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डॉ. देव ने डॉक्टर का पद छोड़ दिया, लेकिन सोनी सबके यादें में अस्पताल में इंटर्न्स के सहायक बने रहेंगे

मुंबई : सोनी सब का नया शो यादें डॉक्टर देव मेहता (इक़बाल खान) की भावनात्मक यात्रा के ज़रिए दर्शकों के दिलों को छू रहा है। यह एक ऐसी कहानी है, जिसमें पछतावा, हिम्मत और खुद को फिर से खोजने की कोशिश का मेल शामिल है। शो डॉक्टर देव की ज़िंदगी की यात्रा पर केन्द्रित है, जो कभी एक मशहूर डॉक्टर थे, लेकिन अब आठ साल की याददाश्त खोने के बाद अपनी पहचान और मकसद को फिर से पाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। अपनी टूटी हुई रिश्तों की सच्चाई, बेटे की मौत और उस इंसान का सामना करते हुए, जिसे वे खुद भी पहचान नहीं पाते, डॉक्टर देव अपनी ज़िंदगी को जोड़ने की कोशिश करते हैं।

आने वाले एपिसोड्स में डॉक्टर देव सबसे कठिन दौर से गुजरते हैं, जब अस्पताल बोर्ड उन्हें प्रैक्टिस करने का हक छोड़ने के लिए कहता है। याददाश्त खोने और पुराने ज्ञान के कारण उन्हें डॉक्टर बने रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। डॉक्टर देव अपनी क्षमता साबित करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन फैसला उन्हें तोड़ देता है और उन्हें इस दर्दनाक सच्चाई का सामना करना पड़ता है कि वह अब उस पेशे का हिस्सा नहीं रह सकते, जो उनकी पहचान था। लेकिन, जब वे हमेशा के लिए अस्पताल छोड़ने की तैयारी करते हैं, तभी उनकी पूर्व पत्नी और अस्पताल की एडमिनिस्ट्रेटर सृष्टि अग्रवाल (गुलकी जोशी) एक अप्रत्याशित फैसला लेती हैं। इस दौरान, डॉक्टर देव को अस्पताल में रहने की इजाज़त मिलती है, लेकिन सिर्फ इंटर्न्स के सहायक के रूप में तथा बिना किसी अधिकार के कि वह मरीजों का इलाज या डायग्नोसिस कर सकें।

अपने किरदार के इस नए ट्रैक के बारे में बात करते हुए, इक़बाल खान कहते हैं, “यह दौर डॉक्टर देव के लिए बहुत बड़ा मोड़ है, क्योंकि पहली बार उन्हें अपनी पहचान को अपने पेशे से अलग करना पड़ रहा है। डॉक्टर का टाइटल खोना उन्हें तोड़ देता है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल में बने रहना दिखाता है कि दवा और इलाज उनके अस्तित्व का हिस्सा है। इस ट्रैक की खूबसूरती यह है कि डॉक्टर देव खुद को ताकत या अधिकार से नहीं, बल्कि विनम्रता, धैर्य और दिल से फिर से बनाते हैं। मुझे लगता है दर्शक इस रूप से बहुत जुड़ेंगे, क्योंकि यह दिखाता है कि कभी-कभी ज़िंदगी दूसरा मौका देती है, लेकिन उस रूप में, जिसकी उम्मीद नहीं होती।”

देखना न भूलें यादें, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।


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