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आधुनिक भारत के निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर - डॉ.श्रीनिवास महावर

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13 Apr 26
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आधुनिक भारत के निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर - डॉ.श्रीनिवास महावर

उदयपुर | | जनमत मंच के तत्वाधान में आधुनिक भारत के निर्माता, भारत रत्न डॉ.भीमराव अबेडकर की 135 वी जयंती के अवसर पर कोर्ट चौराहा स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास महावर ने डॉ. अंबेडकर के कृतित्व एवं व्यक्तिव पर प्रकाश डालते हुए कहा की देश की आन बान और शान, प्रातः स्मरणीय भारतीय संविधान के निर्माता,महान समाज सुधारक,अर्थशास्त्री और भारत के पहले कानून मंत्री रहे |

 बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई.को मध्य प्रदेश के महू में महार जाति में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं और अंतिम संतान थे। उन्होंने दलितों, शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और समानता, स्वतंत्रता व बंधुत्व के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 

 बाबा साहब को बचपन में जातीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। परंतु भेदभाव के बावजूद, उन्होंने शिक्षा जारी रखी तथा मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक, कोलंबिया विश्वविद्यालय से Ph.D.एवं लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टर ऑफ साइंस (DSc) की उपाधि और लंदन के प्रसिद्ध कानून संस्थान ग्रेज इन से बार-एट-लॉ की उपाधि प्राप्त की।  

 डॉ. महावर ने आगे बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा 5 फरवरी 1951 ई. को संसद में हिंदू कोड बिल पेश किया गया। जो हिंदू महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ।

यह बिल भारतीय समाज में महिलाओं को पितृसत्तात्मक जंजीरों से मुक्त करने और उन्हें पुरुषों के समान दर्जा दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम रहा |

मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहा डॉ. आंबेडकर के विचार साँझा करते हुए कहा की "शिक्षा वो माध्यम है जो प्रत्येक व्यक्ति तक पहुचनी चाहिए एवं शिक्षा सस्ती से सस्ती हो जिससे निर्धन व्यक्ति भी शिक्षा प्राप्त कर सके" एवं राष्ट्र के विकास में सहायक बने | 

 


 

डॉ. प्रियदर्शी ओझा, विशाल माथुर एवं विनोद कुमार चौधरी ने भी विचार व्यक्त किये और कहा की उन्होंने दलितों और शोषित वर्गों को "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो" का नारा देकर स्वाभिमानी जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। डॉ आंबेडकर का मानना था कि समानता के बिना स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के बिना समानता अधूरी है।उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए 'बहिष्कृत हितकारिणी सभा' की स्थापना की और महाड़ सत्याग्रह जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया। वे संविधान के शिल्पिकार एवं आधुनिक भारत के निर्माता थे।


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