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बच्चें मोबाइल की लत से दूर हो, बाल साहित्य से जुड़े, परिवार में वातावरण बने

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31 Aug 25
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बच्चें मोबाइल की लत से दूर हो, बाल साहित्य से जुड़े, परिवार में वातावरण बने


गंगोत्री से प्रवाहित हो कर बहने वाली गंगा जहां से भी गुजरती है उस क्षेत्र को सरसंब्ज बना देती है। कई संस्कृतियां गंगा के किनारे पल्लवित और पोषित हैं। ठीक वैसे ही बाल साहित्य की सलिला का प्रवाह पिछले 36 वर्षों से बाल साहित्य की गंगोत्री बना हुआ है और इसकी बहती धारा से न केवल राजस्थान में वरन देश भर में बाल साहित्य का शंख नाद हो रहा है। इंटरनेट के युग में सोशल मीडिया पर बाल कार्यशाला में विभिन्न बाल साहित्य विषयक प्रतियोगिताएं और उनकी समीक्षा ने देश में कई अच्छे बाल साहित्यकारों को जन्म दिया है। प्रोत्साहन के लिए संस्था की पत्रिका सलिल प्रवाह का हर अंक किसी विशिष्ठ बाल साहित्यकार पर केंद्रित होता है।
  हाड़ी रानी की ऐतिहासिक भूमि  सलूंबर से निकली सलिला की बहती धारा 24 अगस्त 2025 दिन रविवार को उदयपुर में प्रवाहित हुई जब सलिला ने अपना 16 वां राष्ट्रीय बाल सम्मेलन का आगाज़ किया। इस सम्मेलन से एक ही नारा गूंजा बच्चें मोबाइल की गुलामी से बाहर निकले, बाल साहित्य से जुड़े, परिवार में माहौल बने। 
    उत्कृष्ट प्रबंध, बेहतरीन व्यवस्था, संपूर्ण संवेदनाओं , पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ झीलों की नगरी, राजस्थान का कश्मीर और पूर्व का वेनिस की संज्ञाओं से विभूषित उदयपुर में सलिला संस्था सलूंबर एवं राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में सलिला संस्था का 16 वां  राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन प्रसार शिक्षा निदेशालय  सभागार में रविवार 24 अगस्त को आयोजित किया गया। सम्मेलन के प्रथम सत्र में, आने वालों का स्वागत, उदघाटन, पुस्तक विमोचन, बाल साहित्यकारों का सम्मान और दूसरे सत्र में तकनीकी चर्चा, पुस्तक समीक्षाएं , बाल काव्य संगोष्ठी  एवं बाल गीत प्रतियोगिता के टॉप-10 विजेताओं को सम्मानित करना सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएं रही। 
        उद्घाटन, लोकार्पण एवं सम्मान सत्र की अध्यक्षता   महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने की।  मुख्य अतिथि के रूप में  नंदन की संपादक एक्जीक्यूटिव एडिटर, हिंदुस्तान समूह जयंती रंगनाथन एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. सतीश कुमार, श्याम पलट पांडेय, कुमुद वर्मा तथा संस्था अध्यक्षा एवं संयोजक डॉ. विमला भंडारी मंचासीन रहे। अतिथियों ने मां शारदा की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। शकुंतला स्वरूपरिया  ने सरस्वती वंदना के स्वर, मधु माहेश्वरी ने स्वागत गीत के स्वर और पाखी जैन ने बालगीत के स्वरों से माहौल को कुछ देर के लिए सरस बना दिया।
     समारोह आयोजक और विगत 36 वर्षों से  देश भर में बाल साहित्य कार्यों का लोहा मनवा चुकी सलिला संस्था की अध्यक्ष डॉ. विमला भंडारी ने  सभी का स्वागत करते हुए  सलिला संस्था और बाल साहित्यकार सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा यही प्रयास रहा है कि बाल साहित्य से बच्चों को जोड़ा जाएं। इसके लिए कई प्रकार की बाल साहित्य गतिविधियाँ निरंतर आयोजित की जाती हैं। डॉ. भंडारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित सात राज्यों तथा राजस्थान के 10 जिलों से साहित्यकारों एवं प्रतिभागी  आयोजन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया  हर बार की तरह इस बार भी सलिल प्रवाह का अंक साहित्यकार श्याम पलट पांडेय की साहित्यिक अभिव्यक्ति पर केंद्रित है।
     मुख्य अतिथि जयंती रंगनाथन ने  "बालगीत और बालमन का अंतर्सम्बन्ध" विषय बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए  कहा कि आज प्यार से बालकों को बाल गीतों के प्रति अकर्षित करके मोबाइल की लत से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों की मोबाइल के प्रति बढ़ती बच्चों की वृति पर गंभीर चिंता जताते हुए बच्चों की बाल साहित्य से निरंतर हो रही दूरी को शिद्दत से रेखांकित किया। उन्होंने हुए कहा कि हम सब के प्रयास यही हों कि बच्चें किताबों से जुड़े।
      अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो.अजीत कुमार कर्नाटक ने कहा कि आपके अंदर का बच्चा ही आपको जीवन्त रखता हैं, बाल साहित्य व बाल गीत इसका श्रेष्ठ योजक हैं । आपने
सारिका व धर्मयुग मैं नियमित लेखन व बाल साहित्य के वाचन से हुए मानसिक विकास का विस्तृत वर्णन करते हुए सभी से राष्ट्र भाषा एवं संस्कृत के संवर्धन का आह्वान करते हुए कहा कि हम सब के प्रयास इस दिशा में होने चाहिए। उन्होंने पुराने और आज तक प्रचलित बाल गीतों के मुखड़े भी सुनाएं जिसमें संभागियों ने पूर्ण उत्साह से सुर ताल मिलाए। उनकी इस अनोखी विधा की प्रशंसा सभी की जुबान पर थी।
अलंकरण एवं सम्मान :
बाल साहित्य को तन,मन,घन से समर्पित डॉ. भंडारी की सोच है कि अच्छे साहित्य सृजन के लिए  सृजनकारों को सम्मानित कर प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण कदम है। अपने इसी चिंतन को उन्होंने साकार किया और सम्मान की परम्परा शुरू की। इसी प्रेरक चिंतन का परिणाम रहा कि समारोह में विभिन्न स्थानों पर बाल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले साहित्यकारों की चयनित बाल कृतियों पर सात बाल साहित्यकारों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। डॉ. संजीव कुमार को सलिला शिखर सम्मान, डॉ. सूरजसिंह नेगी को सलिला विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, डॉ. मीना सिरोला , जीशान हैदर जैदी, लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, मीनू त्रिपाठी एवं डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को सलिला साहित्य रत्न सम्मान अलंकरण से सम्मानित किया गया । सभी को अभिनंदन पत्र, शॉल, उपरना, नकद राशि एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। सम्मान करने वाले और प्राप्त करने वालों के चेहरों पर खुशी की मुस्कान तैर रही थी। उपस्थित साहित्यकार बंधु भी करतल ध्वनि से अपनी खुशी का बराबर इजहार करते रहे।
पुस्तकों का लोकार्पण :
पुस्तकों के लोकार्पण से वे समाज के सामने आती हैं,लोग उनके बारे में जानते - समझते हैं। इसी भावना से 12 कृतियों के लोकार्पण की झड़ी लग गईं। सलिल संस्था की पत्रिका सलिल प्रवाह सहित  डॉ. विमला भंडारी की  छह अंको का जादू, कहानी वाला शंख, गीत सुहाने बचपन के, श्याम पलट पाण्डेय की नाचें खेलें मौज करें हम, खेल रहा अभिनव बूंदो संग, डॉ. राजगोपाल राज की बच्चों की किलकारी सुन ली, प्रकाश तातेड़ की बूझ सहेली मेरी पहेली, मधु माहेश्वरी भावों की सरिता, दी अंडर लाइन बाल कहानी विशेषांक, बल्ब वर्ल्ड चिल्ड्रन मैगजीन का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया।
    समारोह में  राजस्थान साहित्यिक अकादमी की ओर से डॉ. प्रकाश नेभनानी और सेवानिवृत्ति रामदयाल मेहर , उदयपुर की साहित्यिक संस्था युगधारा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. ज्योतिपुंज एवं जगदीश भंडारी सहित बलबीर सिंह, अनीता गंगाधर शर्मा, आचार्य नरेंद्र शास्त्री, चक्रधर शुक्ल, डॉ सरिता गुप्ता, शिव मोहन यादव, नंदकिशोर निर्झर, बनवारी लाल पारीक, डॉ गोपाल राज गोपाल, श्याम मठपाल, सपना जैन शाह, पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय, सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं विद्वान उपस्थित रहे।
तकनीकी सत्र
 भोजन जीवन का सबसे आवश्यक हिस्सा है। दोपहर के भोजन के पश्चात दूसरे सत्र की शुरुआत तकनीकी सत्र से हुई। इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार, आईएएस अधिकारी एवं पाती लेखन मुहिम के प्रणेता डॉ. सूरज सिंह नेगी ने अपने अपने उद्बोधन में कहा कि "आज सोशल मीडिया के प्रभाव से बच्चे मोबाइल के गुलाम बनते जा रहे है। उन्हें आदर्श उदाहरणों की आवश्यकता है। हमें चाहिए कि मोबाइल के स्थान पर बच्चों को लिखने, बोलने और पढ़ने की ओर प्रेरित करें। बच्चों से मित्रता करें और उन्हें संस्कार का पाठ सिखाएँ। इसमें बाल साहित्य की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है।" 
      सत्र के मुख्य अतिथि इंडिया नेटबुक्स के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने परिवार के बजट में पुस्तक क्रय के लिए विशेष फंड रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा परिवार में पुस्तकों के बारे में चर्चा का माहौल बनेगा तो बच्चें भी बाल साहित्य पढ़ने को प्रेरित होंगे। 
    सत्र में सलिला द्वारा आयोजित बाल गीत प्रतियोगिता के टॉप-10 विजेताओं में से समारोह में उपस्थित यशवंत कुमार शर्मा (पहुंना), डॉ. फहीम अहमद (संभल), नीलम मुकेश वर्मा (झुंझुनूं), अनीता गंगाधर शर्मा (अजमेर), बलवीर सिंह (सिरसा), नीरज शास्त्री (मथुरा) आदि को शॉल, माला, प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। अंत में शिव नारायण आगाल ने आभार व्यक्त किया।
कृतियों की समीक्षा :
जैसे लोकार्पण से किसी कृति की पहचान बनती है वैसे ही कृति की समीक्षा उसे दूर तक ले जाती हैं। समीक्षा करना एक कठिन कार्य है और बाल साहित्य की समीक्षा तो और भी कठिन है। समीक्षा का महत्व समझने के उद्देश्य से यह विशेष सत्र रखा गया। पुस्तक समीक्षा सत्र की अध्यक्षता डॉ. फहीम अहमद ने की। उन्होंने परिवार की भूमिका को रेखांकित अपनी दो बाल कविताएं प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि चक्रधर शुक्ल (कानपुर) ने "गीत सुहाने बचपन के" पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथि शिवमोहन यादव ने हेली विधा का जादू विषय पर पत्रवाचन किया। प्रकाश तातेड़ की पुस्तक बूझ सहेली, मेरी पहेली की विशेषताओं पर चचर्चा की। डॉ. सरिता गुप्ता ने मधु माहेश्वरी की पुस्तक "भावों की सरिता" की विशेषताओं को उजागर किया। वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश पंचाल ने विमला भंडारी की पुस्तक "6 अंकों का जादू" की समीक्षा करते हुए इसे पिनकोड सीखने के लिए उपयोगी बताया। संचालन शकुंतला सरूपरिया ने किया। धर्मेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
    बाल काव्य गोष्ठी रचनाकारों द्वारा रचित साहित्य एक दूसरे तक पहुंचता है। आपस में एक दूसरे के सृजन को समझने और कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। इसी भावना से रखी गई बाल काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर्नल प्रवीण त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथिः लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि नंदकिशोर निर्झर एवं किरण बाला किरण रहे।  प्रांशु नामधर द्वारा रामधारी सिंह दिनकर की "रश्मिरथी" एवं महिषासुर मर्दिनी स्त्रोत की प्रस्तुति से बाल काव्य संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में श्याम मठपाल, प्रकाश तातेड़, मनीला पोरवाल, पूनम भू, हेमलता दाधीच, सुनीता बिश्नोई, सपना जैन शाह, बलबीर सिंह, गंगाधर शर्मा, यशपाल शर्मा, चक्रधर शुक्ल, सरिता गुप्ता, पाखी जैन, स्नेहलता भंडारी, मंगल कुमार जैन, वीणा गौड़ आदि ने विविध, रोचक एवं मनोरंजक बाल कविताएं सुनाई।
     समापन सत्र में संस्था की अध्यक्ष डॉ. विमला भंडारी ने कहा कि सात राज्यों और राजस्थान के 10 जिलों से आए प्रबुद्ध साहित्यकारों की उपस्थिति में बाल साहित्य सम्मेलन से गूंजने वाले बाल साहित्य की दिशा के स्वर आने वाले दिनों में बाल साहित्य की नई इबारत लिखेंगे। इसी संकल्प के साथ साहित्य प्रेमियों ने आपस ने एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए विदाई ली।


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