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वसुंधरा राजे की प्रधानमंत्री से बढ़ती नज़दीकियाँ : राजस्थान की राजनीति में क्या संकेत?

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14 Mar 26
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वसुंधरा राजे की प्रधानमंत्री से बढ़ती नज़दीकियाँ : राजस्थान की राजनीति में क्या संकेत?

हाल के दिनों में राजस्थान की राजनीति में एक नया संकेत देखने को मिल रहा है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ती राजनीतिक निकटता ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओ को जन्म दिया है। लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि पार्टी के भीतर विभिन्न शक्ति केंद्रों के कारण दोनों नेताओं के बीच दूरी है, लेकिन हाल की घटनाओं और सार्वजनिक मंचों पर दिखी सहजता ने इस धारणा को कमजोर किया है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि यह बढ़ती नज़दीकियाँ भविष्य में राजस्थान की राजनीति में क्या नया मोड़ ला सकती हैं।पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे अवसर आए जब वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सार्वजनिक मंचों पर सकारात्मक संवाद और राजनीतिक सामंजस्य के संकेत दिखाई दिए। पार्टी के कार्यक्रमों में राजे की सक्रियता और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बढ़ती सहभागिता को राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण मान रहे हैं।


राजस्थान में लंबे समय तक भाजपा की राजनीति में वसुंधरा राजे एक प्रभावशाली नेता रही हैं। दो बार मुख्यमंत्री रहने के कारण उनका संगठन और कार्यकर्ताओं पर मजबूत प्रभाव माना जाता है। ऐसे में यदि केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके संबंध और मजबूत होते हैं तो इसका सीधा असर प्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के भीतर कई नेताओं का प्रभाव रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में नए नेतृत्व को अवसर मिला और मुख्यमंत्री के रूप में भजन लाल शर्मा सामने आए। ऐसे में वसुंधरा राजे की सक्रियता और प्रधानमंत्री से बढ़ती नज़दीकियों को कई राजनीतिक पर्यवेक्षक पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन के दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व बार-बार यह स्पष्ट करता रहा है कि भाजपा में सामूहिक नेतृत्व की परंपरा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषण में यह चर्चा बनी रहती है कि भविष्य में संगठनात्मक या राजनीतिक स्तर पर क्या नए समीकरण बन सकते हैं।

एक अन्य दृष्टिकोण यह भी है कि वसुंधरा राजे की सक्रियता केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रह सकती। लंबे प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय स्तर की पहचान के कारण उन्हें भविष्य में पार्टी संगठन या केंद्र की राजनीति में भी बड़ी भूमिका मिल सकती है।
यदि केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी नज़दीकियाँ बढ़ती हैं तो यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि उन्हें संगठनात्मक स्तर पर या राष्ट्रीय राजनीति में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालाँकि राजनीति में कई बार सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने वाले संकेत भी एक व्यापक रणनीति का हिस्सा होते हैं। भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दल में विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना संगठन की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
इस दृष्टि से देखा जाए तो वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच सकारात्मक संवाद का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे संगठन के भीतर एकता और सामंजस्य का संकेत जाता है।
राजस्थान की राजनीति में संभावित प्रभाव
राजस्थान में वसुंधरा राजे की लोकप्रियता और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उनकी सक्रिय भूमिका आने वाले समय में कई राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रभावित कर सकती है। यदि केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी निकटता बनी रहती है तो इससे राज्य में पार्टी संगठन को भी मजबूती मिल सकती है। साथ ही यह संदेश भी जा सकता है कि पार्टी अपने अनुभवी नेताओं के अनुभव का लाभ उठाना चाहती है।

वसुन्धरा राजे एक ऐसे राजपरिवार की सदस्य है जिनकी माता विजया राजे सिंधिया ने निस्वार्थ रूप से जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की तन मन धन से सेवा की अथवा यू कहे कि पार्टी को पौधे से वटवृक्ष बनाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी राजमाता के इस सहयोग को भुला नहीं है। यही कारण है कि सिंधिया परिवार के लिए आर एस एस और भाजपा में कही न कही सॉफ्ट कॉर्नर है। वसुंधरा राजे ने पिछले दी वर्षों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश के नेतृत्व के साथ जिस प्रकार का मर्यादित आचरण और व्यवहार किया है उससे उनका सामान और कद कही अधिक बढ़ गया है। पार्टी जानती है कि वसुन्धरा राजे की लोकप्रियता और कर बहुत ऊंचा है और वह किसी पद पर रहे अथवा नहीं उनकी लोकप्रियता और कद में कोई कमी नहीं होने वाली। उनकी प्रशासनिक और संगठन क्षमता से भी हर कोई वाकिफ है। वसुन्धरा राजे ने हमेशा एक बात कही कि भाजपा मेरी माँ है इसलिए मैं पार्टी छोड़ने अथवा उसे तोड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकती। उन्होंने हमेशा स्पष्ट रूप से कहा कि मैं राजस्थान नहीं छोड़ेगी। उनकी इन बातों और व्यवहार ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को कही न कही प्रभावित किया है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके प्रति उदार दिखाई दे रहे है। पिछले दिनों वसुंधरा राजे जब सपरिवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले तो मोदी जी की बॉडी लैंग्वेज देखने लायक थी। जिस हंसी खुशी के वातावरण में यह मुलाकात हुई वह कई राजनीतिक सन्देश दे गई। 

वसुन्धरा राजे के साथ उनके सांसद पुत्र दुष्यन्त सिंह पुत्र वधु निहारिका सिंह और पौते पोती भी थे । दुष्यन्त सिंह राजस्थान के झालावाड़ से पांचवीं बार के सांसद है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस दृश्यक से उनके केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने की बात गैर वाजिब भी नहीं है।

कुल मिलाकर वसुंधरा राजे और नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ती राजनीतिक निकटता को केवल व्यक्तिगत समीकरण के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह संभव है कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक संतुलन की सोच हो। राजनीति में संकेतों का महत्व हमेशा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन संकेतों से राजस्थान की राजनीति में कौन से नए समीकरण उभरते हैं और यह नज़दीकियाँ वास्तव में क्या नया राजनीतिक अध्याय लिखती है।


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