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जयपुर में सनातन संवाद प्रथम कड़ी का आयोजन सनातन मूल्यों एवं सामाजिक समरसता पर गहन चर्चा  

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29 Apr 26
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जयपुर में सनातन संवाद प्रथम कड़ी का आयोजन  सनातन मूल्यों एवं सामाजिक समरसता पर गहन चर्चा   

जी एन भट्ट 

जयपुर। राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि युवाओं को सनातन की वैज्ञानिकता के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्हें कालजयी ग्रन्थ रामायण और गीता के अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए । आज सनातन पर गहन मंथन के साथ ही व्यावहारिक पहल की आवश्यकता है। साथ ही सनातन के माध्यम से सभी समाजों को जोडने की आवश्यकता है ।  

 

विधानसभाध्यक्षदेवनानी संस्कृति युवा संस्था द्वारा जयपुर में आयोजित सनातन संवाद कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे । उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

देवनानी ने सनातन संवाद को सामायिक विषय बताया और कहा कि सनातन शाश्वत है, इसलिए इस संवाद को अनन्त रखा जाये। उन्होंने कहा कि सनातन को कोई खत्म नहीं कर सका है और न ही कोई कर सकेगा। सामूहिक प्रयासों से सनातन बढेगा। आज सनातन संस्कृति एवं सामाजिक व्यवस्था,समाज-परिवार व्यवस्था और वर्तमान समय में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण एवं जनजागरण जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की आवश्यकता है।                                                                                                                                                                                                               देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति हमारी पहचान और समाज की आधारशिला है। इसे सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, जागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे संवाद समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी ने कहा कि गृहस्थ परंपरा से संचालित मंदिर आज भी समाज में एक सशक्त, जीवंत और अनुकरणीय व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। परिवार आधारित सेवा परंपरा में श्रद्धा, उत्तरदायित्व, निरंतरता और पारदर्शिता का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है, जो मंदिरों को समाज से सीधे जोड़ता है।

सनातन संवाद के आयोजक और संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि समाज में संवाद और समन्वय की आवश्यकता है।  राज्य में आज अनेक स्थानों पर गृहस्थ/परिवार आधारित सेवा परंपरा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। संवाद में उपस्थित विद्वानों एवं वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने के लिए ऐसे मंचों की अत्यंत आवश्यकता है। संवाद के माध्यम से ही हम परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं।                                                                                                                                                                                                          

कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि सनातन संवाद को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुँच बनाकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिससे सनातन विचारधारा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

संस्कृति युवा संस्था के संरक्षक एच.सी. गणेशिया ने कहा कि सनातन संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सतत विचार प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता, समन्वय और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। इस अवसर पर आचार्य संत राम रिछपाल दास त्रिवेणी धाम, संत धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य, संत समाज के अध्यक्ष सियाराम दास, शुक्र सम्प्रदाय आचार्य अलबेली माधुरी शरण, पंच खंड पीठाधीश्वर स्वामी सोमेन्द्र,स्वामी मोनू अमरापुर, खोले के हनुमान जी के महामन्त्री बी एम शर्मा,आचार्य राजेश्वर, महेन्द्र चौहान खाटू धाम एवं स्वामी योगेन्द्रनाथ, ज्योति खंडेलवाल, पुनीत कर्णावट उपस्थित रहे और सभी ने अपने विचार साझा किये।


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