अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पर विशेष
उदयपुर |अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस के अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक, अध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाता है।
यह दिवस नृत्य की कला के प्रति सम्मान और इसके महत्व को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
इसकी शुरुआत 1982 में यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) की नृत्य समिति द्वारा आधुनिक बैले के जनक जीन-जॉर्जेस नोवेरे के जन्मदिन पर की गई थी।
इस दिन को मनाने का उद्देश्य नृत्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे शिक्षा के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना है।
नृत्य विभिन्न संस्कृतियों को एक मंच पर लाने का कार्य करता है, जिससे सांस्कृतिक समझ और एकता को बढ़ावा मिलता है।
नृत्य केवल मनोरंजन प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है। यह अभिव्यक्ति, संचार और सांस्कृतिक संरक्षण का एक सशक्त माध्यम है।
नृत्य के माध्यम से व्यक्ति बिना बोले अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकता है । यह विविधता में एकता को दर्शाता है और विभिन्न संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य करता है।
अतः नृत्य को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसके माध्यम से जीवन में सकारात्मकता, खुशी और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का संकल्प लेना होना चाहिए।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि प्राचीन शोध के अनुसार नृत्य थेरेपी प्राकृतिक प्रसव (Natural Birth), डिप्रेशन (Depression) और कैंसर रिकवरी (Cancer Recovery) में विशेष रूप से प्रभावी है।
नृत्य से बीमारियों में राहत मिलती है जैसे डांस थेरेपी डिप्रेशन, एंग्जायटी, और कैंसर के मरीजों में मनोवैज्ञानिक तनाव को कम करने में मदद करती है।
प्राकृतिक प्रसव: नियमित डांस थेरेपी से पेल्विक मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे प्राकृतिक प्रसव की संभावना बढ़ती है और प्रसव का समय औसतन 1.5 घंटे तक कम हो सकता है।
यह शरीर में सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे "हैप्पी हार्मोन्स" को बढ़ाता है, जिससे तनाव कम होता है और डिप्रेशन के लक्षणों में 50% तक की कमी देखी जा सकती है।
नियमित नृत्य से जोड़ों के दर्द, मोटापे और गठिया जैसी स्थितियों में भी यह सहायक प्रतीत होता है
वर्त्तमान में नृत्य थेरेपी से न्यूरोलॉजिकल सुधार, पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी स्थितियों में याददाश्त और शरीर के संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
वही कैंसर रिकवरी में कीमोथेरेपी के बाद रिकवरी को गति देती है और दर्द को प्रबंधित करने में सहायक होती है।
माथुर ने ये भी कहा की वर्त्तमान समय को ध्यान में रखते हुए नृत्य को शिक्षा स्वरुप अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए जो की समय की महत्ती आवश्यकता है |
मंच के सह सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा, सहायक सचिव विनोद कुमार चौधरी, धर्मेंद्र कुमार वर्मा , विशाल माथुर, एवं डॉ. कुणाल आमेटा आदि ने प्रकाश डालते हुए कहा कि नृत्य एक पुल की तरह है जो विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को एक दूसरे के करीब लाता है।
नृत्य विश्व के हर हिस्से में पाया जाता है, कुछ प्रसिद्ध नृत्य शैलियों जैसे फ्रांस का बैले नृत्य , जो बेहद सुंदर और सुरुचिपूर्ण दिखता है। अमेरिका का हिप-हॉप , ऊर्जा और शानदार डांस मूव्स से भरपूर।
साल्सा लैटिन अमेरिका का संगीत है, जो जीवंत और लयबद्ध होता है।
उत्तर भारत का कथक , जो हावभाव और पैरों की चाल के माध्यम से कहानियाँ सुनाता है।
दक्षिण भारत का भरतनाट्यम , सबसे प्राचीन और शुद्ध नृत्य शैलियों में से एक है।
इस दिन का आनंद लेने के लिए आपको पेशेवर नर्तक होने की आवश्यकता नहीं है। हर कोई अपने तरीके से इसे मना सकता है! यह भारतीय शास्त्रीय नृत्य, हिप-हॉप या फ्रीस्टाइल भी हो सकता है। बस थिरकें और आनंद लें!
अंत में कहा जा सकता है कि नृत्य केवल मनोरंजन या कला का रूप नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सांस्कृतिक एकता का एक सशक्त माध्यम है। यह हमारी परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का जरिया है।