जैसलमेर। भीषण ग्रीष्म ऋतु में जिले में पेयजल की आपूर्ति का मुख्य स्रोत भूजल होने के कारण इसके विवेकपूर्ण एवं मितव्ययी उपयोग की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। इसी संदर्भ में भूजल विभाग ने पेयजल प्रबंधन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रभारी भूजल वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया ने बताया कि जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संचालित निजी आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट द्वारा शुद्धिकरण के दौरान बड़ी मात्रा में पानी का अपव्यय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद निकलने वाला लगभग 60 प्रतिशत जल उपयोग योग्य होता है, जिसे नालियों या खुले में बहाया जाना संसाधनों की बर्बादी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अपशिष्ट जल का उपयोग सफाई, बागवानी, निर्माण कार्य एवं अन्य गैर-पेयजल कार्यों में किया जा सकता है, जिससे पेयजल पर दबाव कम होगा एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. इणखिया ने निर्देश दिए कि सभी आरओ प्लांट संचालक, जो टैंकर या अन्य माध्यमों से भूजल का उपयोग कर रहे हैं, वे अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इस संबंध में आगामी दिनों में सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा और यदि कहीं भी जल का अपव्यय पाया गया तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि टैंकर के माध्यम से जल उपयोग करने वाले व्यवसायिक उपभोक्ता केवल अधिकृत एवं सक्षम अनुमति प्राप्त नलकूप धारकों से ही पानी क्रय करें, ताकि भूजल का उपयोग नियमानुसार हो एवं राज्य सरकार को राजस्व हानि न हो।
जिला प्रशासन ने आमजन एवं संबंधित संचालकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं एवं प्रत्येक बूंद के महत्व को समझते हुए जिम्मेदारी का परिचय दें।