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विश्व पुस्तक दिवस पर लोक संस्कृति का रंगारंग उत्सव

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24 Apr 26
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विश्व पुस्तक दिवस पर लोक संस्कृति का रंगारंग उत्सव

लेखन, चिंतन, विमर्श और सम्मान के सुरों के बीच सजी एक सांस्कृतिक संध्या…
जहाँ शब्दों ने विचारों को आकार दिया और परंपरा ने मंच पर जीवन पाया।
लोक संस्कृति के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. जगदीश निराला के सजीव अभिनय ने पूरे माहौल को भावनाओं से सरोबार कर दिया।

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के उपलक्ष्य मे  डॉ जगदीश निराला की दो पुस्तके “ उमंग” एवं “रूपाळी म्हारी मांगरोळ” भव्य लोकार्पण |

कवि, चिंतक एवं विचारक धर्मराज “भारत“ समेत साहित्यिक जगत से जुड़ी 7 हस्तियों को सृजन शिखर सम्मान -2026 |

कोटा। राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा द्वारा विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश निराला द्वारा रचित हिंदी गीत, कविता एवं ग़ज़ल संग्रह “उमंग” तथा राजस्थानी गीत संग्रह “रूपाळी म्हारी मांगरोळ” का भव्य लोकार्पण पूर्ण विधि विधान एवं वेदिक संस्कृति से मंत्रोपचार के साथ किया गया, मंत्रोपचार पंडित प्रेम शास्त्री ने किया । इस समारोह में लेखन, चिंतन, विमर्श एवं सम्मान के साथ लोक संस्कृति का जीवंत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर लोक संस्कृति के प्रख्यात लेखक डॉ. जगदीश निराला ने अपने सजीव अभिनय से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के मंचासीन होने के पश्चात दीप प्रज्वलन एवं सर्वधर्म ग्रंथ पूजा से हुआ। तत्पश्चात अतिथियों का शाल, साफा, माला एवं नारियल भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यातनाम साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही, मुख्य अतिथि धर्मराज मीणा अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश कोटा , अति विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार आलोचक एवं समीक्षक विजय जोशी , गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ सुरेश कुमार पाण्डेय वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक एवं लेखक , विशिष्ट अतिथि तरुण कुमार सोमानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विशेष अभियान समूह ) , डॉ. चंद्रशेखर सुशील पूर्व प्राचार्य मेडीकल कॉलेज कोटा , मुख्य वक्ता   प्रो. के.बी. भारतीय पूर्व प्राचार्य, उच्च शिक्षा, राजस्थान रहे |

स्वागत उद्बोधन संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने पुस्तकों और रचनाकारों को आधुनिक युग में प्रसांगिक बताते हुए कहा कि कोई भी साहित्यकार बिना मूल साहित्य के स्थापित नहीं हो सकता, वर्तमान समय में रचनाकार बहुत जल्दी प्रसिद्धि पाना चाहते हैं। सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में इन दिनों जो आयोजन हो रहे हैं वो देश के किसी भी नगर के समारोह से गुणात्मक दृष्टि से कम नहीं है।

कार्यक्रम में मुख्य बीज वक्ता के रूप में प्रो. के.बी. भारतीय (पूर्व प्राचार्य, उच्च शिक्षा, राजस्थान) ने कहा कि वह सभी को एक साथ लेकर चलने की सीख देते हैं।उनका साहित्य अभिजात्य साहित्य से इतर लोक सम्पृक्त साहित्य है जिसकी सहजता को भुलाया नहीं जा सकता।

अति विशिष्ट अतिथि श्री विजय जोशी ने कहा कि उनके साहित्य में आम जन की पीड़ा को भी देखा जा सकता है।उनका राजस्थानी साहित्य तो अपने स्थान पर है ही लेकिन उनकी लोक जुंबिश हिन्दी साहित्य में भी देखी जा सकती है।

गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि ये केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, हमारी समृद्ध विरासत और लोकगीत परंपरा के जीवंत दस्तावेज हैं। ये कृतियाँ हमारी जड़ों से जुड़ने और अपनी पहचान को समझने का सशक्त माध्यम हैं।  डॉ. पाण्डेय ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इन रचनाओं से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में संस्कार, संघर्ष और सांस्कृतिक गौरव को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये दोनों कृतियाँ देश के गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाते हुए युवाओं के मन में नई ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना का संचार करेंगी। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारत की महान परंपरा का उल्लेख करते हुए वीरता और बलिदान के प्रतीकों—महाराणा प्रताप, पन्ना धाय और बंदा वैरागी—का स्मरण किया। उन्होंने कहा, “जिस देश के लोग अपनी विरासत को भूल जाते हैं, वह देश शीघ्र ही गुलाम हो जाता है। भारत आज भी अडिग खड़ा है, क्योंकि हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी आत्मा अत्यंत प्राचीन और शक्तिशाली है।” उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. जगदीश निराला जैसे रचनाकार इस अमूल्य विरासत को शब्दों में सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महान कार्य कर रहे हैं। विश्व पुस्तक दिवस के इस पावन अवसर पर, हिंदी, हाड़ौती और ज्ञान की त्रिवेणी के इस अद्भुत संगम में उपस्थित होकर डॉ पाण्डेय ने इसे एक आध्यात्मिक और बौद्धिक स्नान की संज्ञा दी—एक ऐसा अनुभव जो व्यक्ति को समृद्ध करता है, उसकी सोच को विस्तार देता है और उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से और अधिक मजबूती से जोड़ता है। अंत में, उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम अपनी ऐतिहासिक विरासत, लोकगीतों और सांस्कृतिक परंपराओं को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़ें।

मुख्य अतिथि धर्मराज भारत (कवि, चिंतक एवं विचारक) ने अपने संबोधन में ने विश्व पुस्तक दिवस एवं कॉपीराइट एक्ट पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1995 से यूनेस्को द्वारा विलियम शेक्सपियर और मिगुएल डे सर्वेंट्स जैसे महान लेखकों के सम्मान में प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य किताबों के जरिए ज्ञान का प्रसार करना है। यूनेस्को ने वर्ष 2026 की विश्व पुस्तक एंव कॉपीराइट दिवस की थीम बहुभाषावाद रखा है जिसका उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ना है. साहित्य के क्षेत्र में धर्मराज भारत के नाम से सक्रिय एडीजे धर्मराज मीणा ने प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट 1867, पुस्तक और समाचार पत्र परिदान (सार्वजनिक पुस्तकालय) अधिनियम सहित भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ख्यातनाम साहित्यकार श्री जितेंद्र निर्मोही ने कहा कि आजादी के बाद रघुराज सिंह हाड़ा के बाद हाड़ौती बोली के जो भी गीतकार आए उनमें तीन विश्वामित्र दाधीच, धन्ना लाल सुमन और जगदीश निराला भक्ति काव्य और मंडलियों से आए। विश्वामित्र दाधीच और जगदीश निराला में साम्यता यह पाई जाती है कि उन्होंने लोक गीतों के साथ साथ अपने गांवों की ढाई कड़ी की रामलीला को भी सम्पृक्त किया। धन्ना लाल सुमन और जगदीश निराला ने अपने लोक रंजन से हाड़ौती अंचल की बोली को समृद्ध किया सामाजिक सरोकार, भ्रष्टाचार और बदलते मनुष्य की फितरत को उन्होंने हाड़ौती के आंचलिक शब्दों से उकेरा |  उन्होंने लेखक डॉ. जगदीश निराला के साहित्यिक योगदान की सराहना की। इस अवसर पर लेखक का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार नहुष व्यास ने किया |

            इस अवसर पर कवि, चिंतक एवं विचारक धर्मराज “भारत“ समेत ख्यातनाम साहित्यकार  जितेंद्र निर्मोही , विजय जोशी ,के. बी .भारतीय , तरुण कान्त सोमानी , डॉ सुरेश पाण्डेय , डॉ चन्द्र शेखर सुशील , डॉ योगेंद्र मणि कौशिक नहुष व्यास, बद्री लाल दिव्य , योगेश यथार्थ , किशन लाल वर्मा , डॉ शशि जैन जैन ,  बिगुल जैन  को सृजन शिखर सम्मान -2026 से सम्मानित किया गया |

 

श्रेष्ठ लेखकीय योगदान के लिए पुस्तकालय प्रशासन कोटा ने डॉ अतुल चतुर्वेदी , प्रेम शास्त्री , विष्णु शर्मा हरिहर”, हेमराज “हेम” , महावीर मेहरा ,   महावीर सेन , गजेंद्र व्यास, सत्येंद्र वर्मा ,नन्द सिंह पँवार,  डॉ प्रहालाद दुबे , नन्द किशोर महावर ,मेघना मेहरा , सुमित्रा निराला का सम्मान किया |

अंत में डॉ. शशि जैन द्वारा आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के उपरांत अतिथियों ने पुस्तकालय का भ्रमण किया तथा अल्पाहार का आयोजन किया गया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों, पाठकों एवं बुद्धिजीवियों के लिए एक प्रेरणादायी अवसर सिद्ध हुआ, जिसमें पुस्तकों के प्रति रुचि और जागरूकता को बढ़ावा मिला।


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