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प्रथम बाल रचनाकार प्रशिक्षण शिविर 

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19 Feb 26
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प्रथम बाल रचनाकार प्रशिक्षण शिविर 

बाल रचनाकारों को कविता लिखना सीखने के लिए  विष्णु शर्मा हरिहर ने दिए टिप्स....

कोटा । बच्चों को साहित्य से जोड़ने के लिए विगत दो वर्षों से संस्कृति,साहित्य,मीडिया फोरम कोटा द्वारा संचालित मिशन बाल मन तक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम बाल रचनाकार प्रशिक्षण शिविर बुधवार 18 फरवरी 26 को झालावाड़ के पल्लवन प्राथमिक विद्यालय मुंडेरी में आयोजित किया गया।
  मुख्य प्रशिक्षक विष्णु शर्मा हरिहर ने कक्षा 5 वीं से 11 वीं के लगभग 125 बच्चों को कविता लिखने के आसान टिप्स दिए और नियमों, गीत की रचना प्रक्रिया के साथ बताया कि कल्पना और भावनाओं के साथ शब्द संयोजन कैसे किया जाता है। साथ ही कविता लिखने के लिए बच्चों से प्रयोग भी करवाए। बच्चों ने पूरी रुचि ले कर प्रशिक्षण में सजीव भागीदारी की और बाद में पूछे गए सभी प्रश्नों के सही उत्तर दे कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। 
        मुख्य अतिथि जितेंद्र निर्मोही ने बहुत ही रोचक तरीके से गीत की रचना प्रक्रिया के साथ बताया कि कल्पना और भावनाओं के साथ शब्द संयोजन कैसे किया जाता है। उन्होंने एक गीत की पैरोडी  इंदरराजा पानी दो,बादल दो हरियाली दो, पर्वत झरने सूख गये हैं,जल की बूंदें भारी दो से बच्चों से उसको जोड़ा और रचना प्रक्रिया को बताया।
       अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने बच्चों को उदाहरण सहित अतुकान्त और तुकांत कविताओं के प्रकार और इनमें अंतर समझाते हुए विस्तार से जानकारी दी। बच्चों से कई पंक्तियों को दोहरवा कर प्रश्न भी पूछे।
       विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी एवं साहित्यकार प्रकाश चंद्र सोनी ‘यौवन’ ने ऐसे कार्यक्रमों के लिए बच्चों के लिए उपयोगी और सार्थक बताया। सुरेश निगम मोहनलाल वर्मा, राकेश नैयर रूप जी रूप, अदिति शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए और कहा हमने भावी पीढ़ी के बच्चों के लिए ऐसा साहित्यिक प्रशिक्षण पहली बार देखा है, यह निरंतर जारी रखा जाना चाहिए जिस से बच्चें अच्छे साहित्यकार बन सकेंगे। 
     बच्चों में सार्थक पांडेय ने दशावतार, विरांगी विजय ने हो जाओ तैयार साथियों ,.दिपेश चोरसिया ने जब सत्रवे दिन पर बात आन पड़ी (महाभारत कर्ण ), लवांश हाडा- ने महराणा प्रताप हमारा, प्रकम्या शुक्ला मनु कहो या मणिकर्णिका, राजेश्वरी मीणा ने धूप छाँव से भरी रागिनी(माँ) और मो. मुकर्रम ने दोस्ती का मतलब खास है स्वरचित कविताएं सुना कर अपनी काव्य लेखन प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया। बच्चों से चर्चा की तो उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता बताते हुए उपयोगी बताया।
      कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल में बताया इस वर्ष ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को इस वर्ष जारी रखने का आश्वासन दिया और कहा अन्य कार्यक्रमों के साथ - साथ बच्चों की साहित्यिक रुचि विकसित करना भी आवश्यक है। आज देश में बच्चों और युवा पीढ़ी को कविता, कहानी, आदि लिखना सीखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और न ही बच्चों के लिए कोई कोर्स है। विष्णु शर्मा हरिहर के सुझाव पर बाल रचनाकार प्रशिक्षण शिविर शुरू किए गए हैं। इसके पीछे राया मथुरा के बाल साहित्यकार अंजीव रावत की प्रेरणा भी हैं।
     इस अवसर पर उड़ती पतंग प्रतियोगिता में प्रथम रहे रूपजी रूप , तृतीय रही अदिति शर्मा और विद्यालय के बच्चों को समरस संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन की ओर से अतिथियों के माध्यम से पुरस्कृत किया गया। जितेंद्र निर्मोही ने अपनी ओर से कापी,पैन और साहित्य बच्चों को उपहार स्वरूप प्रदान किए। बच्चों की कविताओं की हस्तलिखित पुस्तक पल्लव के सुमन का अतिथियों ने विमोचन भी किया ।
    कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति, साहित्य, मीडिया फोरम कोटा द्वारा समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत गांधीनगर की राजस्थान इकाई, अखिल भारतीय साहित्य परिषद झालावाड़ इकाई  और पल्लवन विद्यालय के तत्वावधान में किया गया।
     अतिथियों ने माँ शारदे की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभकारंभ किया। बच्चों ने सरस्वती वंदना एवं स्वागतगीत प्रस्तुत किया। विद्यालय में कार्यक्रम संतोजिका श्रीमती रेखा सक्सेना से सभी का स्वागत कर हस्तलिखित पुस्तक की जानकारी दी। महताब आलम ने सभी का आभार व्यक्त किया। विशेषता रही कि संयुक्त रूप से प्रभावी और सफल संचालन बालिकाओं राजेश्वरी मीणा एवं सार्थक पांडेय द्वारा किया गया।


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