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पीएमसीएच में बिना बेहोश किए हुई फेफड़ों की जटिल सर्जरी

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23 Feb 26
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पीएमसीएच में बिना बेहोश किए हुई फेफड़ों की जटिल सर्जरी

उदयपुर। उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के कार्डियोथोरेसिक विभाग ने एक 59 वर्षीय गंभीर रूप से घायल मरीज की नॉन-इंट्यूबेटेड वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (एनआईवीएटीएस) कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। दक्षिणी राजस्थान यह अपनी तरह की पहली ऐसी सफल सर्जरी मानी जा रही है, जहाँ मरीज को बिना वेंटिलेटर पर लिए फेफड़ों का ऑपरेशन किया गया।
इस सफल सर्जरी को चीन के ग्वांगझू से प्रशिक्षित थोरैकोस्कोपिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता ने अंजाम दिया। डॉ. मेहता ने बताया कि सामान्यतः छाती की सर्जरी के लिए मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर गले में एंडोट्रैकियल ट्यूब डाली जाती है और फेफड़ों को मशीन (वेंटिलेटर) से नियंत्रित किया जाता है। लेकिन एनआईवीएटीएस तकनीक में मरीज को कृत्रिम सांस देने की जरूरत नहीं पड़ी। आईवी सेडेशन और लोकल एनेस्थीसिया के जरिए मरीज पूरी सर्जरी के दौरान प्राकृतिक रूप से सांस लेता रहा, जिससे वेंटिलेटर से जुड़ी जटिलताओं का खतरा शून्य हो गया।
दरअसल लोसिंग निवासी 59 वर्षीय पर्वत सिंह की बाइक से घर आते समय गाय से टकरा जाने से पसलियों में कई जगह फ्रैक्चर, कंधे की हड्डी चकनाचूर थी एवं तिल्ली की चोट के कारण पेट में भारी रक्तस्राव (हेमोपेरिटोनियम) हो रहा था। मरीज को परिजन अत्यंत नाजुक स्थिति के चलते पीएमसीएच के इमरजेंसी में लेकर आए। जहॉ  सर्जन डॉ.रेणू रांवका एवं उनकी टीम ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते तुरन्त आईसीयू में शिफ्ट किया गया। लगभग दो हफ्तों तक आईसीयू में रहने के बाद मरीज की हालत मे सुधार होने के बाद फेफड़ों की जटिलता को दूर करने के लिए थोरैकोस्कोपिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता की टीम ने थोरैकोस्कोपिक सर्जरी का निर्णय लिया गया।
डॉ. अनुज मेहता ने बताया कि सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती मरीज की पोजिशनिंग थी। कंधे की हड्डी टूटी होने के कारण मरीज को करवट दिलाना मुश्किल था। डॉ.मेहता और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. समीर गोयल की टीम ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मरीज को सीधा लिटाकर ही यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सफल टीम में डॉ.विद्युत पाटीदार नर्सिंग स्टाफ कुलदीप सिंह, संजय ठाकुर ,ललित नागर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जरी के मात्र 30 मिनट बाद मरीज पूरी तरह सचेत हो गया और 3 घंटे में खाना-पीना शुरू कर दिया।
संस्थान की इस उपलब्धि पर पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि पीएमसीएच थोरेसिक सर्जरी के प्रमुख एक्सीलेंस सेंटर के रूप में उभर रहा है। पिछले मात्र डेढ़ महीने में यहाँ 14 से अधिक फेफड़ों की सफल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की जा चुकी है, जो संभाग में सर्वाधिक है। हमारा लक्ष्य अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम के जरिए मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार उदयपुर में ही उपलब्ध कराना है।
 


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