GMCH STORIES

“टेक्नोलॉजी विथ ह्यूमैनिटी“ की सोच के साथ बढ़ना होगा आगे - प्रो देवनानी

( Read 753 Times)

24 Apr 26
Share |
Print This Page
“टेक्नोलॉजी विथ ह्यूमैनिटी“ की सोच के साथ बढ़ना होगा आगे - प्रो देवनानी

उदयपुर। विधानसभा अध्यक्ष प्रो वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्राचीन भारतीय अवधारणा में तकनीकी का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन न होकर हमेशा मानवहित रहा है। इसलिए हमें “टेक्नोलॉजी विद ह्यूमैनिटी“ की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा तभी हम एक स्थाई विकास का मॉडल स्थापित कर पाएंगे। देवनानी ने शुक्रवार को पैसिफिक विश्वविद्यालय के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए यह बात कही। कॉन्फ्रेंस का विषय था “रिडिफाइन बिजनेस पैराडाइम थ्रू एनवायरमेंटल सोशल एंड गवर्नेंस एंड एआई सस्टेनेबिलिटी एंड इंक्लूसिविटी“।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए देवनानी ने कहा कि विकास, पर्यावरण एवं सामाजिक चुनौतियों पर सामुहिक रूप से विचार करने की आवश्यकता है। सतत एवं टिकाऊ विकास के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का मानव चेतना के साथ सहयोगी एवं पूरक संबंध रहा है। तभी भारतीय वाङ्मय में वसुदेव कुटुंबकम की अवधारणा सदियों से चली आ रही है। हमारा व्यावसायिक दृष्टिकोण ऐसा हो जो विश्व परिवार को आधार बनाकर प्रकृति एवं मानवता के लिए सहयोगी के रूप में सामने आए। देवनानी ने कहा कि आज के समय में व्यवसाय सिर्फ अर्थ कमाने की इकाई नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। कांफ्रेंस के विषय का उल्लेख करते हुए उन्होने कहा कि पर्यावरण संतुलन, सामाजिक समावेशन एवं पारदर्शी गवर्नेन्स के माध्यम से प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों शोधकर्ताओं एवं नवाचार कर्ताओं को एक साथ आगे आकर राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की व्यवस्था में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम पाठ्यक्रम तक ही सीमित ना रहे बल्कि शोध करें और उसके बारे में नई पीढ़ी को जागरूक करें हमें हमारे व्यावसायिक मापदंडों को पुनर्परिभाषित करना होगा और इस आधार पर आगे का मार्ग प्रशस्त करना होगा।
उद्घाटन सत्र को पैसिफिक विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर बीपी शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि एक समय भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन की प्रति व्यक्ति आय से अधिक थी लेकिन आज इसका उल्टा है। हमें अपने उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए एक स्थाई विकास को प्राप्त करना होगा। विशिष्ट अतिथि युसीसीआई के अध्यक्ष मनीष गलुण्डिया ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की व्यावसायिक चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। पैसिफिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो हेमंत कोठारी ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ दीपेन माथुर ने इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस की विषय वस्तु एवं आने वाले सत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया।

वर्तमान तकनीक भारतीय बौद्धिकता का आधुनिक स्वरूप
प्रो देवनानी ने कहा कि मानव चेतना एवं तकनीक का बहुत गहरा संबंध है। प्राचीन भारतीय बौद्धिकता बहुत उच्च स्तर पर थी। उस वक्त बिना शब्दों से मन के माध्यम से संवाद करने की तकनीक विकसित कर ली गई थीं। वर्तमान एआई तकनीक प्राचीन भारतीय बौद्धिकता का आधुनिक स्वरूप है
 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like