श्रीगंगानगर। पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के अंतर्गत कार्यरत पशु विज्ञान केंद्र, सूरतगढ़ के द्वारा ग्राम मिर्जेवाला में पशुओं में थनैला रोग के बचाव एवं उपचार विषय पर गैरसंस्थागत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में केन्द्र प्रभारी अधिकारी डॉ. राजकुमार बेरवाल ने बताया कि मैस्टाइटिस (थनैला) रोग एक ऐसी विशेष समस्या है जो पशुपालकों के द्वारा दुधारू पशुओं में खराब प्रबंधन के कारण थनों में इंफेक्शन होने से होती है, जिससे हमारे दैनिक जीवन में काम आने वाला दूध में संक्रमण का खतरा बना रहता है। थनैला रोग होने पर थनों में सूजन, लालपन, दूध का रंग बदल जाना, दूध का फटना, खून आना आदि लक्षण दिखाई देते है। थनैला रोग से दूसरे पशुओं को बचाने के लिए थनैला रोग से संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग कर दें तथा उसका दूध सबसे अंत में निकालें और बताया कि कच्चा दूध का सेवन हमें नहीं करना चाहिए। थनैला से बचाव के लिए ड्राई काऊ थैरेपी का उपयोग करें, दूध की लैबोरेट्री में जांच करवायें, नजदीकी डॉक्टर से संपर्क कर पशु का उपचार करवाये।
प्रशिक्षण शिविर में पशु विज्ञान केंद्र सूरतगढ़ के द्वारा प्रयोगशाला में पीच स्ट्रिप टेस्ट, कैलिफोर्निया मैस्टाइटिस टेस्ट (सीएमटी) आदि दूध की जांच एंव मूत्र, गोबर, खून आदि की निःशुल्क जांच के बारे में विस्तार से जानकारी दी।