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नेतेवाला से नरसिंहपुरा मांझूवास बरानी में कचरा संयंत्र स्थानांतरण का ग्रामीणों ने किया घोर विरोध

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14 Apr 26
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नेतेवाला से नरसिंहपुरा मांझूवास बरानी में कचरा संयंत्र स्थानांतरण का ग्रामीणों ने किया घोर विरोध

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर नगर परिषद क्षेत्र के ठोस कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए पिछले 10 वर्षों से नेतेवाला गांव में प्रस्तावित ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र को प्रशासन द्वारा अचानक तीन दिन पहले शहर से और कई किलोमीटर दूर नरसिंहपुरा मांझूवास बारानी गांव में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी ग्रामीणों के बीच तीखा विरोध का कारण बन गया है।
आज नरसिंहपुरा गांव स्थित महर्षि गौ सेवा सदन में आयोजित प्रबुद्ध ग्रामीणों की बैठक में इस स्थानांतरण का एकमत से विरोध करने का फैसला लिया गया। बैठक में विचार-विमर्श के बाद कल बुधवार को नरसिंहपुरा गांव के गुरुकुल आश्रम में आसपास के गांवों की महापंचायत बुलाने का प्रस्ताव पारित किया गया। महापंचायत में मांझूवास गणेशगढ़, चक 22 एमएल, चक 23 एमएल, चक 24 एमएल लट्ठांवाली, खीचड़ांवाली, सुलेमानकी हैड, चक 51 एलएनपी, चक 38 एलएनपी सहित आसपास के अनेक गांवों, चकों और ढाणियों के लोगों को आमंत्रित किया गया है।
बैठक में शामिल गौ रक्षा सेवा दल नरसिंहपुर के अध्यक्ष मैसी चौधरी ने बताया कि उपस्थित प्रबुद्ध ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि नगर परिषद और जिला प्रशासन के कतिपय अधिकारियों ने जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव को गुमराह कर नेतेवाला से संयंत्र को नरसिंहपुरा में स्थानांतरित करने का षड्यंत्र रचा है। नेतेवाला गांव में वर्ष 2016 से संयंत्र स्थापित करने की पूरी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं। केंद्र सरकार ने 78 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया था और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) भी प्राप्त हो चुका था। दिल्ली की एक फर्म को नेतेवाला में नेशनल हाईवे से लगती 17 बीघा भूमि पर संयंत्र लगाने का टेंडर भी जारी कर दिया गया था जो निर्धारित मापदंडों के अनुरूप है। इसके विपरीत नरसिंहपुरा में प्रस्तावित स्थान पर मात्र 13 बीघा भूमि उपलब्ध है जो नेशनल हाईवे से काफी दूर खेतों के अंदर स्थित है। राजस्थान हाईकोर्ट ने विगत 3 मार्च को स्पष्ट आदेश दिए थे कि नेतेवाला में एक माह के अंदर संयंत्र निर्माण शुरू किया जाए।
आज कीबैठक में ग्रामीणों ने कहा कि जिन पर्यावरणीय व स्वास्थ्य संबंधी खतरों को लेकर नेतेवाला के लोग संयंत्र का विरोध कर रहे थे वे खतरे नरसिंहपुरा के लिए भी बिल्कुल समान हैं। नई जगह पर फिर से एनओसी और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में लंबा समय लगेगा जबकि नेतेवाला में अब सिर्फ निर्माण कार्य शुरू होना बाकी था। इससे श्रीगंगानगर शहर के कचरा निस्तारण की समस्या और भी लंबे समय तक लटक जाएगी।
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि कल की महापंचायत में इन सभी तथ्यों को रखा जाएगा और क्षेत्र के लोगों को वस्तुस्थिति से अवगत करवाते हुए विरोध स्वरूप संघर्ष एवं आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। साथ ही जिला कलेक्टर को सही स्थिति अवगत कराने के लिए एक शिष्टमंडल भेजा जाएगा और मांग की जाएगी कि नरसिंहपुरा में संयंत्र बिल्कुल न लगाया जाए।
उल्लेखनीय है कि विगत शनिवार को ही जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र अब नेतेवाला में नहीं बल्कि नरसिंहपुरा बरानी में लगाया जाएगा। जहां की पंचायत ने 13 बीघा भूमि समर्पित भी कर दी है,लेकिन अब यहां भी स्थानीय ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है।
बैठक में मैसी चौधरी, महेंद्र खोथ, सरपंच हंसराज बामणिया, डायरेक्टर मदन सोनी, राकेश ज्याणी, रामप्रताप मंजू, डॉ. बाबूलाल, डॉ. रूपराम महिया सुभाष रेवाड़, सुरेंद्र मांझू, बंटी नायक, अजय गंगानगरिया, इंदरसेन पोटलिया, गौतम मांझू, राजाराम बेनीवाल, श्रीराम बुरड़क, पप्पू बुरडक, कृष्णलाल महिया, मदन माहिया, सुनील रेवाड, संदीप मांझू आदि शामिल हुए।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और कमजोरी के कारण 10 वर्ष से लटका यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब भी अनावश्यक विवादों में फंसाया जा रहा है। वे इसके खिलाफ आंदोलन की पूरी तैयारी में जुट गए हैं।


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