श्रीगंगानगर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जनकल्याण के लिये प्रतिबद्ध राज्य सरकार की नई पहल के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जहां से किसान ट्रैक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, रीपर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल और फसल अवशेष प्रबंधन जैसे आधुनिक यंत्रों को किराए पर ले सकेंगे। यह योजना विशेषकर लघु और सीमांत किसानों के लिए राहत लेकर आएगी, जिनके लिए सीमित संसाधनों के कारण आधुनिक कृषि यंत्र खरीदना संभव नहीं होता। कस्टम हायरिंग केंद्रों की सुविधा से खेती की लागत तो घटेगी। साथ ही उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा।
योजना से किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, जिससे वे कम समय में अधिक कार्य कर सकेंगे। विशेष रूप से जिन किसानों के पास खुद के संसाधन नहीं है, उन्हें अब मशीनों के अभाव में पिछड़ना नहीं पड़ेगा। आधुनिक यंत्रों के माध्यम में खेतों की बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग अधिक कुशल ढंग से संभव हो सकेगी।
राज्य में वित्तिय वर्ष 2026-27 के लिए 500 कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल केंद्र सरकार की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन के तहत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना और खेती को लाभकारी बनाना है।
कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियों और अन्य पात्र संस्थाओं को कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने हेतु 30 लाख रुपए की अनुमानित परियोजना लागत पर अधिकतम 24 लाख रुपए तक का अनुदान मिलता है। यह सहायता क्रेडिट लिंक्ड बैंक एंड सब्सिडी मॉडल के तहत दी जाती है, जिससे मशीनरी की लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करती है। योजना में ग्रामीण उद्यमी/प्रगतिशील किसान को 40 प्रतिशत अथवा अधिकतम 12 लाख रुपए का अनुदान मिलेगा।
कृषि विभाग के अनुसार इन केंद्रों के संचालन के लिए क्रय-विक्रय सहकारी समितियां (केवीएसएस), ग्राम सेवा सहकारी समितियां (जीएसएस), राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) और ग्रामीण उद्यमी/प्रगतीशील किसानों को शामिल किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापन से कृषि यंत्रीकरण को भी नई दिशा मिलेगी। इससे न केवल किसानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। ग्राम पंचायतों में कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना से किसानों को आधुनिक यंत्र किराए पर मिलेंगे। इससे उनकी कार्य क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।