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आॅल इंडिया ओर्गेनाईजेशन आॅफ केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को

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14 Mar 26
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आॅल इंडिया ओर्गेनाईजेशन आॅफ केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को

उदयपुर। राजस्थान केमिस्ट एलाइंस के तत्वावधान में आॅल इंडिया ओर्गेनाईजेशन केमिस्ट डीलर्स की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक कल से होटल मेरियट में आयोजित होगी। जिसमें देशभर से 300 प्रतिनिधि भाग ले रहे है।  
उपरोक्त सन्दर्भ में जानकारी देते हुए राजस्थान केमिस्ट एलायंस के अध्यक्ष एवं आॅल इंडिया ओर्गेनाईजेशन आॅफ केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट के उपाध्यक्ष अरविन्द गुप्ता ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में फार्मास्युटिकल व्यापार से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बैठक में आॅल इंडिया ओर्गेनाईजेशन आॅफ केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट के अध्यक्ष जे.एस. सिन्धे,महासचिव राजीव सिंघल और आयोजन सचिव संदीप नांगिया भी भग ले रहे है।
एक दिवसीय बैठक में विशेष रूप से फार्मास्युटिकल उद्योग के डिजिटलीकरण, व्यापार को अधिक पारदर्शी व संगठित बनाने तथा ऑनलाइन फार्मेसी के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यह आयोजन राजस्थान केमिस्ट एलाइंस द्वारा फार्मास्युटिकल उद्योग एवं केमिस्ट समुदाय के हित, एकता और कल्याण को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि आज भी बाजारों में 40 प्रतिशत दवाएं ऐसी है जो या तो डुप्लिकेट है या फिर नकली है। उन्होंने कहा कि अभी भी बाजार में सौ से ज्यादा प्रोडक्ट नकली या डुप्लिकेट बाजार में बिक रहे हैं। उन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसी दवाएं देश के अलग- अलग राज्यों में बन रही है और बिक रही है, जो कि जन स्वास्थ्य के साथ में खिलवाड़ है। इनसे हमें भारी नुकसान हो रहा है।
ऑल इंडिया ओरगेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट के साढ़े बारह लाख मेम्बर हैं। इनके परिवारों को भी साथ जोड़ लिया जाए तो इससे लगभग 5 करोड़ लोगों का भरण पोषण होता है। इसके साथ ही दस लाख फार्मेसिस्ट हैं लेकिन ऑनलाईन सेल मेडिसिन के करण हमें लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है और हमारे व्यवसाय पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। जबकि हकीकत में ऑन लाईन सेल मेडिसिन पूर्णतया अवैध और गैर कानूनी है। इसके बावजूद विदेशी कम्पनियां इस व्यापार को हमारे देश में कर रही है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि जो हमारा मुनाफा तय किया हुआ है, या जो प्राईस फिक्स कर रखी है, उससे भी कम प्राईस और घाटा होने के बावजूद यह विदेशी कम्पनियां अपनी दवाईयों को ऑनलाईन मार्केट के माध्यम से बाजारों में बेच रही है। इन बाहरी कम्पनियों ने शुद्ध रूप से हमारे यहां अपनी मोनोपाली चला रखी है। यह मार्जिन भी ज्यादा दे रहे हैं जबकि इतना मार्जिन सम्भव ही नहीं है लेकिन सरकार भी इन पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। कई बार हमने सरकार से इस सम्बन्ध में चर्चा करने की कोशिश की, हेल्थ मिनिस्टर से भी समय मांग रहे हैं लेकिन वह भी समय नहीं दे रहे हैं और लगातार टामटोल कर रहे हैं।
उदयपुर में हो रही हमारी राष्ट्रीय बैठक में सरकार को अन्तिम चेतावनी के रूप में प्रस्ताव तैयार करेंगे। बैठक के बाद हम सरकार को अन्तिम नोटिस देंगे। इसके बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हुई तो हम सांकेतिक तौर पर एक दिन का भारत बन्द का आह्वान करेंगे, उसके बाद भी यदि सरकार नहीं सुनती है तो हम अनिश्चितकानील हड़ताल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
संगठन ने हाल ही में सरकार द्वारा जारी उस प्रस्ताव पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिसमें प्राथमिक कृषि साख समितियों को फॉर्म बीस ए एवं 21 ए के अंतर्गत औषधि लाइसेंस प्रदान करने की बात कही गई है।
यह निर्णय जनस्वास्थ्य, रोगी सुरक्षा तथा देश की औषधि नियंत्रण व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है। पहली बात तो बिना लाईसेन्स के कोई भी किसी भी प्रकार की दवाईयां नहीं बेच सकता। दूसरा इसके लिए एजुकेशन होना बहुत जरूरी है और तीसरा बिना फार्मासिस्ट के दवाएं नहीं बेची जा सकती है। उन्होंने कहा कि हम सहकारी बिक्री केन्द्रों पर दवाईयां बेचने के फैसले का भी विरोध करते हैं।
इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर रविवार को आयोजित बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी तथा आवश्यकता पडने पर संगठन द्वारा इस संबंध में ठोस और कठोर निर्णय भी लिए जा सकते हैं।


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