उदयपुर। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने महाराणा भूपाल चिकित्सालय के शिशु रोग विभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुरूवार सुबह सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन, एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन, और बाल चिकित्सालय विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वच्छता की सराहना
निरीक्षण की शुरुआत में जिला कलक्अर ने अस्पताल परिसर की स्वच्छता देख संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि अस्पताल के कोनों और सीढ़ियों पर पान या गुटखा की पीक के निशान नहीं थे। अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन ने बताया कि प्रवेश द्वार पर ही सख्त चेकिंग और मरीजों के परिजनों को जागरूक करने के साथ-साथ जगह-जगह कचरा पात्रों की व्यवस्था से यह संभव हो पाया है।
सिकल सेल एक्सीलेंस सेंटर का अवलोकन
कलक्टर ने ओपीडी, वैक्सीनेशन कक्ष और एडोलसेंट सेंटर का जायजा लिया। उन्हें अवगत कराया गया कि यह चिकित्सालय देश का दूसरा सिकल सेल एक्सीलेंस सेंटर है । इस दौरान उन्होंने जनसहभागिता बढ़ाने हेतु चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान के बैनर पर अपने हस्ताक्षर भी किए। साथ ही हीमोफीलिया एवं थैलेसीमिया वार्ड में पंजीकृत 300 से अधिक मरीजों के नियमित उपचार की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
कुपोषण के विरुद्ध जंग और सामाजिक सरोकार
संभाग का प्रमुख केंद्र होने के कारण यहाँ भर्ती अति-कुपोषित बच्चों के उपचार और उनके माता-पिता को दिए जाने वाले दैनिक भत्ते की जानकारी भी कलक्टर ने ली। उन्होंने आईसीयू, पीआईसीयू और कुपोषण वार्ड की रसोई का निरीक्षण कर आहार की गुणवत्ता जांची।
मासिक समीक्षा बैठक और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश
जिला कलेक्टर ने भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अस्पताल विस्तार के सुझावों पर चर्चा की। उन्होंने आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज से जुड़ी निर्माण एजेंसियों के कार्यों की गति बढ़ाने के लिए हर माह जिला कलक्टर कार्यालय स्तर पर मासिक समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल परिसर में यातायात, पार्किंग और मरीजों, छात्रों व चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग को भी इन समीक्षा बैठकों में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रिंसिपल डॉ. जैन को निर्देश दिए कि वे इन बैठकों का विस्तृत एजेंडा तैयार करें ताकि समयबद्ध तरीके से समस्याओं का निराकरण हो सके।
जन-जागरूकता पर जोर
विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा ने बताया कि कई मरीजों की मां योजना पॉलिसी समाप्त होने पर अस्पताल स्तर पर व्यय वहन किया जाता है। इस पर कलक्टर ने फील्ड में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पात्र लोगों को समय पर लाभ मिल सके और चिकित्सालय पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े। निरीक्षण के दौरान उप अधीक्षक डॉ. संजीव टांक, सीनियर प्रोफेसर डॉ. आसिफ, नर्सिंग अधीक्षक एवं अन्य वरिष्ठ चिकित्साकर्मी भी उपस्थित थे।