उदयपुर | विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कंज्यूमर प्रोटक्शन ऑर्गेनाइजेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजश्री गांधी ने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी का मौलिक अधिकार है एवं जहां सुरक्षा होती है, वहां आत्मविश्वास उत्पन्न होता है, और जहां स्वास्थ्य होता है, वहां कार्यक्षमता एवं उत्पादकता स्वतः बढ़ती है। सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण किसी भी संस्था की सफलता का आधार होता है।
डॉ. गांधी ने बताया कि सुरक्षित कार्यस्थल न केवल शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है, जिससे कर्मचारी अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य कर पाते हैं। स्वस्थ कर्मचारी ही देश की वास्तविक शक्ति हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि देश की आधी आबादी मातृशक्ति है, और उनके लिए कार्यस्थलों पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना प्रत्येक नियोक्ता की जिम्मेदारी है।
इस संदर्भ में उन्होंने POSH Act 2013 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में इस महत्वपूर्ण कानून को लागू किया गया, जिसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना तथा उन्हें सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है।
डॉ. गांधी ने कहा कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे निर्भीक होकर अपने कार्यक्षेत्र में योगदान दे रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल संस्थान ही नहीं, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी का भी यह कर्तव्य है कि वह कार्यस्थल को सुरक्षित, सकारात्मक और सहयोगात्मक बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाए।
अंत में उन्होंने सभी से आह्वान कर कहा की सुरक्षा को अपनाएं,स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें,अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ करें और सुरक्षा ही समृद्धि है, और समर्पण ही सफलता की कुंजी।