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सलूम्बर व आसपास जिलों में वायरल प्रकोप पर सख्ती

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28 Apr 26
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उदयपुर। उदयपुर संभाग के सलूम्बर व समीपवर्ती जिलों में वायरल संक्रमण के बढ़ते प्रकोप, तापघात एवं मौसमी बीमारियों से बचाव, साथ ही जल एवं विद्युत आपूर्ति की स्थिति को लेकर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार शाम 3 बजे महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में संभाग के सभी जिला कलक्टर, संभाग स्तरीय अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) मौजूद रहे।
अति. संभागीय आयुक्त सी.आर. देवासी ने बताया कि बैठक में वायरल संक्रमण की रोकथाम के लिए क्षेत्र में एएनएम, आशा, आंगनवाड़ी एवं स्वच्छता कर्मियों के माध्यम से सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। छोटे बच्चों में प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा परामर्श एवं उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने और मवेशियों के आसपास वेटरनरी डिसइंफेक्टेंट के छिड़काव से संक्रमण रोकने के निर्देश भी दिए गए।
श्री देवासी ने बताया कि उदयपुर रेफर होने वाले मरीजों के लिए विशेष मेडिकल टीम द्वारा निगरानी रखने और निजी अस्पतालों से समन्वय कर सैंपलिंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों या अंधविश्वास के बजाय अस्पताल में उपचार कराने हेतु व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। संभाग के सभी अस्पतालों, सीएचसी व पीएचसी में पर्याप्त स्टाफ, पंखे, कूलर व एसी की व्यवस्था सुनिश्चित करने, तथा मरीजों व परिजनों के लिए छाया, पानी व विश्राम की समुचित सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया। ग्रामरथों व कलाजत्थों के माध्यम से स्वास्थ्य परामर्श का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर एंटी-वेक्टर छिड़काव और जल स्रोतों में आवश्यक रसायन डालने के निर्देश दिए गए। तापघात को देखते हुए विद्यालयों, आंगनवाड़ी एवं मां-बाड़ी केंद्रों के समय में परिवर्तन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में पोषाहार की गुणवत्ता की नियमित जांच, सभी सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा बनाए रखने तथा चिकित्सा कार्मिकों की मुख्यालय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जल संकट से निपटने के लिए हैण्डपम्पों की नियमित मरम्मत, जरूरतमंद क्षेत्रों में पेयजल टैंकरों की व्यवस्था तथा ग्रीष्मकालीन आकस्मिक योजना को समय पर लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा पशुओं के लिए पर्याप्त पानी व चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा लम्पी, एफएमडी व एचएस जैसी बीमारियों के टीकाकरण समय पर कराने और हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय करने पर भी जोर दिया गया।


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