GMCH STORIES

कुमावत समाज ने जातिगत जनगणना में पृथक कॉलम व मूल पहचान रिकॉर्ड पर दर्ज करने की मांग उठाई

( Read 632 Times)

10 May 26
Share |
Print This Page
कुमावत समाज ने जातिगत जनगणना में पृथक कॉलम व मूल पहचान रिकॉर्ड पर दर्ज करने की मांग उठाई

उदयपुर। कुमावत समाज ने राजकीय रिकॉर्ड में क्षत्रिय कुमावत समाज की मौलिक ऐतिहासिक पहचान कायम करने स्वतंत्र कॉलम के लिए एक स्वर में सरकार से न्यायपूर्ण कार्यवाही की मांग की है।
उदयपुर के क्षत्रिय कुमावत समाज के सभी संगठनों की विशेष बैठक और विचार गोष्ठी का आयोजन रविवार को होटल बाउजी पैलेस में आयोजित की गई जिसमें समाज की कई मांगों पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से राज्य में कुमावत समाज की मूल पहचान से खिलवाड़ करने तथा समाज की मौलिक पहचान मिटाने के लिए हो रही असामाजिक व राजनैतिक षड्यंत्रकारी गतिविधियों और सरकार द्वारा समाज के अधिकारों की अनदेखी करने, स्थापत्य कला बोर्ड भंग करने, भवन निर्माण से होने वाली सिलिकोसिस रोग पर संवेदन हीनता बरतने पर रोष जताया गया और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करने और इतिहास को विकृत करने पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई गई।
बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय जनगणना मंत्री हरि सिंह घटेलवाल ने की। मुख्य वक्ता युवा शक्ति प्रदेश मंत्री एडवोकेट भरत कुमावत थे। मुख्य अतिथि सूरजपोल पंचायत अध्यक्ष कन्हैया लाल नाहर, विशिष्ठ अतिथि प्रवासी कुमावत समाज अध्यक्ष हरीश आसिवाल, देवाली पंचायत पूर्व अध्यक्ष भाग चन्द बातरा, तानाबटी चौकी के पुष्कर लाल घोडेला, एवं मुकुंदपुरा पंचायत के एडवोकेट भारत अजमेरा थे।
युवा शक्ति जिलाध्यक्ष सूर्य प्रकाश घोडेला ने बताया कि विचार गोष्ठी में क्षत्रिय कुमावत समाज पर पीएचडी करने वाले मदन मोहन टांक ने कहा कि वर्तमान में जो कुमावत समाज है वे मूलतः दिल्ली के अन्तिम हिन्दू सम्राट पृथ्वी राज चौहान के वंशज हैं और जो इस्लाम कबूल नहीं करने की वजह से मेवाड़ में पलायन करके आए। उन्होंने नए सिरे से अपने अद्भुत सामरिक स्थापत्य की समझ और भवन निर्माण के कौशल के दम पर देश की राजधानी स्थित लाल किला सहित विश्व विख्यात कुंभलगढ़ किला और दीवार, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, आमेर, जयपुर शहर, ताज महल, शिवाजी के रायगढ़, राजगढ़ इत्यादि विश्व प्रसिद्ध महल किले निर्माता के रूप में अपने समुदाय को देश भर में सुदूर दक्षिण तक स्थापित किया और एक नई पहचान कायम की जिससे कि तत्कालीन महाराणा कुम्भा ने उन्हें वरद पुत्र की उपाधि देते हुए स्वतंत्र कुमावत शाखा प्रदान की।
बैठक के उपरान्त आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार को कुमावत समाज  के मौलिक ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक हितों और राजनीतिक अधिकारों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार के विरुद्ध मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री के नाम पांच सूत्री ज्ञापन देने निर्णय लिया तथा मांगे नहीं मानने पर राष्ट्रव्यापी जनांदोलन की दी चेतावनी।
साथ ही शीघ्र समाज की स्वतंत्र एवं मूल पहचान कायम करने को लेकर राज्य के रिकॉर्ड्स में इंद्राज कर बहाल करने की मांग की गई।
 जन गणना मंत्री हरि सिंह घटेलवाल ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि आज़ादी के बाद से ही कुमावत समाज अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि सरकार ने अपने रिकॉर्ड्स में समाज की मौलिक पहचान को स्वतंत्र दर्ज़ा नहीं देकर, पिछड़ा वर्ग की सूचि में अन्य जाति के साथ डाल रखा है। जिससे दो विभिन्न रीति रिवाज़ और सांस्कृतिक ,सामाजिक, आधी दैविक भेद रखने वाले समाजों में व्यापक भ्रामक स्थितियां पैदा कर दी हैं। जिसके कारण आपसी सामाजिक सौहार्द में वैमनस्य पैदा हो रहा है जो राज्य के लिए अराजक स्थितियों  का पिछले कई दशकों से कारण बना हुआ है ।
सूरजपोल पंचायत अध्यक्ष कन्हैया लाल नाहर ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताया कि इतने गौरवशाली, कला कौशल पूर्ण, प्रभु श्रीराम को आराध्य मानने वाले सनातन राष्ट्रवादी समाज को अपनी मूल पहचान के लिए भी इतना संघर्ष करना पड़ रहा है यह एक लोकतांत्रिक सामाजिक अन्याय और कुमावत समाज के लिए  राजनैतिक दुर्भाग्य है।
बैठक में प्रवासी समाज के गिरधारी लाल बेडवाल, सुनील केलुगरिया, राजेश वर्मा, दिलीप वर्मा, सुरेश कुमार सिरसवा, भेरू लाल मारोठिया, अम्बा लाल ओस्तवाल, सूरजपोल पंचायत से महामंत्री एडवोकेट भरत कवाया, जगदीश धनारिया, कुन्दन सलवाडिया, डूंगर सिंह, ललित, रोहित, साकेत, हृदय राज बबेरीवाल, लोकेश कुमार झालवार, परसराम कवाया, तानावटी चौकी के नारायण लाल अन्यावड़ा, कमलेश अन्यावडा, जीवन धनारिया, लोकेश गोठवाल, देवाली पंचायत से दलपत राज बातरा, सहित अन्य समाज बन्धु उपस्थित थे।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like