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पशुओं को तापघात से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी

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15 May 26
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पशुओं को तापघात से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी

उदयपुर । भीषण गर्मी को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने चेताया है कि तापमान में लगातार बढ़ोतरी और लू के असर से पशुधन के स्वास्थ्य के साथ दुग्ध उत्पादन क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।
अतिरिक्त निदेशक पशुपालन विभाग, उदयपुर डॉ. सुरेश कुमार जैन एवं राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर के उपनिदेशक डॉ. द्वारकाप्रसाद गुप्ता के अनुसार तापमान में लगातार बढ़ोतरी एवं लू के असर से हालात बिगड़ने पर पशुओं में डिहाइड्रेशन, तापघात, तेज बुखार, दस्त और गर्भवती मादा पशुओं में र्भपात जैसी गंभीर स्थितिया बन सकती है। डॉ. सुरेश जैन ने बताया कि एडवाजरी के मुताबीक पशुओं को सुबह नौ बजे से शाम छः बजे तक सीधी धूप से बचाकर छायादार स्थानों, पेडों के नीचे या हवादार पशुबाड़ो में रखा जाए।
राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. द्वारकाप्रसाद गुप्ता ने अवगत कराया कि भारवाहक पशुओं को यथासंभव प्रातः एवं सायंकाल में काम में लिया जाए तथा दोपहर के समय इन्हें आराम दिलाना चाहिए। वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओमप्रकाश साहू के अनुसार पशु चारा खाना बन्द करे अथवा सुस्त बीमार दिखाई देवें तो बिना देरी किये निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क स्थापित कर परामर्शः एवं पर्याप्त उपचार प्राप्त करें। डॉ. जैन एवं डॉ. गुप्ता ने अवगत कराया कि एडवाजरी के अनुसार पशुओं के कल्याण के लिए कई विधिक प्रावधान हैं। इसमें पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 के अनुसार किसी जीव-जन्तु की देखभाल करने वाले या उसे रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह ऐसे जीव-जन्तु का कल्याण सुनिश्चित करनें के लिए तथा उसे अनावश्यक पीड़ा या यातना से बचाने के लिए सभी युक्तियुक्त उपाय करेगा। भार ढोने वाले और माल ढोने वाले पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण नियम, 1965 के नियम 6 (उपनियम ३) के अनुसार जिन क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता हो वहां दोपहर 12 बजे से 3 बजे के मध्य पशुओं का उपयोग नहीं किया जाएगा और न करने दिया जाएगा।पशुओं के प्रति करता निवारण (पशुओं का पैदल परिवहन) नियम, 2001 के नियम 12 के अनुसार 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर किसी जानवर का पैदल परिवहन नहीं किया जाएगा।

वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ममता सोनी एवं डॉ. सुरेश शर्मा के अनुसार पालतू श्वान एवं बिल्लियों का भी गर्मी से बचाव करना, पानी, छाया, सुबह 6 बजे से पहले एवं रात 8 बजे के बाद ही वॉक टाइम रखना सही है। कार में अकेला 5 मिनिट के लिए भी नहीं छोड़ें। मुर्गी पालको को भी गर्मी से बचाव हेतु सर्तकता बरतनी चाहिए। पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा गौशाला में जाकर उपरोक्त सबधित जानकारिया प्रदान की।
 


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