उदयपुर। माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) में शुक्रवार को जनजाति वर्ग के सर्वांगीण विकास हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं तकनीक की उपयोगिता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आयुक्त टीएडी लक्ष्मी नारायण मंत्री मुख्य अतिथि रहे तथा अध्यक्षता निदेशक टीआरआई ओ.पी. जैन ने की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आयुक्त लक्ष्मी नारायण मंत्री ने जनजाति वर्ग के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से जनजाति समुदाय को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास और अधिक प्रभावी बनाए जा सकते हैं।
निदेशक टीआरआई ओ.पी. जैन ने बताया कि कार्यशाला में ऑबलिक एआई के भास्कर डी. गर्ग एवं सिद्धार्थ पांडे ने व्यवहारिक प्रयोगों के माध्यम से एआई तकनीक के उपयोग को समझाया। वहीं एआई आर्किटेक्ट अभिनव जैन ने कार्यालयीन कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सायबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ श्याम चंदेल ने साइबर अपराधों और उनसे बचाव के तरीकों की व्यवहारिक जानकारी दी। कार्यशाला में अतिरिक्त निदेशक आईटी गिरिराज कतीरिया ने भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
यह कार्यशाला जनजाति कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 10 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित किए जा रहे जनजाति गरिमा उत्सव की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित की गई। उत्सव के तहत जनजाति वर्ग के कल्याणार्थ संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी देने के साथ विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा 18 से 25 मई 2026 के बीच “जन भागीदारी- सबसे दूर, सबसे पहले” थीम पर धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत चयनित गांवों में लाभार्थी सेच्यूरेशन कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ जनजाति समुदाय तक पहुंचाया जाएगा।
इसके अलावा टीआरआई द्वारा समाज सेवा, शिक्षा, सामुदायिक नेतृत्व, पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और आधारभूत विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले उभरते एवं अल्पज्ञात जनजाति नायकों के नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित व्यक्तियों को 25 से 31 मई 2026 के बीच आयोजित “जनजाति गौरव सम्मान” कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कार्यशाला का संचालन हर्षवदन सिंह सोलंकी ने किया तथा आभार निदेशक सांख्यिकी सुधीर दवे ने व्यक्त किया।