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विद्यापीठ में होगा मीरा के जीवन पर प्रमाणिक ग्रन्थ का प्रकाशन - प्रो. सारंगदेवोत

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20 Feb 24
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विद्यापीठ में होगा मीरा के जीवन पर प्रमाणिक ग्रन्थ का प्रकाशन - प्रो. सारंगदेवोत

उदयपुर/जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विवि द्वारा स्थापित मीरा अध्ययन एवं शोध पीठ की ओर से मंगलवार को कुलपति सचिवालय के सभागार में ‘‘वैष्णव भक्ति परम्परा में मीरा का स्थान’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र की मुख्य अतिथि प्रो. मंजू चतुर्वेदी ने कहा कि मीरा को जानना है तो समग्र रूप से जानिये, उन्हें टुकड़ों में नहीं पहचाना जा सकता। मीरा का समग्र रूप स्त्री चेतना का आदर्श है। मीरा के पदों को पढ़ते हुए जो अनुभव होते हैं, उन पर शोध कर उनमें निहित गूढ़ रहस्यों को समझ कर साझा करना सम्बंधित विद्वानों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि मीरा के पदों के शब्दों में जो शक्ति है वह काल से भी परे है, जो आज 526 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी स्वतः ही प्रेरित करने की क्षमता रखते हैं।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि मीरा के जीवन पर कई किवंदतियाँ है, जो अब तक प्रमाणिक नहीं हैं। उन पर विद्यापीठ में विभिन्न विद्वानों द्वारा शोध किया जाएगा तथा एक प्रमाणिक ग्रन्थ का प्रकाशन किया जाएगा, जो इतिहास की सत्यता को सामने लाएगा। उन्होंने कहा कि मीरा के पद मानवीयता ओतप्रोत हैं, मीरा केवल अलौकिक ही नहीं बल्कि लौकिक मूल्यों की बात भी करती हैं।
मीरा किसी वर्ग विशेष से जुड़ी हुई नहीं थी। मीरा के पदों को प्रामाणिकता के साथ आमजन के समक्ष लाने की आवश्यकता है। पांच शताब्दियों के बाद भी उनके पदों से आमजन को प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने मीरा के 300 पदों पर आगामी संगोष्ठी की घोषणा भी की।
मानक निदेशक प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने मीरा पीठ के लिए 1 लाख रूपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संतों की आयु कम होती मीरा 49 वर्ष में ही कृष्ण में लीन हो गईं थीं। उन्होंने वैष्णव भक्ति की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मंदिर सगुण सम्प्रदाय की भक्ति का केंद्र हैं, जो आज भी निर्मित हो रहे हैं। ब्रिटेन के दस विश्वविद्यालयों में मीरा के पद व जीवनी पाठ्यक्रम में है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में विद्यापीठ का मीरा अध्ययन व शोध संस्थान ही एक ऐसा केंद्र है जो अनवरत मीरा सेमीनार व संगोष्ठियों का आयोजन कर रहा है।
प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन व संचालन मीरा पीठ के समन्वयक डॉ. यज्ञ आमेटा ने किया।
समारोह में पत्र वाचन करने वाले शोधार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किये गए तथा मनोहरलाल मूंदड़ा द्वारा संकलित पुस्तक ‘‘चौबीस अवतार एवं भारत माता’’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, डॉ. हिना खान, डॉ. बबीता रशीद, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. शिल्पा कंठालिया, विमल शर्मा, जयकिशन चौबे, इन्द्रसिंह राणावत, डॉ. ललित सालवी, विकास डांगी सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर उपस्थित थे।


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