उदयपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईओआर), हैदराबाद द्वारा राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक कृषि विज्ञान संकाय को जनजातीय उपयोजना क्षेत्र के किसानों के कृषि विकास एवं आजीविका सशक्तिकरण के लिए 10 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना आईसीएआर-आईआईओआर के निदेशक डॉ. आर. के. माथुर के मार्गदर्शन में स्वीकृत हुई है।
परियोजना के अंतर्गत कुराबड़ विकासखंड के कियावतो का फला एवं खजूरिया गांवों का चयन किया गया है, जहां 20 हेक्टेयर क्षेत्र में तिल एवं अरंडी की फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन स्थापित की जाएंगी। इसी क्रम में प्रो. आई. जे. माथुर, नोडल अधिकारी के मार्गदर्शन में दोनों गांवों में तिल एवं अरंडी की वैज्ञानिक खेती विषय पर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि विद्यापीठ शिक्षा, अनुसंधान और कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य जनजातीय किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उनके जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राजस्थान सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री की कृषि उन्नयन, आत्मनिर्भर भारत तथा जनजातीय विकास की सोच के अनुरूप आधुनिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर-आईआईओआर, हैदराबाद द्वारा स्वीकृत यह परियोजना इन प्रयासों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। इसके माध्यम से जनजातीय किसानों को तिल एवं अरंडी की वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा वैज्ञानिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। परियोजना प्रभारी प्रो. एन. एस. सोलंकी ने किसानों को तिलहन फसलों, विशेषकर तिल एवं अरंडी की खेती के आर्थिक महत्व से अवगत कराते हुए वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने पर अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। वहीं विनोद कुमार ने उन्नत बुवाई तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन एवं फसल उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
इस अवसर पर 100 जनजातीय किसानों को तिल का उन्नत बीज (0.6 किलोग्राम प्रति किसान), अरंडी की उन्नत किस्म आईसीएच-5 (2 किलोग्राम प्रति किसान), उर्वरक तथा एनपीके माइक्रोबियल इनोकुलेंट का वितरण भी किया गया, जिससे किसान वैज्ञानिक खेती को अपनाकर उत्पादन में वृद्धि कर सकें।
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जनजातीय किसानों के उत्थान के लिए 10 लाख की परियोजना स्वीकृत
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