खानपुर। रौशनी के त्यौहार दीपावली के प्रथम दिन धन तेरस पर शनिवार को खानपुर में नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिहीनता के अंधेरे को दूर किये जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। खानपुर उपखण्ड के साथ ही झालावाड़ जिले में नेत्रदान के कार्यो में लगातार वृद्धि होने के क्रम में शहर में शनिवार को चंद्रकला पार्थ 78 वर्ष के मरणोपरांत उनके परिवार की ओर से नेत्रदान का प्रेरणादायक कार्य किया गया।
भारत विकास परिषद खानपुर शाखा के नेत्रदान प्रभारी व प्रेस क्लब के अध्यक्ष महावीर जैन पत्रकार ने बताया कि शनिवार सेवानिवृत्त शिक्षक रमेशचंद्र पार्थ की धर्मपत्नी चंद्रकला पार्थ का ह्रदय गति रुक जाने से निधन के बाद उनके पुत्र प्रेमप्रकाश, भगवानदास एवं सुधीर पार्थ (पूर्व उपसरपंच) से नेत्रदान के लिए बात की। तथा पूर्व सरपंच ओर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष ललित राठौर ने भी परिजनों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। तो तीनों पुत्रो सहित दोनों पुत्रियों, पोत्रो व पूरे परिवार ने नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान कर दी। इस पर सदगुरु सेवा संस्थान के ट्रस्टी मनोज शर्मा झालावाड़ ने भवानीमंडी निवासी नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल को सूचना देकर नेत्रदान करवाने का आग्रह किया। इसके बाद शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा की टीम ने ज्योति- रथ से खानपुर पहुंचकर घर पर उपस्थित सभी परिवारजनों एवं नगरवासियों के सामने नेत्रदान प्रक्रिया संपादित की। उपस्थित सभी नगरवासियों एवं विशेषरूप से परिवार की महिलाओं और बच्चों ने नेत्रदान की प्रक्रिया को अच्छी तरह से देखा और जाना की नेत्रदान में किसी भी तरह की चेहरे पर विकृति नहीं आती है। इसमें केवल आंखों के ऊपर की झिल्ली जिसे कोर्निया कहा जाता है को ही लिया जाता है। इसमें पूरी आंख नहीं निकाली जाती है। यह रक्तहीन प्रक्रिया 10 मिनट में ही पूरी हो गई।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार चंद्रकला पार्थ का कॉर्निया अच्छा पाया गया है। जिसे आई बैंक जयपुर को भिजवा दिया गया है। जहां यह दो असहाय नेत्रहीन लोगों को नई नेत्र ज्योति प्रदान कर सकेगा। महावीर जैन के अनुसार यह खानपुर कस्बे से पहली बार नेत्रदान का पुनीत कार्य हुआ है। इससे पहले वर्ष 2023 में भारत विकास परिषद खानपुर के अध्यक्ष महेश पार्थ का नेत्रदान कोटा में हुआ था। उन्होंने बताया कि भारत विकास परिषद की प्रेरणा से खानपुर शहर में करीब चार दर्जन व्यक्तियों के द्वारा अपने नेत्रदान का संकल्प लिया हुआ है।
चंद्रकला पार्थ के पुत्र पूर्व उप सरपंच सुधीर पार्थ के अनुसार अपनी माता के नेत्रदान से परिवार को एक आत्म संतोष की प्राप्ति हुई है कि उनकी माता की आंखों से किसी अंधेरे जीवन को रोशनी प्राप्त हो सकेगी।
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रौशनी के त्यौहार पर दो नेत्रहीनों की आँखों में रौशनी लौटाने का मार्ग हुआ प्रशस्त नगर में धन तेरस पर सम्पन्न हुई नेत्रदान की प्रक्रिया
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