कोटा। भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए स्वदेशी तकनीक आधारित ‘‘कवच’’ (पूर्व नाम-ट्रेन कोलिजन अवॉयडेंस सिस्टम) का तेजी से विस्तार कर रही है। आधुनिक कवच 4.0 प्रणाली के लागू होने से कोटा मंडल सहित विभिन्न रेलखंडों पर रेल यात्रा और अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद एवं तकनीक-सक्षम बन रही है। यह प्रणाली रेल चालक को निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करते हुए सुरक्षित रेल संचालन को और सुदृढ़ बनाती है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे जुलाई 2020 में राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षित रेल संचालन को आधुनिक तकनीक से और अधिक मजबूत बनाना तथा किसी भी असामान्य परिचालन स्थिति में सुरक्षा की अतिरिक्त परत उपलब्ध कराना है।
कैसे करता है काम
रेल पटरियों के किनारे लगाए गए विशेष आरएफडी टैग, इंजन में स्थापित कवच उपकरण तथा स्टेशन के साथ होने वाला निरंतर रेडियो संचार मिलकर ट्रेन की वास्तविक स्थिति, दिशा, गति, आगे के सिग्नल तथा अनुमत गति की जानकारी लगातार उपलब्ध कराते हैं। यह प्रणाली पूरे समय ट्रेन के संचालन पर नजर रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः सुरक्षा हस्तक्षेप करती है।
कब सक्रिय होता है कवच
यदि ट्रेन निर्धारित गति सीमा से अधिक गति की ओर बढ़ती है, तो कवच सबसे पहले चालक को चेतावनी देता है। आवश्यकता पड़ने पर यह स्वतः सामान्य ब्रेक अथवा पूर्ण ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को सुरक्षित सीमा में नियंत्रित कर देता है।
इसी प्रकार, यदि किसी कारणवश लाल सिग्नल की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा हस्तक्षेप आवश्यक हो, तो कवच स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करता है। यदि किसी असामान्य परिचालन स्थिति में दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, तो यह प्रणाली दोनों ट्रेनों के चालकों को तुरंत सचेत करते हुए आवश्यकतानुसार स्वतः ब्रेक लगाकर संभावित जोखिम को टालने में सहायता करती है।
कोहरे अथवा कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी चालक को सिग्नल संबंधी जानकारी इंजन के केबिन में लगी स्क्रीन पर उपलब्ध होती है, जिससे सुरक्षित संचालन में सुविधा मिलती है। यह प्रणाली 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति के लिए डिज़ाइन की गई है तथा वर्तमान में कवच 4.0 को 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक के संचालन के लिए अनुमोदित किया गया है।
अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं
कवच प्रणाली में कई आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। यह मानव रहित समपार फाटक के निकट स्वतः हॉर्न बजा सकती है, ढलान पर ट्रेन के अनियंत्रित आगे या पीछे खिसकने की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर उसे नियंत्रित कर सकती है तथा किसी ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अप्रत्याशित रूप से रुक जाने पर आवश्यकतानुसार स्वतः एसओएस संदेश प्रसारित कर सकती है।
इसके अतिरिक्त यह ट्रेन की लंबाई का स्वतः आकलन करती है, जिससे सुरक्षित दूरी बनाए रखने में सहायता मिलती है। नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) के माध्यम से नियंत्रण कक्ष में अधिकारी कवच युक्त ट्रेनों की स्थिति एवं सुरक्षा संबंधी घटनाओं की वास्तविक समय में निगरानी भी कर सकते हैं।
यात्रियों को क्या मिलेगा लाभ
कवच प्रणाली रेल सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करती है। यह संभावित जोखिम की स्थिति में स्वतः हस्तक्षेप कर ट्रेन के सुरक्षित संचालन में सहायता करती है तथा आमने-सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर जैसी दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम करती है। विद्युतीकृत एवं गैर-विद्युतीकृत दोनों प्रकार के रेलखंडों पर कार्य करने में सक्षम यह प्रणाली यात्रियों को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और निश्चिंत रेल यात्रा का अनुभव प्रदान करती है।
श्री जैन ने बताया कि कवच एक अत्याधुनिक सहायक सुरक्षा प्रणाली है, जबकि ट्रेन के सुरक्षित संचालन एवं सभी परिचालन नियमों के पालन की प्राथमिक जिम्मेदारी रेल चालक की ही रहती है। भारतीय रेल का लक्ष्य अधिकाधिक रेलखंडों एवं रेलगाड़ियों को कवच प्रणाली से सुसज्जित कर यात्रियों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित एवं भरोसेमंद रेल यात्रा उपलब्ध कराना है।
Kota News
‘‘कवच’’ से और सुरक्षित हो रही रेल यात्रा
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