हाड़ौती अंचल में कथा जगत की साहित्यिक यात्रा बूंदी के लज्जाराम मेहता की आदर्शवादी कहानियों से प्रारंभ होकर सन् 1941 में राजेन्द्र सक्सेना की "पगडण्डियां" तक एक सृजनात्मक पहल थी। डॉ. नरेन्द्र चतुर्वेदी की कृति के अनुसार "पगडण्डियां" चर्चित कहानी संग्रह कोटा में ही प्रकाशित हुआ। झालावाड़ से निकलने वाली "सौरभ" पत्रिका में कमलकान्त त्रिवेदी की कहानियां उपदेश का प्रभाव और प्रेम प्रकाशित हुई। इसी दौर में इसे हम इस अंचल में सर्वप्रथम कहानियों का प्रकाशन मान सकते है। चन्द्रधर गुलेरी की "उसनें कहा था" चर्चित कहानी "सरस्वती" पत्रिका में प्रकाशित हुई।
प्रथम महिला कहानीकार बंग महिला राजेन्द्र बाला घोष की कहानी "दुलाई वाला" सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई। उस समय इनके आक्रामक लेखन ने पुरूषों के वर्चस्व को चुनौती दी। इसमें घूंघट में छिपी महिला के रोचक प्रसंग है। इसी श्रृंखला में महिला कथाकारों में महादेवी वर्मा, सरोजनी नायडू, सुभद्रा कु. चौहान प्रमुख थी। महादेवी जी की "श्रृंखला की कड़ियां" संकलन नें स्त्री विमर्श पर गम्भीरता से विचार दिया।
हाड़ौती अंचल में आधुनिक कथा साहित्य में नारी का परिवर्तन रूप समाज के समक्ष आया जिसमें डॉ. क्षमा चतुर्वेदी, डॉ. सरला अग्रवाल, डॉ. गीता सक्सैना, डॉ. कंचना सक्सैना, डॉ. कृष्णा कुमारी, डॉ. सुषमा अग्रवाल, श्याम शर्मा, रीता गुप्ता, अर्चना शर्मा, रेखा पंचौली प्रमुख है। हाड़ौती में लगभग विगत तीस वर्षों से कथा लेखन में निरन्तर सृजनरत क्षमा चतुर्वेदी की कहानियों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके कहानी संग्रह सूरज डूबनें से पहले, मुट्ठी भर धूप, चुनौती, स्वयंसिद्धा, अनाम रिश्ते प्रमुख है।
अनाम रिश्ते में नारी पात्र सौम्या का उदाहरण देखिये "मैडम ! सौम्या आगे बड़ी थी......मैडम ! क्या एक विधवा भी ब्यूटीपार्लर जाकर अपना श्रृंगार करा सकती है? माहौल में सन्नाटों सा छा गया था.....हां बेटी, क्यों नहीं, अच्छा दिखना कोई गुनाह थोडे ही है।" यहां क्षमा जी का नारी मन एक विधवा की पहचान, अस्मिता और स्वाभिमान को जीवंत करता है। डॉ. क्षमा चतुर्वेदी की कहानियों में भाषा और शिल्प की दृष्टि से सरल, सहज भाषा पात्रों के मध्य रोचक व आकर्षक संवाद, छोटे-छोटे संवाद कहानी को बोझिल नहीं होने देते साथ ही उन्होने लोप सूचक चिह्न योजक चिह्न जैसे भीड़-भाड़, साफ-सुथरा, बदला-बदला आदि शब्दों का अधिक प्रयोग किया है। यही शिल्प सौन्दर्य सुमन शर्मा की 'घर वापसी, डॉ. सुशीला जोशी की "आखिर क्यूं", डॉ. शशि जैन की "गाँव की रोशनी" में भी दृष्ट्य है।
हाड़ौती की दूसरी सशक्त कथाकार डॉ. सरला अग्रवाल की नारी समझदार है जो अपनी बुद्धि व विवेक से बुद्धिहीन पुरुष को सुधार देती है। इनकी "अनुमेहा" में आशाओं, अपेक्षओं के साथ-साथ हादसों के उतार-चढाव को दर्शाया है। यहां कहानी की विकास यात्रा में कथ्य का नयापन धीरे-धीरे कहानी को प्रौढता की ओर ले जाता है। ज्ञातव्य है कि यह सत्र हमनें महीयसी सरला अग्रवाल को समर्पित किया है। वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही के अनुसार हाड़ौती अंचल में प्रथम स्थापित कथाकार के रूप में डॉ. क्षमा चतुर्वेदी नजर आती है उसके बाद डॉ. सरला अग्रवाल। दोनों ने समाज के हर पहलू को अनुभूत कर कलम चलाई है।" इसी प्रकार हाडौती में कोटा की श्यामा शर्मा जी बाल साहित्य और सामाजिक चेतना पर केन्द्रित लेखन के लिए जानी जाती है। श्यामा जी ने "राजस्थानी लोक कथावां" और हाड़ौती अंचल की दस लोक कथाओं के संग्रह के माध्यम से प्रेरणादायी दिशा बोध लोककथाओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इनका किट्टी पार्टी उपन्यास प्रक्रियाधीन है।
गीता सक्सैना की "अद्भुत अहसास" स्त्री विमर्श को दर्शाता है। गीता जी काव्यत्व के माध्यम से भाषा में लोच लानें का प्रयास करती है। कृष्णा कुमारी की "स्वप्निल कहानियां" नारी जीवन के प्रश्नों को ज्ञानात्मक संवेदना से उलझे हुए सवालों के उत्तर तलाशती है। वहीं रीता गुप्ता की "वामिका" सामाजिक समस्या के साथ-साथ देश भक्ति प्रेम व नारी आत्मविश्वास को सुदृढ करती है। रेखा पंचौली की "हिमशिखर और चांदनी" में समाज के प्रत्येक पक्ष को उजागर कर कल्पना व यथार्थ के समन्वित स्वर को प्रस्तुत किया है। वो स्थापित कथाकार है। डॉ. कंचना सक्सैना के "अन्तराल" में नर-नारी के नाजुक अहसास की सुखद अनुभूति, दैहिक लिप्सा, महानगरीय जीवन की त्रासदी का चित्रण मिलता है। पार्वती जोशी के कहानी संग्रह "वह गुलाब", "स्पर्श" आदर्शवादी समाज की परिकल्पना है। शिल्प की दृष्टि से वर्णनात्मक शैली का प्रयोग है। अर्चना शर्मा की "मुझे मां चाहिए" में "कोशिश" कहानी भावनात्मक शैली की व्यंजना का उदाहरण देखिये, "पति के जुराबों की दुर्गन्ध शहीद होने के पश्चात् प्यारी लगने लगती है। वही दुर्गन्ध जीनें का सहारा बनती है।" सुषमा अग्रवाल की "विदाई" आत्मविश्चास के साथ अन्याय का प्रतिकार सिखाती है इसमें रोचकता के साथ-साथ यथार्थवादी शैली का चित्रण है।
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल व डॉ. वैदेही गौतम द्वारा सम्पादित "कथा वल्लरी" कथा संकलन में हाड़ौती की अड़तीस विदुषियों की कहानियों का संकलन हैं जिसमें प्रमुख है अल्पना गर्ग, डॉ. अपर्णा पाण्डे, प्रार्थना भारती, डॉ. युगल सिंह की कहानियां समाज की ज्वलंत समस्याओं को उजागर करती है।
प्राचीन कथाएँ समाज को भरोसा दिलाती थी किन्तु वर्तमान कहानियां समाज को सचेत करती है। वर्तमान कहानियां पढ़कर लगता है कि इनका भाषा और शिल्प सबसे अलग है। प्रीतिमा पुलक, रेखा शर्मा, संजू श्रृंगी, रेणू राधे, गरिमा राकेश, रश्मि वैभव की कहानियों में चारित्रिक गुणों से युक्त नायिका नें प्रभावशाली पात्र बनकर समाज को नवीन संदेश दिया है।
कथा साहित्य जगत के लिए कोटा में सबसे बड़ी उपलब्धी विगत वर्ष यह रही कि जितेन्द्र निर्मोही जी के आग्रह पर कथा पुरोधा "राजेन्द्र राव" जी से संवाद व परिचर्चा का आयोजन रखा गया उसमें मुझे भी संवाद करने का सुअवसर मिला। उनका वक्तव्य "नितान्त एकांत वास में कथाकार भावों को लेखनी से उदृत करके पूर्ण सामाजिक हो जाता है" यह वक्तव्य अनुभव मुझे रोमांचित कर देता है। राजेन्द्र राव जैसे नामचीन कथाकारों से हाड़ौती अंचल की लेखिकाओं की संवाद की आवश्यकता महसूस करती हूँ। विचारों के आदान प्रदान से भावों की अभिव्यक्ति पूर्ण होती है।
आज हाड़ौती की महिला कथाकाराओं ने चूल्हे चौके के इर्द-गिर्द घूमती नारी को जीवन के हर पहलू से स्पर्श कराया है। उन्हे विस्तृत केनवास पर उकेरा है। क्षमा चतुर्वेदी व सरला अग्रवाल की कहानियों में आदर्श व यथार्थ के धरातल पर पुरानी परम्परा को देखा जा सकता है कथा वल्लरी की लेखिकाओं में जन चेतना, जागरूकता आत्मविश्वास, देह के भीतर बसे मन और बुद्धि में स्वतंत्रता और आत्मबोध को दर्शाया है। ये कहानियाँ नयी भाषा व नये शिल्प के साथ समाज के समक्ष नवाचार प्रस्तुत करती है।
डॉ. नरेन्द्र चतुर्वेदी की चर्चित कृति "हाड़ौती अंचल का गद्य साहित्य परम्परा और विकास तथा निर्मोही जी के आलेख और टिप्पणियों के आधार पर तत्कालीन समय तक दस से बारह महिला कथाकार सामने आयी थी। विगत वर्षों में निर्मोही जी की प्रेरणा से कथा संदर्भों को लेकर जो प्रमुख कार्य डॉ.प्रभात कुमार सिंघल ने किए हैं, उससे वर्तमान में महिला कथाकारों की संख्या अड़तीस हो गयी है। इसे हाड़ौती अंचल की महिला कथाकारों के क्षेत्र में महनीय सफलता माना जा सकता है, यह सुखद सूचना है। यह यात्रा सतत जारी रहे। इसके लिए प्रभात जी को असीम बधाई।
अभी हाड़ौती अंचल में श्रेष्ठ कार्य कथा क्षेत्र को लेकर किये जाने हैं। यह स्वप्न वरिष्ठ साहित्यकारों की प्रेरणा से ही पूर्ण होंगे। उनके मार्ग दर्शन और आशीष से हाड़ौती अंचल साहित्यिक क्षेत्र में प्रगति करेगा।
Literature News
हाड़ौती अंचल का महिला कथा साहित्य एक विवेचना
डॉ. वैदेही गौतम प्राचार्य, रा.बा.उ.मा.वि. सीमलिया सुल्तानपुर, कोटा (राज.
Related stories
Need to Connect the New Generation with the Legacy of Haldighati and Dewair: Union Minister Shekhawat
Udaipur: Union Minister for Culture and Tourism Gajendra Singh Shekhawat said that the younger generation mus…
Panel Discussion on “Medical Tourism in Udaipur: Possibilities and Challenges” Held on World Tourism Day
Udaipur: On the occasion of World Tourism Day, the Tourism and Hotel Management Programme of Mohanlal Sukhadi…
Seeing the World Through the Camera: Photography Workshop Organised at Pacific College
Udaipur: A photography workshop was organised at Pacific College, Chitrakoot Nagar, on Saturday by Pacific Co…
BCI Yuva Investor Connect 2026 Held in Rajasthan, Attracts Registrations from 350 Startups
Udaipur: BCI Yuva Investor Connect 2026 was organised at IIM Udaipur with the objective of strengthening the…