गांधीनगर/ कोटा । समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के गांधीनगर, गुजरात में 11 एवं 12 अप्रैल को आयोजित 11 वें वार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन सामाजिक प्रकल्प के रूप पर जरूरतमंद को रक्त और अगला अधिवेशन इंदौर में आयोजित करने के प्रस्ताव पारित किए गए। प्रति वर्ष उल्लेखनीय कार्य करने वाले सदस्य को एक लाख रुपए का स्मृतिशेष पुष्पा देवी व्यास समरस साहित्य शिरोमणि एवं उत्कृष्ट समरस सेवा अलंकरण देने की घोषणा करते हुए संस्थान के संस्थापक डॉ. मुकेश कुमार स्नेहिल ने इस वर्ष का प्रथम पुरस्कार संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन कोटा को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं और योगदान के लिए प्रदान किया गया, जिसका पूरे सदन ने पुरजोर स्वागत किया। अतिथियों द्वारा गणेश जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित, समरस गान और समरस गीत और सुशीला लोवादा के स्वागत नृत्य के साथ अधिवेशन का शुभारंभ हुआ।
अधिवेशन के अतिथि गांधीनगर की विधायक रीताबेन पटेल, निदेशक चेस ग्लोब इंडिया
डॉ. केदार सावरीकर, वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व निदेशक इलाहाबाद बैंक, दिनेश दुबे, जी. के. वी. इन्फ्रास्ट्रक्चर के विजय बणजारा, चंद्रा डिजिटल स्टूडियो के सत्यनारायण शर्मा, गुजरात फाउंडेशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राजपुरोहित, एन.पी.पी.सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष
भूपेश प्रजापति, न्यू तृप्ति हॉस्पिटल के डॉ. सुनील कुमार जोशी ने संस्थान के साहित्यिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की और देश के कोने-कोने से आए साहित्यकारों के महाकुंभ में 125 साहित्यकारों को संस्थान की ओर से सम्मानित किया तथा 9 पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
संस्थान के संस्थापक एवं संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास स्नेहिल ने सभी का स्वागत कर बताया कि 18 राज्यों और तीन देशों में संस्थान की इकाइयां कार्यरत हैं जिनसे 43 हजार साहित्यकार सदस्य जुड़े हैं। साहित्य संवर्धन के साथ सामाजिक सेवा की दृष्टि से गतवर्ष भूखे को भोजन प्यासे को पानी सेवा प्रकल्प लिया गया था । उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष जरूरतमंद को रक्तदान सेवा प्रकल्प भी जोड़ा जायेगा। जिन समरसी सदस्यों ने प्रेम पुष्प भाग दो में अपनी रचनाएं भेजी उनको पुस्तक में सहयोग के लिए पृथक से भी सम्मानित किया गया है।
संस्थान द्वारा प्रकाशित काव्य कृति प्रेम पुष्प भाग दो का अतिथियों ने लोकार्पण किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन ने बताया कि पुस्तक में दस्तक 125 सदस्यों की दो-दो कविताओं के साथ उनका संक्षिप्त परिचय प्रकाशित किया गया है। सुरेन्द्र शर्मा बसर की कृति चलते चलते, विजय प्रताप सिंह की कृति अंतर्द्वंद्व, अमरनाथ मूर्ति एवं राजेंद्र नाथ मूर्ति की कृति कविता संग्रह, सुधांश शेखर बख्शी की कृति यादों के साऐं, रूपाली गर्ग की कृति परत दर परत एक नारी, डॉ. शशि जैन एवं डॉ. प्रभात कुमार सिंघल की कृति साहित्य में पर्यावरण, पर्यटन और अध्यात्म, डॉ. वैदेही गौतम की कृति उन्मुक्त गगन उड़ती पतंग एवं डॉ. संगीता देव की कृति सांस्कृतिक थाती लोक मांडना कला का भव्य लोकार्पण किया गया। लेखकों एवं संपादकों ने अपनी कृतियों को संक्षिप्त जानकारी दी।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में 108 कवियों ने काव्यपाठ किया और अपनी कविताओं से देशभक्ति, सामाजिक समरसता, हास्य व्यंग्य के साथ-साथ रक्तदान का प्रभावी संदेश दिया।
अधिवेशन के प्रथम दिन साहित्यिक भ्रमण कार्यक्रम के तहत साहित्यकारों को गांधीनगर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के साथ - साथ एशिया के सबसे बड़े और आधुनिक ब्लड बैंक का भ्रमण करवाया गया।
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गांधीनगर में साहित्यकारों का महाकुंभ
जरूरतमंद को रक्तदान एवं अगला अधिवेशन इंदौर में
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